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करनाल में हर साल होते हैं डेढ़ दर्जन बाल विवाह
करनाल
Updated Wed, 05 Feb 2014 04:24 PM IST
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प्रदेश में हो रहे बाल विवाह आज भी मुगल काल की याद ताजा कर रहे हैं। हालांकि आजाद भारत के संविधान के साथ ही बाल विवाह निषेध कानून बना दिया गया था, लेकिन आजादी के दशकाें बाद भी बाल विवाह रुकने का नाम नहीं ले रहे।
अकेले करनाल जिले में हर साल करीब डेढ़ दर्जन बाल विवाह के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के अन्य भागों में हर साल कितने बालविवाह होते होंगे।
यह हाल तब है जब महिला एवं बाल विकास विभाग आए दिन बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने के दावे कर रहा है। हर जिले में प्रोटेक्शन आफिसर कम मैरिज प्रोबिटेशन आफिसर तैनात किए गए हैं, लेकिन जिले में इस कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।
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शिकायत मिलने के बाद ही इस तरह के अपराध के खिलाफ मामूली कार्रवाई की जाती है। शायद यही कारण है कि कानून की परवाह किए बिना कई लोग मासूम चेहरों को फेरों के बंधन में बांध कर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते।
करनाल के प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से जिले में बाल विवाह के संबंध में ली गयी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 से नवंबर 2013 तक जिले में 74 बाल विवाह के मामले सामने आए।
प्रोटेक्शन आफिसर के अनुसार, हालांकि इन बाल विवाह में से 28 को उनके परार्मश के बाद रोक दिया गया, लेकिन 16 मामले कोर्ट के आदेशों के बाद ही रोके गए। जबकि 14 मामलों में अभियोग अंकित करने की सिफारिश की गयी।
बाल विवाह रोकने के प्रचार पर नहीं होता खर्च
बाल विवाह निषेध कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हालांकि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रचार किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन चाइल्ड मैरिज प्रोबिटेशन आफिसर कार्यालय इसके प्रचार में कोई रुचि नहीं दिखाता।
इसलिए बालविवाह कानून के संबंध में प्रचार पर इस कार्यालय ने आज तक एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। बाल विवाह रोकने के लिए प्रचार किया जाना चाहिए, ताकि लोग इस बारे में जागरूक हों।
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अकेले करनाल जिले में हर साल करीब डेढ़ दर्जन बाल विवाह के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के अन्य भागों में हर साल कितने बालविवाह होते होंगे।
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यह हाल तब है जब महिला एवं बाल विकास विभाग आए दिन बाल विवाह के प्रति लोगों को जागरूक करने के दावे कर रहा है। हर जिले में प्रोटेक्शन आफिसर कम मैरिज प्रोबिटेशन आफिसर तैनात किए गए हैं, लेकिन जिले में इस कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है।
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शिकायत मिलने के बाद ही इस तरह के अपराध के खिलाफ मामूली कार्रवाई की जाती है। शायद यही कारण है कि कानून की परवाह किए बिना कई लोग मासूम चेहरों को फेरों के बंधन में बांध कर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते।
करनाल के प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता की ओर से जिले में बाल विवाह के संबंध में ली गयी जानकारी के अनुसार, वर्ष 2008 से नवंबर 2013 तक जिले में 74 बाल विवाह के मामले सामने आए।
प्रोटेक्शन आफिसर के अनुसार, हालांकि इन बाल विवाह में से 28 को उनके परार्मश के बाद रोक दिया गया, लेकिन 16 मामले कोर्ट के आदेशों के बाद ही रोके गए। जबकि 14 मामलों में अभियोग अंकित करने की सिफारिश की गयी।
बाल विवाह रोकने के प्रचार पर नहीं होता खर्च
बाल विवाह निषेध कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हालांकि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रचार किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन चाइल्ड मैरिज प्रोबिटेशन आफिसर कार्यालय इसके प्रचार में कोई रुचि नहीं दिखाता।
इसलिए बालविवाह कानून के संबंध में प्रचार पर इस कार्यालय ने आज तक एक पैसा भी खर्च नहीं किया है। बाल विवाह रोकने के लिए प्रचार किया जाना चाहिए, ताकि लोग इस बारे में जागरूक हों।