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इंजीनियर और सीए भी सीख रहे डेयरी फार्मिंग
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:36 AM IST
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व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण
- फोटो : ब्यूराो
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एनडीआरआई में मंगलवार को व्यावसायिक डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 12 राज्योें के 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव नेे किया।
एनडीआरआई के ट्रेनिंग प्रोग्रामों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें न केवल डेयरी से जुड़े लोग ही भाग ले रहे हैं, बल्कि आईआईटी, मार्केटिंग, कंप्यूटर, सीए तथा सरकारी नौकरी पर कार्यरत लोग भी इसमें भाग ले रहे हैं। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मेें अधिकतर लोगोें को डेयरी से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि समाज ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। इसलिए वे यहां से डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग लेकर किसानों को इसके बारे में जागरूक करके अपना ऋण अदा करना चाहते हैं।
डॉ. एके श्रीवास्तव ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि डेयरी लाखों लोगों की आय का साधन है। भारतवर्ष में डेयरी सेक्टर पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जबकि विश्व की वार्षिक ग्रोथ रेट 1.1 प्रतिशत है। अगर वैज्ञानिक रूप से डेयरी फार्मिंगकी जाए तो दो से तीन पशु रखने वाला किसान भी अच्छा मुनाफा कमा सकता है। इसके लिए किसान को मात्र दूध उत्पादन नहीं, बल्कि दूध को प्रोसेस करके उसकी मूल्य वृद्धि की ओर भी ध्यान देना होगा। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक अनुसंधान डॉ. आरके मलिक, संयुक्त निदेशक शैक्षिक डॉ. आरआरबी सिंह, डॉ. लबा सबीखी, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. एके सिंह तथा गोपाल सांखला आदि उपस्थित रहे।
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ये भी ले रहे प्रशिक्षण
आईआईटी इंजीनियर नीरज और अनु हांडा, सीए धर्मेंद्र, पूर्व वैज्ञानिक जसबीर और विजयलक्ष्मी और ऑर्गेनिक फर्म के मालिक राजीव चौहान डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
एक साल में आयोजित हुए 11 ट्रेनिंग प्रोग्राम
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि एनडीआरआई के बिजनेस प्लानिंग एंड डवलपमेंट यूनिट के तहत वर्ष 2015-16 में 11 ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए गए। जिनमें 265 लोगों ने ट्रेनिंग ली। इसमेें से अधिकतर ने अपना व्यवसाय भी शुरू किया। यह संस्थान युवाओें को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है और आगे भी इस प्रकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाता रहेगा।
भारतीय डेयरी फार्मिंग की खूबियां
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से निवेश सीमित होने के बावजूद लगातार विकास, मेगा जैव विविधता और सबसे बड़ी गो जातीय जनसंख्या, उच्च विकास दर के साथ सबसे अधिक दूध उत्पादन, कम उत्पादन लागत, विश्व का सबसे बड़ा और प्रमुख भैंस जर्मप्लाज्म धारक, विभिन्न उत्पादन प्रणालियों (शून्य इनपुट-कम उत्पादन, कम इनपुट-मध्यम उत्पादन, गहन इनपुट-उच्च उत्पादन)।
भारतीय डेयरी फार्मिंग की कमियां
उच्च आबादी के साथ कम उत्पादकता, उत्पादन प्रणाली में गुणवत्ता पर उनका नियंत्रण नहीं, अपर्याप्त कोल्ड चेन की सुविधा, कमजोर पशु स्वास्थ्य, चारे की कमी, कम प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी अपनाने का निम्न स्तर, डेयरी पशुओं की देर यौन परिपक्वता, उपलब्धता और आवश्यकता के बीच गहरी खाई।
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एनडीआरआई के ट्रेनिंग प्रोग्रामों की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें न केवल डेयरी से जुड़े लोग ही भाग ले रहे हैं, बल्कि आईआईटी, मार्केटिंग, कंप्यूटर, सीए तथा सरकारी नौकरी पर कार्यरत लोग भी इसमें भाग ले रहे हैं। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मेें अधिकतर लोगोें को डेयरी से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि समाज ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। इसलिए वे यहां से डेयरी फार्मिंग की ट्रेनिंग लेकर किसानों को इसके बारे में जागरूक करके अपना ऋण अदा करना चाहते हैं।
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डॉ. एके श्रीवास्तव ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि डेयरी लाखों लोगों की आय का साधन है। भारतवर्ष में डेयरी सेक्टर पांच प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जबकि विश्व की वार्षिक ग्रोथ रेट 1.1 प्रतिशत है। अगर वैज्ञानिक रूप से डेयरी फार्मिंगकी जाए तो दो से तीन पशु रखने वाला किसान भी अच्छा मुनाफा कमा सकता है। इसके लिए किसान को मात्र दूध उत्पादन नहीं, बल्कि दूध को प्रोसेस करके उसकी मूल्य वृद्धि की ओर भी ध्यान देना होगा। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक अनुसंधान डॉ. आरके मलिक, संयुक्त निदेशक शैक्षिक डॉ. आरआरबी सिंह, डॉ. लबा सबीखी, डॉ. राजन शर्मा, डॉ. एके सिंह तथा गोपाल सांखला आदि उपस्थित रहे।
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ये भी ले रहे प्रशिक्षण
आईआईटी इंजीनियर नीरज और अनु हांडा, सीए धर्मेंद्र, पूर्व वैज्ञानिक जसबीर और विजयलक्ष्मी और ऑर्गेनिक फर्म के मालिक राजीव चौहान डेयरी फार्मिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
एक साल में आयोजित हुए 11 ट्रेनिंग प्रोग्राम
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि एनडीआरआई के बिजनेस प्लानिंग एंड डवलपमेंट यूनिट के तहत वर्ष 2015-16 में 11 ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए गए। जिनमें 265 लोगों ने ट्रेनिंग ली। इसमेें से अधिकतर ने अपना व्यवसाय भी शुरू किया। यह संस्थान युवाओें को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है और आगे भी इस प्रकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाता रहेगा।
भारतीय डेयरी फार्मिंग की खूबियां
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से निवेश सीमित होने के बावजूद लगातार विकास, मेगा जैव विविधता और सबसे बड़ी गो जातीय जनसंख्या, उच्च विकास दर के साथ सबसे अधिक दूध उत्पादन, कम उत्पादन लागत, विश्व का सबसे बड़ा और प्रमुख भैंस जर्मप्लाज्म धारक, विभिन्न उत्पादन प्रणालियों (शून्य इनपुट-कम उत्पादन, कम इनपुट-मध्यम उत्पादन, गहन इनपुट-उच्च उत्पादन)।
भारतीय डेयरी फार्मिंग की कमियां
उच्च आबादी के साथ कम उत्पादकता, उत्पादन प्रणाली में गुणवत्ता पर उनका नियंत्रण नहीं, अपर्याप्त कोल्ड चेन की सुविधा, कमजोर पशु स्वास्थ्य, चारे की कमी, कम प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी अपनाने का निम्न स्तर, डेयरी पशुओं की देर यौन परिपक्वता, उपलब्धता और आवश्यकता के बीच गहरी खाई।