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डॉक्टर नदारद, लोगों ने अस्पताल पर ताला जड़ा
कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 14 Jan 2014 12:12 AM IST
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बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के परेशान इस्माईलाबाद के लोगों ने सोमवार को स्थानीय सरकारी अस्पताल पर ताला जड़ दिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कसबा वासी धरने पर जमे रहे। उधर अस्पताल पर धरने-प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच ताला लगाने की सूचना मिलते ही पिहोवा के एसडीएम एचसी भाटिया, नायाब तहसीलदार हरबंसलाल शर्मा, सीएमओ डॉ. शिवकुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. केके शर्मा मौके पर पहुंचे और लोगों को पुख्ता प्रबंधों का आश्वासन देकर सरकारी अस्पताल का ताला खुलवाया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कसबे के सरकारी अस्पताल में लंबे-लंबे समय से डॉक्टरों और दवाओं का टोटा है, मगर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इन जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है। यहां तक की शाम चार बजे के बाद यहां लेडी मेडिकल आफिसर एवं मेडिकल आफिसर उपलब्ध नहीं होते।
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इसकी वजह से क्षेत्र के लोग रोजाना परेशानी झेलते हैं। सोमवार को समाजसेवी प्रह्लाद भगत शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सरकारी अस्पताल के सामने एकत्रित हो गए। इस मौके पर प्रह्लादभगत शर्मा ने कहा कि कस्बे में लंबे समय से न तो महिला डॉक्टर है और न अन्य कोई भी डॉक्टर शाम चार बजे के बाद अस्पताल में उपलब्ध रहता है।
50 हजार लोगों के लिए लचर स्वास्थ्य सेवाएं
समाजसेवी सुरेंद्र बंटी शर्मा, सोनू अरोड़ा, अनवर खान, सुरेंद्र अग्रवाल, प्रकाश थिंद, जगपाल, संत बजाज, सोहन शर्मा, धर्मेंद्र नैन, केवल छाबड़ा, कर्मचंद सैनी, रामेश्वर चोपड़ा, गुरनाम फौजी, सोनू मरवाह, अमन शर्मा, अनूप सिंह, अश्वनी शर्मा, यशपाल सिंधवानी, मुकेश मदान आदि ने कहा कि सरकार एक ओर तो 24 घंटे डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध रहने के दावे कर रही है, लेकिन कस्बे के अस्पताल के हालात बिल्कुल खराब हैं। इस अस्पताल पर पचार हजार लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा है, लेकिन अस्पताल में अधिकतर समय न तो डॉक्टर होता न दवाइयां।
नेशनल हाईवे पर विपरीत हालात में शून्य हैं प्रबंध
प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस्माईलाबाद नेशनल हाईवे पर है और विपरीत हालातों में इस अस्पताल की गौण स्थिति पीड़ितों के लिए घातक हो सकती है, क्योंकि रात के समय डॉक्टर न रहने पर लोगों को दुर्घटना की स्थिति में अंबाला, पिहोवा, कुरुक्षेत्र आदि अस्पतालों में जाना पड़ता है।
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प्रदर्शन के दौरान कसबा वासी धरने पर जमे रहे। उधर अस्पताल पर धरने-प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच ताला लगाने की सूचना मिलते ही पिहोवा के एसडीएम एचसी भाटिया, नायाब तहसीलदार हरबंसलाल शर्मा, सीएमओ डॉ. शिवकुमार, डिप्टी सीएमओ डॉ. केके शर्मा मौके पर पहुंचे और लोगों को पुख्ता प्रबंधों का आश्वासन देकर सरकारी अस्पताल का ताला खुलवाया।
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प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कसबे के सरकारी अस्पताल में लंबे-लंबे समय से डॉक्टरों और दवाओं का टोटा है, मगर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इन जरूरतों को पूरा करने में विफल रहा है। यहां तक की शाम चार बजे के बाद यहां लेडी मेडिकल आफिसर एवं मेडिकल आफिसर उपलब्ध नहीं होते।
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इसकी वजह से क्षेत्र के लोग रोजाना परेशानी झेलते हैं। सोमवार को समाजसेवी प्रह्लाद भगत शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीण सरकारी अस्पताल के सामने एकत्रित हो गए। इस मौके पर प्रह्लादभगत शर्मा ने कहा कि कस्बे में लंबे समय से न तो महिला डॉक्टर है और न अन्य कोई भी डॉक्टर शाम चार बजे के बाद अस्पताल में उपलब्ध रहता है।
50 हजार लोगों के लिए लचर स्वास्थ्य सेवाएं
समाजसेवी सुरेंद्र बंटी शर्मा, सोनू अरोड़ा, अनवर खान, सुरेंद्र अग्रवाल, प्रकाश थिंद, जगपाल, संत बजाज, सोहन शर्मा, धर्मेंद्र नैन, केवल छाबड़ा, कर्मचंद सैनी, रामेश्वर चोपड़ा, गुरनाम फौजी, सोनू मरवाह, अमन शर्मा, अनूप सिंह, अश्वनी शर्मा, यशपाल सिंधवानी, मुकेश मदान आदि ने कहा कि सरकार एक ओर तो 24 घंटे डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध रहने के दावे कर रही है, लेकिन कस्बे के अस्पताल के हालात बिल्कुल खराब हैं। इस अस्पताल पर पचार हजार लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा है, लेकिन अस्पताल में अधिकतर समय न तो डॉक्टर होता न दवाइयां।
नेशनल हाईवे पर विपरीत हालात में शून्य हैं प्रबंध
प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस्माईलाबाद नेशनल हाईवे पर है और विपरीत हालातों में इस अस्पताल की गौण स्थिति पीड़ितों के लिए घातक हो सकती है, क्योंकि रात के समय डॉक्टर न रहने पर लोगों को दुर्घटना की स्थिति में अंबाला, पिहोवा, कुरुक्षेत्र आदि अस्पतालों में जाना पड़ता है।