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कपिल सरोवर में श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Sun, 17 Nov 2013 11:40 PM IST
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कैथ्ाल के कलायत में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर कलायत के श्रीकपिल मुनि तीर्थ में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगा कर अपने इष्टदेवों की पूजा की। एक मास से मंदिर में जारी कार्तिक मास की कथा का भी रविवार को विधिवत रूप से समापन हो गया।
दूर दराज से भारी संख्या में मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ में हिस्सा लिया व कथा का श्रवण किया। मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश गौतम ने कहा कि कार्तिक मास में पवित्र सरोवरों व नदियों के स्नान व कथा के श्रवण से भारी पुण्य प्राप्त होता है।
कार्तिक माह की पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने भजनों का भी जमकर आनंद लिया। पौराणिक तीर्थ में स्नान करके पूजा करने व कथा सुनने के बाद महिलाएं श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में ही भजनों का गायन कर रही थी जिसके चलते न केवल पूरा मंदिर परिसर व आसपास का स्थान धार्मिक रंग में रंगा हुआ था बल्कि महिलाओं ने भजनों पर नाच कर खुशी भी व्यक्त की। पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर दूरदराज से श्रद्धालुओं के आने के कारण कपिल मुनि रोड व रेलवे रोड पर दोपहर तक पूरी तरह भीड़ का जाम बना हुआ था।
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कार्तिक पूर्णिमा का नाम त्रिपुरी पूर्णिमा भी
गांव बडसीकरी के महाकाली तीर्थधाम में कार्तिक पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। तीर्थधाम की महंत उमागिरी व पशुपति गिरी ने बताया कि इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इसी दिन भगवान का मत्स्यावतार भी हुआ था।
इस दिन गंगा स्नान, दीप दान आदि का महत्व है। यदि किसी कारण से गंगा स्नान को न जाया जा सके तो नगर के मंदिर में बने सरोवर में स्नान करने से भी वही पुण्य प्राप्त हो जाता है। साध्वी उमागिरी ने बताया कि इस दिन यदि कृत्तिका नक्षत्र हो तो महा कार्तिकी होती है, भरणी नक्षत्र में आने से विशेष फलदायी होती है।
रोहिणी नक्षत्र में आने पर इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश त्रिदेवों ने इसे महा पुनीत पर्व कहा है। उन्होंने बताया कि इस दिन चंद्रोदय पर शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूइया और क्षमा कार्तिकाओं का पूजन वंदना करने से संभूत पुण्य फल मिलता है।
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दूर दराज से भारी संख्या में मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने हवन यज्ञ में हिस्सा लिया व कथा का श्रवण किया। मंदिर के मुख्य पुजारी वेद प्रकाश गौतम ने कहा कि कार्तिक मास में पवित्र सरोवरों व नदियों के स्नान व कथा के श्रवण से भारी पुण्य प्राप्त होता है।
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कार्तिक माह की पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने भजनों का भी जमकर आनंद लिया। पौराणिक तीर्थ में स्नान करके पूजा करने व कथा सुनने के बाद महिलाएं श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में ही भजनों का गायन कर रही थी जिसके चलते न केवल पूरा मंदिर परिसर व आसपास का स्थान धार्मिक रंग में रंगा हुआ था बल्कि महिलाओं ने भजनों पर नाच कर खुशी भी व्यक्त की। पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर दूरदराज से श्रद्धालुओं के आने के कारण कपिल मुनि रोड व रेलवे रोड पर दोपहर तक पूरी तरह भीड़ का जाम बना हुआ था।
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कार्तिक पूर्णिमा का नाम त्रिपुरी पूर्णिमा भी
गांव बडसीकरी के महाकाली तीर्थधाम में कार्तिक पूर्णिमा पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। तीर्थधाम की महंत उमागिरी व पशुपति गिरी ने बताया कि इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इसी दिन भगवान का मत्स्यावतार भी हुआ था।
इस दिन गंगा स्नान, दीप दान आदि का महत्व है। यदि किसी कारण से गंगा स्नान को न जाया जा सके तो नगर के मंदिर में बने सरोवर में स्नान करने से भी वही पुण्य प्राप्त हो जाता है। साध्वी उमागिरी ने बताया कि इस दिन यदि कृत्तिका नक्षत्र हो तो महा कार्तिकी होती है, भरणी नक्षत्र में आने से विशेष फलदायी होती है।
रोहिणी नक्षत्र में आने पर इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश त्रिदेवों ने इसे महा पुनीत पर्व कहा है। उन्होंने बताया कि इस दिन चंद्रोदय पर शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूइया और क्षमा कार्तिकाओं का पूजन वंदना करने से संभूत पुण्य फल मिलता है।