पॉलिसी शिक्षा विभाग की, नुकसान विद्यार्थियों को

कैथल Updated Wed, 22 Jan 2014 12:07 AM IST
Department of Education policy, harm students
शिक्षा विभाग की पॉलिसी प्रदेश के शहर के स्कूलों के विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। शहर के स्कूलों में अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को काफी नुकसान हो रहा है। शिक्षा विभाग की पॉलिसी के अनुसार नए भर्ती होने वाले प्राध्यापकों को ज्वाइनिंग के बाद पांच साल तक ग्रामीण क्षेत्र में ही ड्यूटी देनी पड़ती है।

इस पॉलिसी का सबसे अधिक नुकसान नॉन मेडिकल, कॉमर्स व मेडिकल के विद्यार्थियों को हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में साइंस और कॉमर्स के विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है जबकि शहर के स्कूलों में कॉमर्स, मेडिकल व नॉन मेडिकल के विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र में केमिस्ट्री, फिजिक्स, गणित, बायोलॉजी, कामर्स के प्राध्यापकों की संख्या काफी अधिक है। शहर के स्कूलों के मुखिया प्राध्यापकों की कमी के बारे में जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित रूप से समस्या के बारे में अवगत करवा चुके हैं।

इन स्कूलों में हैं परेशानियां
शहर में स्थित राजकीय कन्या स्कूल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व राजकीय जखौली अड्डा स्कूल में अध्यापकों की कमी है। इन तीन स्कूलों में जिले के करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में फिजिक्स, गणित, केमिस्ट्री, कॉमर्स के अध्यापकों की कमी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चार प्राध्यापक केमिस्ट्री, दो गणित, दो राजनीतिक विज्ञान, एक विज्ञान, एक अर्थशास्त्र के प्राध्यापकों की कमी है। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा पर गणित, संस्कृति, कॉमर्स, हिंदी, एसएसटी, डीपी अध्यापकों की कमी है।

कक्षाओं में खाली बैठना पड़ता
स्कूलों में अध्यापकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को कक्षाओं में बिना पढ़ाई के बैठना पड़ता है। छात्रा मोनिका, ममता, वैशाली शर्मा, सोनिया, काजल, तान्या, मनीषा, प्रीति ने बताया कि स्कूलों में कई विषयों के अध्यापक नहीं हैं जिसके कारण वे पूरा दिन कक्षाओं में बैठकर वापस घर लौट जाती हैं। अध्यापक न होने कारण कई बार विद्यालय के प्रधानाचार्य से भी मिले हैं।

ट्यूशन पढ़ाने वालों की कमाई
स्कूलों में प्राध्यापकों की कमी का फायदा ट्यूशन की दुकानें चला रहे प्राध्यापकों को रहा है। जो बच्चे आर्थिक रूप से सक्षम हैं, वे तो ट्यूशन पढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में अधिकतर गरीब तबके से विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जो न तो ट्यूशन लगा सकते हैं और न ही उन्हें पढ़ाने के लिए स्कूलों में प्राध्यापक हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारी मजबूर
इस संदर्भ में खंड शिक्षा अधिकारी शमशेर सिरोही ने बताया कि अभी हॉल में ही करीब 160 प्राध्यापकों नियुक्ति हुई है। नियुक्त हुए प्राध्यापकों को सरकार की पॉलिसी के अनुसार शहर के स्कूलों में पांच साल तक नहीं भेज सकते हैं। अगर सरकार अपनी पॉलिसी में कुछ राहत देती है तो शहर के स्कूलों में प्राध्यापकों को नियुक्त किया जा सकता है।

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