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गरीबों का दस लाख क्लेम अटका
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Mon, 30 Jun 2014 12:25 AM IST
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श्रम विभाग में प्रदेश सरकार की योजना के तहत जिले के करीब 125 लोगों को
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आर्थिक रूप से सहायता देने की प्रक्रिया में ब्रेक लग गए हैं। आठ माह
गुजरने के बाद भी लोगों के क्लेम के करीब दस लाख रुपये नहीं मिले हैं।
आश्रित लोग अफसरों के चक्कर काटकर परेशान हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी यह
नहीं पता चला कि उन्हें क्लेम कब तक मिल सकता है।
जिले के श्रम विभाग में हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत सदस्य बनाए जा रहे हैं और सदस्यता ग्रहण करने की फीस 85 रुपये हैं। इस बोर्ड के तहत दस हजार मजदूर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। सदस्य बनने पर सरकार की योजना है कि कामगार की स्वाभाविक मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को 75 हजार रुपये और कार्यकाल के दौरान मृत्यु होने पर एक लाख 25 हजार रुपये, लड़की की शादी पर 51 हजार रुपये, प्रसूति में माताओं को 30 हजार रुपये सहित अनेक आपत्ति आने पर आर्थिक सहायता मिलती है।
इन्हीं योजनाओं का लाभ लेने के लिए आश्रितों ने क्लेम किया है। आठ महीने बाद भी लोगों को क्लेम नहीं मिलने पर सरकार को कोस रहे हैं। करीब 125 आश्रितों का दस लाख रुपये बनते हैं। आश्रितों का कहना है कि बेटी की शादी हुए सात महीने गुजर गए हैं। आज तक पैसे नहीं मिले हैं। गरीब लोग हैं। ब्याज पर पैसा लेकर बेटी की शादी की। सरकार की योजना का पता चला था, लेकिन इतने दिनों से पैसे नहीं मिलने से लग रहा है कि सरकार सिर्फ कागजी प्रक्रिया में ही उलझी रहती है। पीड़ितों का कहना है कि पानीपत और चंडीगढ़ के अफसर कागजी प्रक्रिया में लापरवाही बरतते हैं और गरीब लोगों के दुख दर्द को नहीं समझते।
इनको नहीं मिला सहयोग
मृत्यु क्लेम के लिए गांव कुटेल की सुमन, सालवन की कमलेश, भादसो के मांगेराम, युनीसपुर की कृष्णा व लड़की की शादी के लिए गांव उचाना की मूर्ति, सुरेशो, बड़ा गांव की बाली, फफड़ाना के रामनिवास, बठेड़ा के महेंद्र, अबदुलपुर के रमेश सहित 125 लोगों की फाइल दबी है।
ब्याज के डकार रहे लाखों
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष जंग बहादुर यादव कहते हैं कि मजदूरों को क्लेम रोकने से अफसरों को आमदनी है। क्लेम का पैसा क्लीयर करवाकर अपने खाते में पैसा रखते हैं और ब्याज का लाभ उठाते हैं। गरीब लोगों को टाइम पर क्लेम नहीं मिलने से ब्याज के पैसे का उपयोग करते हैं। सरकार सिर्फ योजना दिखाकर ही लोगों को गुमराह कर रही है। साल बीतने के बाद कन्यादान जैसी राशि देते हैं।
जिले के श्रम विभाग में हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत सदस्य बनाए जा रहे हैं और सदस्यता ग्रहण करने की फीस 85 रुपये हैं। इस बोर्ड के तहत दस हजार मजदूर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। सदस्य बनने पर सरकार की योजना है कि कामगार की स्वाभाविक मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को 75 हजार रुपये और कार्यकाल के दौरान मृत्यु होने पर एक लाख 25 हजार रुपये, लड़की की शादी पर 51 हजार रुपये, प्रसूति में माताओं को 30 हजार रुपये सहित अनेक आपत्ति आने पर आर्थिक सहायता मिलती है।
इन्हीं योजनाओं का लाभ लेने के लिए आश्रितों ने क्लेम किया है। आठ महीने बाद भी लोगों को क्लेम नहीं मिलने पर सरकार को कोस रहे हैं। करीब 125 आश्रितों का दस लाख रुपये बनते हैं। आश्रितों का कहना है कि बेटी की शादी हुए सात महीने गुजर गए हैं। आज तक पैसे नहीं मिले हैं। गरीब लोग हैं। ब्याज पर पैसा लेकर बेटी की शादी की। सरकार की योजना का पता चला था, लेकिन इतने दिनों से पैसे नहीं मिलने से लग रहा है कि सरकार सिर्फ कागजी प्रक्रिया में ही उलझी रहती है। पीड़ितों का कहना है कि पानीपत और चंडीगढ़ के अफसर कागजी प्रक्रिया में लापरवाही बरतते हैं और गरीब लोगों के दुख दर्द को नहीं समझते।
इनको नहीं मिला सहयोग
मृत्यु क्लेम के लिए गांव कुटेल की सुमन, सालवन की कमलेश, भादसो के मांगेराम, युनीसपुर की कृष्णा व लड़की की शादी के लिए गांव उचाना की मूर्ति, सुरेशो, बड़ा गांव की बाली, फफड़ाना के रामनिवास, बठेड़ा के महेंद्र, अबदुलपुर के रमेश सहित 125 लोगों की फाइल दबी है।
ब्याज के डकार रहे लाखों
भारतीय मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष जंग बहादुर यादव कहते हैं कि मजदूरों को क्लेम रोकने से अफसरों को आमदनी है। क्लेम का पैसा क्लीयर करवाकर अपने खाते में पैसा रखते हैं और ब्याज का लाभ उठाते हैं। गरीब लोगों को टाइम पर क्लेम नहीं मिलने से ब्याज के पैसे का उपयोग करते हैं। सरकार सिर्फ योजना दिखाकर ही लोगों को गुमराह कर रही है। साल बीतने के बाद कन्यादान जैसी राशि देते हैं।