{"_id":"6ad90479977a8d004e0da324","slug":"claim-for-stolen-car-rejected-rs-239-lakh-must-be-paid-along-with-interest-karnal-news-c-18-knl1018-1017394-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: चोरी हुई कार का दावा खारिज किया, ब्याज के साथ देने होंगे 2.39 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: चोरी हुई कार का दावा खारिज किया, ब्याज के साथ देने होंगे 2.39 लाख
विज्ञापन
करनाल। पुरानी कार चोरी होने के बाद बीमा क्लेम खारिज करना न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी को कार की बीमित घोषित कीमत 2,39,105 रुपये नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 25 हजार रुपये मुआवजा और 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करने की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। करीब दो साल सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सरवजीत कौर की पीठ ने निर्णय सुनाया। फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता सेक्टर-6 निवासी चंद्रशेखर ने आयोग में दायर शिकायत में बताया था कि उन्होंने मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी, जिसका बीमा 26 मार्च 2024 तक वैध था। कार 17-18 दिसंबर 2023 की रात सेक्टर-6 स्थित उनके निवास से चोरी हो गई।
18 दिसंबर को पुलिस ने शिकायत पर एफआईआर दर्ज की लेकिन कार का पता नहीं चला और बाद में अनट्रेस रिपोर्ट दे दी गई। उन्होंने बीमा कंपनी को भी सूचना देकर क्लेम मांगा लेकिन कंपनी ने 10 मई 2024 को दावा खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि कार के दस्तावेज पुराने मालिक के नाम थे और बीमा पॉलिसी भी शिकायतकर्ता के नाम स्थानांतरित नहीं हुई थी।
विज्ञापन
स्वामित्व हस्तांतरण के आवेदन को आयोग ने माना अहम
आयोग के सामने कंपनी ने दावा किया कि कार जुलाई 2023 में बेची गई थी और चोरी के समय न तो पुराने मालिक और न ही शिकायतकर्ता का बीमा हित बनता था। वहीं शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने कार के स्वामित्व हस्तांतरण के लिए छह दिसंबर 2023 को आवेदन किया था और निर्धारित शुल्क भी जमा कराया था।
आयोग ने पाया कि कंपनी शिकायतकर्ता के जुलाई में कार खरीदने के दावे को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं कर सकी। रिकॉर्ड के अनुसार, स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन के 12 दिन बाद कार चोरी हुई थी। आयोग ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए क्लेम खारिज करने के आधार को अनुचित माना। शिकायतकर्ता को चोरी हुई कार के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) को रद कराने संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए भी कहा गया है।
विज्ञापन
आयोग ने बीमा कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करने की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। करीब दो साल सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह, सदस्य नीरू अग्रवाल और सरवजीत कौर की पीठ ने निर्णय सुनाया। फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता सेक्टर-6 निवासी चंद्रशेखर ने आयोग में दायर शिकायत में बताया था कि उन्होंने मारुति सुजुकी स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी, जिसका बीमा 26 मार्च 2024 तक वैध था। कार 17-18 दिसंबर 2023 की रात सेक्टर-6 स्थित उनके निवास से चोरी हो गई।
विज्ञापन
18 दिसंबर को पुलिस ने शिकायत पर एफआईआर दर्ज की लेकिन कार का पता नहीं चला और बाद में अनट्रेस रिपोर्ट दे दी गई। उन्होंने बीमा कंपनी को भी सूचना देकर क्लेम मांगा लेकिन कंपनी ने 10 मई 2024 को दावा खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि कार के दस्तावेज पुराने मालिक के नाम थे और बीमा पॉलिसी भी शिकायतकर्ता के नाम स्थानांतरित नहीं हुई थी।
विज्ञापन
स्वामित्व हस्तांतरण के आवेदन को आयोग ने माना अहम
आयोग के सामने कंपनी ने दावा किया कि कार जुलाई 2023 में बेची गई थी और चोरी के समय न तो पुराने मालिक और न ही शिकायतकर्ता का बीमा हित बनता था। वहीं शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने कार के स्वामित्व हस्तांतरण के लिए छह दिसंबर 2023 को आवेदन किया था और निर्धारित शुल्क भी जमा कराया था।
आयोग ने पाया कि कंपनी शिकायतकर्ता के जुलाई में कार खरीदने के दावे को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं कर सकी। रिकॉर्ड के अनुसार, स्वामित्व हस्तांतरण के लिए आवेदन के 12 दिन बाद कार चोरी हुई थी। आयोग ने संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए क्लेम खारिज करने के आधार को अनुचित माना। शिकायतकर्ता को चोरी हुई कार के पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) को रद कराने संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए भी कहा गया है।