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17 माह बाद दोस्तों से मिलने पर बच्चों ने की मस्ती
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। लगभग 17 माह बाद चौथी और पांचवीं के विद्यार्थी बुधवार को स्कूल पहुंचे। कोरोना गाइडलाइन की सख्ती से पालना के आदेशों के साथ स्कूल खोले गए। पहले दिन कई जगह विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच से लेकर मास्क लगाने तक के नियम टूटे। वहीं कई स्कूलों में छुट्टी के बाद विद्यार्थी मस्ती करते दिखाई दिए। लंबे समय के बाद स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए।
बुधवार सुबह से बारिश शुरू हो गई थी। ऐसे में ज्यादा विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पाए। सरकारी स्कूलों में 20 और निजी स्कूलों में 28 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। जबकि 48 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई थी। जिले के 778 सरकारी, 120 सीबीएसई और 250 निजी स्कूलों में इन दोनों कक्षाओं के करीब 40 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले सरकार की ओर से 16 जुलाई से नौवीं से 12वीं व 23 जुलाई से छठी से आठवीं की कक्षाएं शुरू की गई थी।
बस सुविधा के कारण आए ज्यादा विद्यार्थी
निजी स्कूलों की ओर से बस सुविधा भी शुरू कर दी गई है। ऐसे में पहले दिन घर द्वार पर बस आने से निजी स्कूलों के काफी विद्यार्थी बरसात के बावजूद भी स्कूलों में पहुंचे। जबकि सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों को ज्यादातर अभिभावक खुद छोड़ने आते हैं। ऐसे में बरसात के कारण पहले ही दिन उन्हें स्कूल पहुंचने का मौका नहीं मिला। सुबह स्कूल खुलने के समय 8 बजे से लेकर दोपहर करीब 12 बजे तक बूंदाबांदी रही।
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ये रहेंगे नियम
- कक्षा में बैठने की क्षमता अनुसार ही चौथी-पांचवीं के बच्चों को स्कूल बुलाया जाए।
- स्कूल में बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिलेगा, पानी की बोतल भी साथ लाएंगे।
- प्रवेश द्वार पर ही बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी, ऑक्सीमीटर से प्लस रेट भी मापी जाएगी।
- तीस से अधिक बच्चों वाली कक्षा में 50 प्रतिशत बच्चों को ही एक दिन स्कूल में बुलाया जाए।
- कक्षा में प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग होंगे, एक डेस्क पर एक ही बच्चा बैठेगा।
बच्चों को स्कूल भेजने का कोई दबाव नहीं होगा। स्कूल सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे। अन्यथा किसी भी तरह की लापरवाही दिखने पर कार्रवाई होगी। पहले दिन 20 प्रतिशत तक उपस्थिति दर्ज की गई। उपस्थिति दर आगे बढ़ने की उम्मीद है।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
स्कूलों की ओर से बस सुविधा भी दी जा रही है। पहले दिन निजी स्कूलों में उपस्थिति 28 प्रतिशत तक रही। विद्यार्थियों में उत्साह है।
- डा. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स
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करनाल। लगभग 17 माह बाद चौथी और पांचवीं के विद्यार्थी बुधवार को स्कूल पहुंचे। कोरोना गाइडलाइन की सख्ती से पालना के आदेशों के साथ स्कूल खोले गए। पहले दिन कई जगह विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच से लेकर मास्क लगाने तक के नियम टूटे। वहीं कई स्कूलों में छुट्टी के बाद विद्यार्थी मस्ती करते दिखाई दिए। लंबे समय के बाद स्कूल पहुंचे विद्यार्थियों के चेहरे खिले नजर आए।
बुधवार सुबह से बारिश शुरू हो गई थी। ऐसे में ज्यादा विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पाए। सरकारी स्कूलों में 20 और निजी स्कूलों में 28 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल पहुंचे। जबकि 48 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई थी। जिले के 778 सरकारी, 120 सीबीएसई और 250 निजी स्कूलों में इन दोनों कक्षाओं के करीब 40 हजार विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले सरकार की ओर से 16 जुलाई से नौवीं से 12वीं व 23 जुलाई से छठी से आठवीं की कक्षाएं शुरू की गई थी।
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बस सुविधा के कारण आए ज्यादा विद्यार्थी
निजी स्कूलों की ओर से बस सुविधा भी शुरू कर दी गई है। ऐसे में पहले दिन घर द्वार पर बस आने से निजी स्कूलों के काफी विद्यार्थी बरसात के बावजूद भी स्कूलों में पहुंचे। जबकि सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों को ज्यादातर अभिभावक खुद छोड़ने आते हैं। ऐसे में बरसात के कारण पहले ही दिन उन्हें स्कूल पहुंचने का मौका नहीं मिला। सुबह स्कूल खुलने के समय 8 बजे से लेकर दोपहर करीब 12 बजे तक बूंदाबांदी रही।
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ये रहेंगे नियम
- कक्षा में बैठने की क्षमता अनुसार ही चौथी-पांचवीं के बच्चों को स्कूल बुलाया जाए।
- स्कूल में बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिलेगा, पानी की बोतल भी साथ लाएंगे।
- प्रवेश द्वार पर ही बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग होगी, ऑक्सीमीटर से प्लस रेट भी मापी जाएगी।
- तीस से अधिक बच्चों वाली कक्षा में 50 प्रतिशत बच्चों को ही एक दिन स्कूल में बुलाया जाए।
- कक्षा में प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग होंगे, एक डेस्क पर एक ही बच्चा बैठेगा।
बच्चों को स्कूल भेजने का कोई दबाव नहीं होगा। स्कूल सरकारी निर्देशों का पालन करेंगे। अन्यथा किसी भी तरह की लापरवाही दिखने पर कार्रवाई होगी। पहले दिन 20 प्रतिशत तक उपस्थिति दर्ज की गई। उपस्थिति दर आगे बढ़ने की उम्मीद है।
- रोहताश वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
स्कूलों की ओर से बस सुविधा भी दी जा रही है। पहले दिन निजी स्कूलों में उपस्थिति 28 प्रतिशत तक रही। विद्यार्थियों में उत्साह है।
- डा. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स