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भरतपुर की अब अपनी पंचायत, महिला को मिलेगी चौधर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Oct 2022 02:21 AM IST
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Bharatpur now has its own Panchayat, woman will get Chaudhar
संवाद न्यूज एजेंसी
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घरौंडा। लंबे संघर्ष के बाद गांव भरतपुर की अलग पंचायत बनी है। पहली बार गांव में महिला सरपंच बनेगी। यह सरपंच पद अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित है। गांव में सात पंच निर्वाचित होंगे। ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर ग्रामीण उत्साहित हैं, क्योंकि पहली बार उन्हें अपने गांव के बूथों पर ही सरपंच व पंच पद के लिए मतदान करने का अवसर मिलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यहां के लोग राजनीति के प्रति काफी जागरूक हैं, उन्होंने गत विधानसभा चुनाव में 96 प्रतिशत मतदान किया था। ग्रामीणों ने बताया कि विकास कार्यों में भी उनके साथ भेदभाव होता रहा है। अलग पंचायत का दर्जा मिलने से गांव में विकास कार्य होने की उम्मीद है।
गांव भरतपुर में लगभग पांच सौ वोट हैं और 816 की आबादी है। यह गांव पहले ताहरपुर पंचायत के अंतर्गत था। ग्रामीणों ने अलग पंचायत बनवाने के लिए काफी संघर्ष किया और लगभग दो साल पूर्व भरतपुर को अलग पंचायत का दर्जा मिला था।
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विकास कार्य पूरे होने की उम्मीद
ग्रामीण शक्ति सिंह का कहना है कि उनका गांव दूसरी पंचायत के अधीन आता था। जिससे गांव में पूरी तरह से विकास कार्य नहीं हो पाते थे। आज भी उनके गांव में कई गलियां कच्ची हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि गांव में पूर्ण रूप से विकास होगा।
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सामुदायिक केंद्र की जरूरत
राजीव राणा का कहना है कि गांव में बैंक्वेट हाल नहीं है। उन्हें सामूहिक कार्यक्रम कराने में भारी दिक्कत होती है। गांव में सामुदायिक केंद्र या हॉल का होना जरूरी है। साथ ही जो भी सरपंच बने वह गांव को मॉडल का रूप देने का प्रयास करे, क्योंकि जिस उम्मीद से ग्रामीणों ने गांव को अलग पंचायत का दर्जा दिलाया वह सपना पूरा होना चाहिए।
युवा वर्ग उत्साहित
धीरेन्द्र पुंडीर का कहना है कि गांव की अलग पंचायत बनने से युवा वर्ग काफी उत्साहित है। उन्होंने बताया है कि अब हम गांव में ही वोट डालेंगे और गांव का ही सरपंच बनाएंगे। जिससे हमारे गांव में विकास कार्य होने की उम्मीद है।

गुटबाजी समाप्त करने का प्रयास
रमन राणा ने बताया कि उनका गांव महिला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। ग्रामीणों का प्रयास है कि वे गांव में सर्वसम्मति से सरपंच बनाएं और उसके लिए ग्रामीण पूरा प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रयास हर गांव में होने चाहिए ताकि गांव में गुटबाजी समाप्त हो ओर भाईचारे के साथ-साथ विकास कार्य भी हों।
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