{"_id":"576ecbf94f1c1b5d48b489c3","slug":"and-karnal-will-fly-drugs-karmal","type":"story","status":"publish","title_hn":"हालात यही रहे तो करनाल भी उड़ता नजर आएगा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हालात यही रहे तो करनाल भी उड़ता नजर आएगा
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Sat, 25 Jun 2016 11:53 PM IST
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दानवीर कर्ण नगरी के हालात यही रहे तो वो दिन दूर नहीं इस शहर को उड़ता पंजाब की तर्ज पर उड़ता करनाल के नाम से जाना जाएगा। इसका पीछे तर्क है जिले में नशे का जबरदस्त कारोबार। पिछले 25 सालों में करनाल में नशे की खपत कई गुणा बढ़ी है। पहले जहां यहां पर भुक्की का प्रचलन था, वहीं अब यहां अफीम, स्मैक, चरस, गांजा और हेरोइन से लेकर विभिन्न प्रकार के ड्रग्स ने लिया लिया है। खास युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है। पुलिस थानों के आंकड़े भी इस बात की गवाही दे रहे हैं कि जिले में लगातार नशे का कारोबार पनप रहा है। रोजाना जिले में चार से पांच केस नशे के दर्ज होते हैं। वहीं, सूत्र बताते हैं कि करनाल जिले में हर माह नशे का कारोबार करोड़ों रुपये का है। गुप्त ठिकानों से इस धंधे को माफिया के लोग अंजाम दे रहे हैं।
लगातार बढ़ रहे नशे को लेकर करनाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं आखिर बड़े कारोबारी उनकी पकड़ में क्यों नहीं आ रहे हैं? हालांकि, सीआईए पिछले तीन माह में दर्जन मामलों में नशा तस्करों को काबू कर चुकी है। अनुमान है कि करनाल जिले में प्रति माह करोड़ों रुपये का विभिन्न प्रकार के नशे का कारोबार है। इसके अलावा, दूसरी ओर गौर करें तो नशे के आदि लोगों की बीमारियों पर पैसा खर्च हो रहा है वो अलग है। अगर पुलिस ने नशे के खिलाफ मुहिम तेज नहीं की और लोगों ने नशे के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो हो सकता है कि करनाल भी पंजाब की तरह ही उड़ता नजर आए। इस बारे में एसपी पंकज नैन कहते हैं नशे के खिलाफ पुलिस गंभीर है और लगातार सूचना एसे लोगों को काबू किया जा रहा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र असंध और निसिंग
जिले की बात करें तो सबसे ज्यादा नशा प्रभावित क्षेत्र असंध और निसिंग हैं। यहां पर जमकर भुक्की, चरस, और अफीम का कारोबार चल रहा है। रात में तस्कर यहां पर नशे की खेप पहुंचाते हैं। नशे के बदले तस्कर मोटी रकम हासिल करते हैं। इसके बाद पुड़िया या फिर टुकड़ों में नशे को बांटा जाता है। सूत्र बताते हैं कि राजस्थान और मध्यप्रदेश से नशे की खेप आती हैं, वहां से सस्ते दामों पर लाकर यहां कई गुणा दामों पर इसे बेचा जाता है। बताया जाता है कि राजस्थान से 45 हजार रुपये किलो अफीम लेकर यहां पर दो से तीन लाख रुपये किलोग्राम तक बेची जाती है। असंध थाने के आंकड़े बताते हैं कि यहां रोजाना दो से तीन मामले नशे से संबंधित होते हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि पुलिस की मेहरबानियों के चलते अकेले असंध और निसिंग में रोजाना नशे की बड़ी खेप खपाई जाती हैं। इसकी दूसरी भयावह तस्वीर यह भी है कि असंध में हैपेटाइटिस और एड्स के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। उधर, करनाल शहर के साथ-साथ अन्य कस्बों घरौंडा, इंद्री, तरावड़ी व नीलोखेड़ी में में भी नशा बेचा जा रहा है।
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चावल के कट्टों के साथ चूरापोस्त
तस्करों ने तस्करी के लिए अलग-अलग तरीके निकाल लिए हैं। 30 मई को सीआईए पुलिस ने एक चावल से भरे ट्रक से भारी मात्रा में चूरापोस्त और अफीम पकड़ी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि निसिंग के एक डेरा निवासी गब्बर सिंह नशे का काम करता है और इसके साथ ही बलविंद्र सिंह वासी डेरा अमुपुर भी उसके साथ मिलकर अफीम की सप्लाई करता है। पुलिस ने नाकेबंदी करके एक ट्रक को पकड़ा और उसकी जांच की तो चावलों से भरे ट्रक में 250 किलोग्राम चूरापोस्त मिला और 11 किलोग्राम अफीम मिली थी। पुलिस ने चालक मनप्रीत सिंह को भी काबू किया था। अन्य तस्कर भी कुछ इसी प्रकार के तरीके अपनाकर दूसरे प्रदेशों से नशे की खेप करनाल में पहुंचवा रहे हैं।
स्लोचन, फ्लूड से कर रहे नशा
नाबालिग व स्कूली छात्रों में पंक्चर लगाने के काम आने वाली स्लोचन व फ्लूड से नशा करने का प्रचलन है। हालांकि, सरकार द्वारा फ्लूड पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन बावजूद इसके इसका जमकर प्रयोग हो रहा है। स्लोचन को कपड़े पर लगाकर उसे आग लगाई जाती है और बाद में उसे सूंघा जाता है, जिससे नशा होता है। इसके अलावा, युवा सिरिंज नशे का भी प्रयोग करते हैं। प्रतिबंधित होने के बावजूद जिले में कई मेडिकल स्टोरों पर नशीले इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। इससे युवा एड्स का भी शिकार हो रहे हैं।
बढ़ रहे नशा मुक्ति केंद्र
नशे का दूसरा असर यह है कि जिले में नशा मुक्ति केंद्र भी बढ़ रहे हैं। नशे में जकड़े युवाओं को यहां पर रखने के लिए भी प्रति माह परिजनों से मोटी रकम ली जाती है। बता दें कि पिछले माह स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घरौंडा में अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा था और यहां से दर्जनों युवाओं को मुक्त कराया था, बाद में उन्हें कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल कराया था। इसके अलावा भी करनाल व आसपास के जिलों में नशा मुक्ति केंद्र खुल रहे हैं।
वर्जन
करनाल में पहले के मुकाबले नशा बढ़ा है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि नशे के खिलाफ आवाज उठाएं और ऐसा कारोबार करने वालों के सबूत सीधे मुझे भेंजे, ताकि इनको रोका जाए। हर आम व खास व्यक्ति को नशे के खिलाफ आवाज उठानी होगी, तभी पुलिल कुछ कर पाएगी। पहले करनाल में केवल भुक्की बेचने के मामले सामने आते थे, लेकिन अब ड्रग्स के मामले भी बढ़ रहे हैं, जो गंभीर है। इसलिए हर व्यक्ति को नशे के खिलाफ आगे आना होगा, तभी नशे पर लगाम लगाई जा सकेगी।
-डा. केपी सिंह, डीजीपी।
वर्जन
नशा स्वास्थ्य के लिए जहर है। यह शरीर में रोगों से लडने वाली प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है और सीधा असर लीवर पर करता है। मानसिक रूप से सोचने की शक्ति को भी समाप्त करता है। यह एक तरह से खुद मौत को गले लगाने की बात है। स्वास्थ्य विभाग नशे को लेकर गंभीर है और लगातार मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की जा रही है, ताकि कोई गलत दवा व इंजेक्शन न बेच सके।
-डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ।
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लगातार बढ़ रहे नशे को लेकर करनाल पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं आखिर बड़े कारोबारी उनकी पकड़ में क्यों नहीं आ रहे हैं? हालांकि, सीआईए पिछले तीन माह में दर्जन मामलों में नशा तस्करों को काबू कर चुकी है। अनुमान है कि करनाल जिले में प्रति माह करोड़ों रुपये का विभिन्न प्रकार के नशे का कारोबार है। इसके अलावा, दूसरी ओर गौर करें तो नशे के आदि लोगों की बीमारियों पर पैसा खर्च हो रहा है वो अलग है। अगर पुलिस ने नशे के खिलाफ मुहिम तेज नहीं की और लोगों ने नशे के खिलाफ आवाज नहीं उठाई तो हो सकता है कि करनाल भी पंजाब की तरह ही उड़ता नजर आए। इस बारे में एसपी पंकज नैन कहते हैं नशे के खिलाफ पुलिस गंभीर है और लगातार सूचना एसे लोगों को काबू किया जा रहा है।
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सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र असंध और निसिंग
जिले की बात करें तो सबसे ज्यादा नशा प्रभावित क्षेत्र असंध और निसिंग हैं। यहां पर जमकर भुक्की, चरस, और अफीम का कारोबार चल रहा है। रात में तस्कर यहां पर नशे की खेप पहुंचाते हैं। नशे के बदले तस्कर मोटी रकम हासिल करते हैं। इसके बाद पुड़िया या फिर टुकड़ों में नशे को बांटा जाता है। सूत्र बताते हैं कि राजस्थान और मध्यप्रदेश से नशे की खेप आती हैं, वहां से सस्ते दामों पर लाकर यहां कई गुणा दामों पर इसे बेचा जाता है। बताया जाता है कि राजस्थान से 45 हजार रुपये किलो अफीम लेकर यहां पर दो से तीन लाख रुपये किलोग्राम तक बेची जाती है। असंध थाने के आंकड़े बताते हैं कि यहां रोजाना दो से तीन मामले नशे से संबंधित होते हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि पुलिस की मेहरबानियों के चलते अकेले असंध और निसिंग में रोजाना नशे की बड़ी खेप खपाई जाती हैं। इसकी दूसरी भयावह तस्वीर यह भी है कि असंध में हैपेटाइटिस और एड्स के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। उधर, करनाल शहर के साथ-साथ अन्य कस्बों घरौंडा, इंद्री, तरावड़ी व नीलोखेड़ी में में भी नशा बेचा जा रहा है।
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चावल के कट्टों के साथ चूरापोस्त
तस्करों ने तस्करी के लिए अलग-अलग तरीके निकाल लिए हैं। 30 मई को सीआईए पुलिस ने एक चावल से भरे ट्रक से भारी मात्रा में चूरापोस्त और अफीम पकड़ी थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि निसिंग के एक डेरा निवासी गब्बर सिंह नशे का काम करता है और इसके साथ ही बलविंद्र सिंह वासी डेरा अमुपुर भी उसके साथ मिलकर अफीम की सप्लाई करता है। पुलिस ने नाकेबंदी करके एक ट्रक को पकड़ा और उसकी जांच की तो चावलों से भरे ट्रक में 250 किलोग्राम चूरापोस्त मिला और 11 किलोग्राम अफीम मिली थी। पुलिस ने चालक मनप्रीत सिंह को भी काबू किया था। अन्य तस्कर भी कुछ इसी प्रकार के तरीके अपनाकर दूसरे प्रदेशों से नशे की खेप करनाल में पहुंचवा रहे हैं।
स्लोचन, फ्लूड से कर रहे नशा
नाबालिग व स्कूली छात्रों में पंक्चर लगाने के काम आने वाली स्लोचन व फ्लूड से नशा करने का प्रचलन है। हालांकि, सरकार द्वारा फ्लूड पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, लेकिन बावजूद इसके इसका जमकर प्रयोग हो रहा है। स्लोचन को कपड़े पर लगाकर उसे आग लगाई जाती है और बाद में उसे सूंघा जाता है, जिससे नशा होता है। इसके अलावा, युवा सिरिंज नशे का भी प्रयोग करते हैं। प्रतिबंधित होने के बावजूद जिले में कई मेडिकल स्टोरों पर नशीले इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। इससे युवा एड्स का भी शिकार हो रहे हैं।
बढ़ रहे नशा मुक्ति केंद्र
नशे का दूसरा असर यह है कि जिले में नशा मुक्ति केंद्र भी बढ़ रहे हैं। नशे में जकड़े युवाओं को यहां पर रखने के लिए भी प्रति माह परिजनों से मोटी रकम ली जाती है। बता दें कि पिछले माह स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घरौंडा में अवैध रूप से चल रहे नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा था और यहां से दर्जनों युवाओं को मुक्त कराया था, बाद में उन्हें कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल कराया था। इसके अलावा भी करनाल व आसपास के जिलों में नशा मुक्ति केंद्र खुल रहे हैं।
वर्जन
करनाल में पहले के मुकाबले नशा बढ़ा है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि नशे के खिलाफ आवाज उठाएं और ऐसा कारोबार करने वालों के सबूत सीधे मुझे भेंजे, ताकि इनको रोका जाए। हर आम व खास व्यक्ति को नशे के खिलाफ आवाज उठानी होगी, तभी पुलिल कुछ कर पाएगी। पहले करनाल में केवल भुक्की बेचने के मामले सामने आते थे, लेकिन अब ड्रग्स के मामले भी बढ़ रहे हैं, जो गंभीर है। इसलिए हर व्यक्ति को नशे के खिलाफ आगे आना होगा, तभी नशे पर लगाम लगाई जा सकेगी।
-डा. केपी सिंह, डीजीपी।
वर्जन
नशा स्वास्थ्य के लिए जहर है। यह शरीर में रोगों से लडने वाली प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है और सीधा असर लीवर पर करता है। मानसिक रूप से सोचने की शक्ति को भी समाप्त करता है। यह एक तरह से खुद मौत को गले लगाने की बात है। स्वास्थ्य विभाग नशे को लेकर गंभीर है और लगातार मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की जा रही है, ताकि कोई गलत दवा व इंजेक्शन न बेच सके।
-डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ।