स्कूलों ने एडमिशन फीस की रिकवरी के लिए बढ़ाए डेवेलपमेंट चार्ज
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हाईकोर्ट और शिक्षा निदेशालय के आदेशों के बाद भी निजी स्कूल मनमर्जी से बाज नहीं आ रहे। निजी स्कूलों ने एडमिशन फीस की रिकवरी के लिए नया तरीका ईजाद किया है। एडमिशन फीस की रिकवरी के लिए ट्यूशन और डेवेलपमेंट फीस बढ़ा दी है। यदि स्कू लों के पिछले वर्ष की एडमिशन फीस व इस वर्ष की ट्यूशन फीस का टोटल देखें तो इसमें कोई ज्यादा अंतर नहीं है। इसके अलावा स्कूलों ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी एनसीईआरटी की पाठ्यक्रम को लागू नहीं किया है। इस बार भी जिले में करोड़ों रुपये की प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें धड़ल्ले से बिक रही हैं। शिक्षा विभाग को अभी इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिकायत का इंतजार है। जबकि अभिभावक कई बार विभाग के अधिकारियों को किताबों की रसीदें भी दिखा चुके हैं, लेकिन ये सबूत विभाग के लिए नजरिये से नाकाफी हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी स्कूल किसी छात्र से हर कक्षा में एडमिशन की फीस नहीं ले सकता। स्कूलों को केवल पहली, छठी, नौंवी व 11वीं कक्षा में एडमिशन फीस लेने का अधिकार है, लेकिन स्कूलों ने अन्य कक्षाओं के छात्रों से एडमिशन फीस की रिकवरी के लिए उनकी ट्यूशन फीस व डेवेलपमेंट फीस को दोगुना कर दिया है। इससे पिछले वर्ष की एडमिशन फीस व इस बार की ट्यूशन फीस बराबर हो गई है। नियमों के मुताबिक कोई भी स्कूल तब तक फीस में वृद्धि नहीं कर सकता जब तक उसकी बैलेंशशीट में राशि बकाया है। शहर के अधिकतर स्कूलों की बैलेंसशीट में करोड़ों रुपये बकाया होने के बाद भी स्कूलों ने एडमिशन फीस की रिकवरी के लिए अपनी मर्जी से फीस बढ़ा दी है। विभाग द्वारा अभी तक किसी भी स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।
शहर में बिक गई करोड़ाें की किताबें
सेशन की शुरुआत से पहले ही माननीय हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय को सभी स्कूलों मे एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करवाने के निर्देश दिए थे। लेकिन स्कूलाें ने हाईकोर्ट के निर्देशों की भी अवहेलना करते हुए किताबों व वर्दियों पर कमीशन का खेल जारी रखा है। एक अप्रैल से अब तक जिले में करीब तीन करोड़ रुपये की किताबें बिक गई हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिकायतों का इंतजार है।
विभाग की अनदेखी से स्कूल मचा रहे लूट
अभिभावक एकता संघ के जिला प्रधान दिनेश नरुला व नवीन अग्रवाल ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए हैं, तो फिर विभाग उन स्कू लों में ये पाठ्यक्रम लागू क्यों नहीं करवा रहा है? विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से स्कूल मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब विभाग के अधिकारी स्कूलों में छापेमारी करने जाते हैं तो प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें गायब हो जाती हैं, लेकिन जब कक्षाएं शुरू होंगी तो उस समय विभाग की टीम स्कूलों में जाकर बच्चों के बैग में रखी किताबें चेक करे, इससे पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। विभाग के अधिकारी ऐसा करना ही नहीं चाहते। विभागीय अधिकारियों के इस रवैये से ही स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों ने नियमों के विरुद्ध फीस में बढ़ोतरी की है। इसकी शिकायत वे डीसी व डीईईओ को भी कर चुके हैं। इससे साफ हो गया है कि लूट का यह खेल प्रशासन की मिलीभगत से ही चल रहा है।
वर्जन
स्कूलों को केवल नए दाखिले और पहली, छठी, नौंवी व 11वीं कक्षा में एडमिशन फीस लेने का अधिकार है। इसके अलावा स्कूल सुविधाओं के अनुरूप डेवेलपमेंट एंड एक्टिविटी फीस चार्ज कर सकते हैं। लेकिन जिन स्कूलों की बैलेंसशीट में राशि बकाया है, वे फीस बढ़ाने के अधिकारी नहीं है। यदि कोई स्कूल नियमों के विरुद्ध फीस लेता मिला तो उसके खिलाफ सख्त सख्त से कार्रवाई की जाएगी।
- सरोज बाला गुर, जिला मौलिक शिक्षाधिकारी करनाल।