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हादसे में बेटी की मौत, पिता की टांग टूटी
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Mon, 02 Jun 2014 12:17 AM IST
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रंबा चौकी के समीप मोड़ पर कैंटर की टक्कर लगने से बाइक सवार पिता की टांग
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टूट गई और 22 वर्षीय बेटी की मौत हो गई। राहगीरों ने तुरंत दोनों को
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लेकर आए। डॉक्टरों ने लड़की
को मृत घोषित कर दिया और पिता का इलाज चल रहा है।
घटना की सूचना जैसे ही परिजनों को मिली वह रोते बिलखते हुए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पुलिस ने कैंटर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव पाढ़ा निवासी दलबीर और उसकी बेटी कुसुम देवी दोनों रविवार सुबह गांव खुरदन धनोरा (लाडवा) में अपनी विवाहित बेटी का पीलिया (शगुन की मिठाई) देने जा रहे थे।
रंबा चौकी के समीप मोड़ पर एक कैंटर चालक ने जोर से टक्कर मारी। बाइक का संतुलन बिगड़ गया और जोर से सड़क पर जा गिरे। कुसुम देवी के सिर व अन्य जगह गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। दलबीर की टांग टूट गई और शरीर में कई जगह चोट आई है। दुर्घटना की आवाज सुनकर लोग दौड़े आए। हर किसी ने इनका सहयोग करके मानवता का परिचय दिया।
मौजूद लोगों में से किसी ने परिजनों को सूचना दी तो कई लोग इन्हें तुरंत इलाज दिलवाने के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए। लोगों के सहयोग से दलबीर सिंह को इलाज मिल गया, लेकिन कुसुम देवी नहीं बच सकीं। उसकी मौत पर हर किसी की आंखें अस्पताल में नम हो रही थी।
बहन को देना चाहती थी दिलासा
कुसुम देवी अपनी बड़ी बहन गांव खुरदन धनोरा (लाडवा) को दिलासा देने के लिए पिता के साथ पीलिया देने जा रही थी। क्योंकि उसकी बड़ी बहन के लड़का मृत हुआ था। इससे उनका परिवार मायूस था। कुसुम इसलिए अपनी बहन को दिलासा देकर उसका हौसला बढ़ाना चाहती थी। कुसुम फोन पर भी बहन से कई बार बात कर समझाती रहती थी। कुसुम को क्या पता था कि बड़ी बहन इस घटना के बाद और भी ज्यादा टूट जाएगी।
घटना की सूचना जैसे ही परिजनों को मिली वह रोते बिलखते हुए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पुलिस ने कैंटर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गांव पाढ़ा निवासी दलबीर और उसकी बेटी कुसुम देवी दोनों रविवार सुबह गांव खुरदन धनोरा (लाडवा) में अपनी विवाहित बेटी का पीलिया (शगुन की मिठाई) देने जा रहे थे।
रंबा चौकी के समीप मोड़ पर एक कैंटर चालक ने जोर से टक्कर मारी। बाइक का संतुलन बिगड़ गया और जोर से सड़क पर जा गिरे। कुसुम देवी के सिर व अन्य जगह गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। दलबीर की टांग टूट गई और शरीर में कई जगह चोट आई है। दुर्घटना की आवाज सुनकर लोग दौड़े आए। हर किसी ने इनका सहयोग करके मानवता का परिचय दिया।
मौजूद लोगों में से किसी ने परिजनों को सूचना दी तो कई लोग इन्हें तुरंत इलाज दिलवाने के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए। लोगों के सहयोग से दलबीर सिंह को इलाज मिल गया, लेकिन कुसुम देवी नहीं बच सकीं। उसकी मौत पर हर किसी की आंखें अस्पताल में नम हो रही थी।
बहन को देना चाहती थी दिलासा
कुसुम देवी अपनी बड़ी बहन गांव खुरदन धनोरा (लाडवा) को दिलासा देने के लिए पिता के साथ पीलिया देने जा रही थी। क्योंकि उसकी बड़ी बहन के लड़का मृत हुआ था। इससे उनका परिवार मायूस था। कुसुम इसलिए अपनी बहन को दिलासा देकर उसका हौसला बढ़ाना चाहती थी। कुसुम फोन पर भी बहन से कई बार बात कर समझाती रहती थी। कुसुम को क्या पता था कि बड़ी बहन इस घटना के बाद और भी ज्यादा टूट जाएगी।