फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Aadhar card of Haryana, crop in UP, how crop will be sold

समस्या: हरियाणा के किसानों की यूपी में फसल, खरीदेगा कौन... पोर्टल पर नहीं हो रहा पंजीकरण, हाईकोर्ट की शरण लेगी आढ़ती एसोसिएशन

Wed, 05 Jan 2022 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 05 Jan 2022 02:27 AM IST
सार

हरियाणा के कईं जिलों की सीमा उत्तर प्रदेश से लगती है। इसलिए बहुत संख्या में सीमांत किसानों की या तो यूपी में जमीन है या फिर व ठेके पर जमीन लेकर वहां खेती करते हैं। वहीं हरियाणा सरकार ने सभी किसानों की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर अपडेट कराने के निर्देश दिए हुए हैं। गेहूं की फसल उन्हीं की खरीदी जाएगी जिनका पोर्टल पर पंजीकरण होगा, लेकिन दूसरे राज्य में फसल होने के कारण किसानों को पंजीकरण में समस्या आ रही है। 

विज्ञापन
Aadhar card of Haryana, crop in UP, how crop will be sold
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

हरियाणा के करनाल में पंचायत नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन की बैठक में अभी तक आढ़त व मजदूरी का भुगतान नहीं करने पर चिंता जाहिर की गई। वहीं सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण नहीं खोलेे जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कहा गया कि राज्य की करनाल आदि कई अनाज मंडियां ऐसी हैं, जिनका कारोबार 40 से 70 प्रतिशत तक सीमांत किसानों पर निर्भर है। हरियाणा के वे किसान जिनकी जमीन यूपी में है, उनकी फसल न बिकने का बड़ा मुद्दा है। इसी मुद्दे को लेकर अब आढ़ती एसोसिएशन ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की शरण में जाने का फैसला लिया है।

विज्ञापन


अनाज मंडी में हुई बैठक में प्रधान रजनीश चौधरी ने कहा कि पोर्टल पर गेहूं की फसल के लिए पंजीकरण तो शुरू हो गया लेकिन सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल नहीं खोला है। लगता है सरकार इस बार सीमांत किसानों की गेहूं की फसल भी खरीदने के मूड में नहीं है, ऐसे में आढ़तियों को भारी नुकसान होगा।
विज्ञापन


करनाल के करीब सात हजार किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन यूपी में हैं, उनकी फसल न यूपी में बिकती है न हरियाणा सरकार खरीदती है। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, आढ़तियों को भी इसका सीधा नुकसान होता है। सरकार तत्काल सीमांत राज्यों व हरियाणा के दूसरे प्रदेशों में खेती करने वाले किसानों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण खोले अन्यथा आढ़ती किसानों के साथ मिलकर इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट की शरण में जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उप प्रधान राजकुमार सिंगला ने कहा कि 30 नवंबर तक आढ़तियों की आढ़त व श्रमिकों की मजदूरी मिल जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं मिला। डीएफएससी से लेकर डीसी तक से गुहार लगाने के बाद सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। सचिव राजेश अरोड़ा ने कहा कि करनाल की मंडी भी सीमांत किसानों पर ही निर्भर हैं।

सरकार को तत्काल पोर्टल पर पंजीकरण खोलना चाहिए। कोषाध्यक्ष चंद्रप्रकाश टक्कर ने कहा कि सरकार की यही नीतियां रहीं तो मंडियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। बैठक में बग्गा सिंह, निर्मल प्रकाश, रघुवीर सिंह, रोबिन नरवाल, संदीप अरोड़ा, सुभाष धवन, राजेंद्र गुप्ता, जिले सिंह कुंडू, सुशील शर्मा, विनोद सिंगला, मंजीत दुआ, रघुवीर सिंह गर्ग आदि आढ़ती मौजूद रहे।

यह है बड़ा मुद्दा

धान खरीद का सीजन बीतने के बाद अब गेहूं खरीद की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हरियाणा सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पंजीकरण नहीं खोले जाने से आढ़तियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता उन किसानों को है, जो हरियाणा के निवासी हैं लेकिन जमीन यूपी आदि सीमांत राज्यों में है। हरियाणा सरकार जमीन यूपी में होने के कारण उनकी फसल नहीं खरीदती, यूपी में उनकी फसल इसलिए नहीं बिकती, क्योंकि उनका आधार कार्ड हरियाणा का है। ऐसे में वह अपनी फसल आखिर कहां ले जाएं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed