समस्या: हरियाणा के किसानों की यूपी में फसल, खरीदेगा कौन... पोर्टल पर नहीं हो रहा पंजीकरण, हाईकोर्ट की शरण लेगी आढ़ती एसोसिएशन
हरियाणा के कईं जिलों की सीमा उत्तर प्रदेश से लगती है। इसलिए बहुत संख्या में सीमांत किसानों की या तो यूपी में जमीन है या फिर व ठेके पर जमीन लेकर वहां खेती करते हैं। वहीं हरियाणा सरकार ने सभी किसानों की फसल का ब्यौरा पोर्टल पर अपडेट कराने के निर्देश दिए हुए हैं। गेहूं की फसल उन्हीं की खरीदी जाएगी जिनका पोर्टल पर पंजीकरण होगा, लेकिन दूसरे राज्य में फसल होने के कारण किसानों को पंजीकरण में समस्या आ रही है।
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हरियाणा के करनाल में पंचायत नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन की बैठक में अभी तक आढ़त व मजदूरी का भुगतान नहीं करने पर चिंता जाहिर की गई। वहीं सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण नहीं खोलेे जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कहा गया कि राज्य की करनाल आदि कई अनाज मंडियां ऐसी हैं, जिनका कारोबार 40 से 70 प्रतिशत तक सीमांत किसानों पर निर्भर है। हरियाणा के वे किसान जिनकी जमीन यूपी में है, उनकी फसल न बिकने का बड़ा मुद्दा है। इसी मुद्दे को लेकर अब आढ़ती एसोसिएशन ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की शरण में जाने का फैसला लिया है।
अनाज मंडी में हुई बैठक में प्रधान रजनीश चौधरी ने कहा कि पोर्टल पर गेहूं की फसल के लिए पंजीकरण तो शुरू हो गया लेकिन सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पोर्टल नहीं खोला है। लगता है सरकार इस बार सीमांत किसानों की गेहूं की फसल भी खरीदने के मूड में नहीं है, ऐसे में आढ़तियों को भारी नुकसान होगा।
करनाल के करीब सात हजार किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन यूपी में हैं, उनकी फसल न यूपी में बिकती है न हरियाणा सरकार खरीदती है। जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, आढ़तियों को भी इसका सीधा नुकसान होता है। सरकार तत्काल सीमांत राज्यों व हरियाणा के दूसरे प्रदेशों में खेती करने वाले किसानों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण खोले अन्यथा आढ़ती किसानों के साथ मिलकर इस मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट की शरण में जाएंगे।
उप प्रधान राजकुमार सिंगला ने कहा कि 30 नवंबर तक आढ़तियों की आढ़त व श्रमिकों की मजदूरी मिल जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं मिला। डीएफएससी से लेकर डीसी तक से गुहार लगाने के बाद सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। सचिव राजेश अरोड़ा ने कहा कि करनाल की मंडी भी सीमांत किसानों पर ही निर्भर हैं।
सरकार को तत्काल पोर्टल पर पंजीकरण खोलना चाहिए। कोषाध्यक्ष चंद्रप्रकाश टक्कर ने कहा कि सरकार की यही नीतियां रहीं तो मंडियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। बैठक में बग्गा सिंह, निर्मल प्रकाश, रघुवीर सिंह, रोबिन नरवाल, संदीप अरोड़ा, सुभाष धवन, राजेंद्र गुप्ता, जिले सिंह कुंडू, सुशील शर्मा, विनोद सिंगला, मंजीत दुआ, रघुवीर सिंह गर्ग आदि आढ़ती मौजूद रहे।
यह है बड़ा मुद्दा
धान खरीद का सीजन बीतने के बाद अब गेहूं खरीद की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हरियाणा सरकार के मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर सीमांत राज्यों के किसानों के लिए पंजीकरण नहीं खोले जाने से आढ़तियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता उन किसानों को है, जो हरियाणा के निवासी हैं लेकिन जमीन यूपी आदि सीमांत राज्यों में है। हरियाणा सरकार जमीन यूपी में होने के कारण उनकी फसल नहीं खरीदती, यूपी में उनकी फसल इसलिए नहीं बिकती, क्योंकि उनका आधार कार्ड हरियाणा का है। ऐसे में वह अपनी फसल आखिर कहां ले जाएं।