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ए ग्रेड यूनिवर्सिटी में यूजीसी नियमों को ठेंगा
कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 10 Feb 2014 12:49 AM IST
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शिक्षकों की संख्या के लिहाज से यूजीसी के मानक ए ग्रेड कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। इसका खामियाजा यहां पढ़ाई कर रहे हजारों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
शिक्षाविद इन हालातों को विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बता रहे हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की संख्या के आंकड़े यूनिवर्सिटी की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं।
नियमित शिक्षकों की संख्या के बारे में यूजीसी के मानक तय हैं, लेकिन केयू इन मानकों को ठेंगा दिखा रही है। यदि केयू में कार्यरत शिक्षकों की संख्या और यूजीसी के तय किए गए मानकों पर गौर किए जाए तो हालात एकदम विपरीत नजर आएंगे।
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यूजीसी के नियमों के अनुसार किसी भी यूनिवर्सिटी व अन्य शिक्षण संस्थान में 90 प्रतिशत शिक्षक रेगुलर होने आवश्यक हैं और 10 प्रतिशत अढोक पर हो सकते हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की संख्या पर गौर किया जाए तो यहां 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं।
पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस अवधि में कुल 50 के आसपास शिक्षकों की भर्ती की गई, जबकि इस दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों की संख्या इससे करीब तीन गुना है।
पैसा बचाने के लिए तैयार किए जाते हैं मौसमी बेरोजगार
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में रेगुलर शिक्षकों की भर्ती न कर अनुबंध के आधार पर शिक्षकों को रखा जाता है। ऐसे शिक्षकों को साल भर में केवल 8-10 माह तक काम करवाया जाता है। कई बार तो परीक्षाओं के दौरान ही रिलीव कर दिया जाता है। ऐसा करने से एक ओर से छात्रों के लिए परेशानी होती है, दूसरी ओर शिक्षक भी मौसमी बेरोजगार बनने को मजबूर हो जाते हैं।
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शिक्षाविद इन हालातों को विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बता रहे हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की संख्या के आंकड़े यूनिवर्सिटी की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं।
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नियमित शिक्षकों की संख्या के बारे में यूजीसी के मानक तय हैं, लेकिन केयू इन मानकों को ठेंगा दिखा रही है। यदि केयू में कार्यरत शिक्षकों की संख्या और यूजीसी के तय किए गए मानकों पर गौर किए जाए तो हालात एकदम विपरीत नजर आएंगे।
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यूजीसी के नियमों के अनुसार किसी भी यूनिवर्सिटी व अन्य शिक्षण संस्थान में 90 प्रतिशत शिक्षक रेगुलर होने आवश्यक हैं और 10 प्रतिशत अढोक पर हो सकते हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में शिक्षकों की संख्या पर गौर किया जाए तो यहां 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं।
पिछले पांच वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस अवधि में कुल 50 के आसपास शिक्षकों की भर्ती की गई, जबकि इस दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों की संख्या इससे करीब तीन गुना है।
पैसा बचाने के लिए तैयार किए जाते हैं मौसमी बेरोजगार
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में रेगुलर शिक्षकों की भर्ती न कर अनुबंध के आधार पर शिक्षकों को रखा जाता है। ऐसे शिक्षकों को साल भर में केवल 8-10 माह तक काम करवाया जाता है। कई बार तो परीक्षाओं के दौरान ही रिलीव कर दिया जाता है। ऐसा करने से एक ओर से छात्रों के लिए परेशानी होती है, दूसरी ओर शिक्षक भी मौसमी बेरोजगार बनने को मजबूर हो जाते हैं।