{"_id":"81-42143","slug":"Karnal-42143-81","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच केंद्रों में लुट रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच केंद्रों में लुट रहे मरीज
Karnal
Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनाल। जिले में स्थापित अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और लेबोरेट्री की शिकायत डीसी से की गई है। अधिकार संस्था के महासचिव एडवोकेट राजेश शर्मा ने उन्हें शिकायत सौंपी है। शिकायत में कहा कि हजारों मरीज डाक्टर द्वारा रेफर करने के बाद विभिन्न अल्ट्रासाउंड, एक्सरे सेंटर और लेबोरेट्री में टेस्ट कराने पहुंचते हैं और यह ट्रेंड बन गया है कि अधिकतम बीमारियां चाहे वे छोटी हों या बड़ी कि लिए डॉक्टर इन केंद्रों पर टेस्ट कराने के लिए मरीजों को भेजते रहते हैं। शहर में जितने भी इस तरह के सेंटर हैं, उन पर भारी भीड़ देखी जा सकती है, लेकिन अधिकतर सेंटर टेस्ट करने के बाद मरीज को बिल नहीं दिया जाता, जबकि मरीज से टेस्ट करने से पहले फीस नकद ले ली जाती है। बहुत से सेंटरों में रेट लिस्ट, जोकि विभिन्न टेस्ट की फीस दर्शाती है, नहीं लगी है। भोले-भाले मरीजों से मोटी फीस वसूली जा रही है। इन सेंटरों में सिविल अस्पताल के मुकाबले ज्यादा फीस ली जाती है। जोकि कई बार गरीब व आम व्यक्ति की पहुंच से बाहर है।
फीस के बाद बिल जारी न करने सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, क्योंकि बिना बिलों के आधार पर आयकर विभाग भी इन सेंटरों की आय का ठीक से आंकलन नहीं कर पाता। संस्था ने एक अन्य मुद्दे को उठाते हुए उपायुक्त के संज्ञान में यह बात लाई है कि जिले में खासकर गांव व मोहल्लों में झोलाछाप डॉक्टर बैठे हुए हैं। लोग उनके पास इलाज के लिए जाते हैं, पर वे अनुभवहीन होने की वजह से गलत दवा दे देते हैं। इसका खामियाजा कभी भी मरीज या उसके परिवार को भुगतना पड़ सकता है। संबंधित विभाग को चाहिए कि ऐसे डॉक्टरों की धरपकड़ करे।
विज्ञापन
फीस के बाद बिल जारी न करने सेंटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, क्योंकि बिना बिलों के आधार पर आयकर विभाग भी इन सेंटरों की आय का ठीक से आंकलन नहीं कर पाता। संस्था ने एक अन्य मुद्दे को उठाते हुए उपायुक्त के संज्ञान में यह बात लाई है कि जिले में खासकर गांव व मोहल्लों में झोलाछाप डॉक्टर बैठे हुए हैं। लोग उनके पास इलाज के लिए जाते हैं, पर वे अनुभवहीन होने की वजह से गलत दवा दे देते हैं। इसका खामियाजा कभी भी मरीज या उसके परिवार को भुगतना पड़ सकता है। संबंधित विभाग को चाहिए कि ऐसे डॉक्टरों की धरपकड़ करे।
विज्ञापन