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किसी ने खोया बेटा तो किसी ने पिता
Karnal
Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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कलायत। सड़क हादसे में मारे गए कस्बे के 18 लोगों के परिवारों की दास्तां दिल दहला देने वाली हो गई है। किसी परिवार में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है तो किसी पिता के बेटे के लिए संजोए सपने उजड़ गए। सभी के जीवन में एक शून्य पैदा हो गया है जो उन्हें आजीवन तकलीफ देता रहेगा। वार्ड नंबर-7 के पार्षद श्याम सिंह राणा और उनकी पत्नी की मौत की खबर से उनके परिवार में मातम का माहौल है। उनकी पुत्री बबली ने बताया कि उनके मां-बाप की वह इकलौती संतान है। श्याम सिंह के पास उनका दोहता रहता है जो उनके साथ गया था पर वह वापसी में उनसे अलग हो गया। बबली का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों को भी समझ में नहीं आ रहा कि वे किस प्रकार बबली को सांत्वना दें।
नहीं रहा कमाने वाला
हादसे में मारे गए समे सिंह प्रजापति अपने परिवार में अकेला ही कमाने वाले थे। मेहनत-मजदूरी कर समे सिंह अपने परिवार को पाल रहा था। अब दो बच्चों और पत्नी का कोई सहारा नहीं रहा। परिवार की हालत देखी नहीं जा रही। छोटे-छोटे को देखकर परिजनों को भी कुछ सूझ नहीं रहा है।
इसी प्रकार वाहन चालक महिपाल के परिवार पर विपदाओं का पहाड़ टूट गया है। हादसे में महिपाल की माता का भी निधन हो गया। महिपाल के तीन से छह साल तक के तीन बच्चे हैं। वह अपने घर में अकेला कमाने वाला था। छोटे-छोटे अपने परिजनों से बार-बार पापा और दादी के आने के बारे में पूछ रहे हैं। परिजनों को समझ नहीं आ रहा कि वे बच्चों को क्या जवाब दें।
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मिट्टी में मिले सपने
हादसे में मौत का शिकार हुआ युवक प्रवीण एक कुशाग्र बुद्धि का युवक था। उसका अभी-अभी अंबाला के इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला हुआ था। उसके पिता मांगेराम मजदूरी करके अपने लाडले को कुछ बनाना चाहते थे। पड़ोसी पवन कुमार ने बताया कि प्रवीण बहुत होनहार बच्चा था। हमेशा परीक्षाओें मेें अव्वल रहता था। पिता की आर्थिक स्थिति विपरीत होते हुए भी उसके पिता की आंखों में प्रवीण के लिए सुनहरे सपने थे। उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने अतिरिक्त मेहनत करनी शुरू कर दी थी ताकि बेटे की फीस समय पर जमा करवा सके। प्रवीण की मौत से पिता मांगेराम और उसके सपने दोनों टूट गए।
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नहीं रहा कमाने वाला
हादसे में मारे गए समे सिंह प्रजापति अपने परिवार में अकेला ही कमाने वाले थे। मेहनत-मजदूरी कर समे सिंह अपने परिवार को पाल रहा था। अब दो बच्चों और पत्नी का कोई सहारा नहीं रहा। परिवार की हालत देखी नहीं जा रही। छोटे-छोटे को देखकर परिजनों को भी कुछ सूझ नहीं रहा है।
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इसी प्रकार वाहन चालक महिपाल के परिवार पर विपदाओं का पहाड़ टूट गया है। हादसे में महिपाल की माता का भी निधन हो गया। महिपाल के तीन से छह साल तक के तीन बच्चे हैं। वह अपने घर में अकेला कमाने वाला था। छोटे-छोटे अपने परिजनों से बार-बार पापा और दादी के आने के बारे में पूछ रहे हैं। परिजनों को समझ नहीं आ रहा कि वे बच्चों को क्या जवाब दें।
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मिट्टी में मिले सपने
हादसे में मौत का शिकार हुआ युवक प्रवीण एक कुशाग्र बुद्धि का युवक था। उसका अभी-अभी अंबाला के इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला हुआ था। उसके पिता मांगेराम मजदूरी करके अपने लाडले को कुछ बनाना चाहते थे। पड़ोसी पवन कुमार ने बताया कि प्रवीण बहुत होनहार बच्चा था। हमेशा परीक्षाओें मेें अव्वल रहता था। पिता की आर्थिक स्थिति विपरीत होते हुए भी उसके पिता की आंखों में प्रवीण के लिए सुनहरे सपने थे। उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने अतिरिक्त मेहनत करनी शुरू कर दी थी ताकि बेटे की फीस समय पर जमा करवा सके। प्रवीण की मौत से पिता मांगेराम और उसके सपने दोनों टूट गए।