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निजी स्कूल : मंहगी फीस, सुविधांए धक्का मार
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:44 AM IST
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निजी स्कूल : मंहगी फीस, सुविधाएं धक्का मार
जगदीप मराठा
करनाल। जिले के प्राइवेट स्कूलों की ओर से फीस तो मोटी वसूली जा रही है, लेकिन सुविधाएं धक्कामार हैं। जिले में स्थित करीब 400 निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट के नाम पर बच्चों से अच्छी खासी फीस ली जाती है, लेकिन बसों व अन्य वाहनों सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं करते हैं। इसलिए हर माह स्कूली बसें हादसों में क्षतिग्रस्त होती हैं और बच्चों की जान जोखिम में रहती है।
अमर उजाला की टीम ने जब शहर के स्कूलों का मुआयना किया तो पाया कि बच्चे असुरक्षित रूप से सफर करते हैं। बसों व अन्य वाहनों में बच्चों की सीट के हिसाब से नहीं बैठाया जाता, बल्कि ठूंसा जाता है। वहीं रिक्शा की बात करें ऊंचाई आने पर बच्चों से धक्का भी लगवाया जाता है। न तो शिक्षा विभाग इस बात को गंभीरता से ले रहा है और न ही आरटीए। अभिभावक भी कहीं न कहीं इस मामले में चूक कर रहे हैं।
अक्सर देखने में आता है कि कई बार तो बच्चों को घर तक पहुंचने के लिए स्कूली वाहनों को धक्का तक लगाना पड़ता है। यह सब देखते हुए भी प्रशासनिक अधिकारी मौन बैठे रहते हैं। काफी लंबे समय से जिला मुख्यालय सहित कस्बों और नगरों में भी यही व्यवस्था चल रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली वाहनों के लिए बनाई गई पॉलिसी का किसी भी वाहन संचालक द्वारा पालन नहीं किया जाता। जिलेभर में निजी शिक्षा संस्थानों का आंकड़ा 400 के करीब है और इनमें लगभग 1200 स्कूली वाहनों में बच्चे सफर करते हैं। ऐसे में लाखों बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जबकि जिले में केवल आधे वाहन ही नियमों का पालन कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने दुर्गा मंदिर के पास स्थित एक स्कूल की जब छुट्टी हुई तो वहां पर पाया कि एक रिक्शा के पीछे बच्चे धक्का लगा रहे हैं। हालांकि, ये रिक्शा स्कूल या फिर अभिभावकों ने लगाई है, लेकिन बच्चों से धक्का लगवाना गलत है। इसके अलावा, एक रिक्शा में दस से ज्यादा बच्चे सफर करते हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
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हर समय जान रहती जोखिम में
असुरक्षित वाहनों के कारण जिले भर के हजारों नैनिहालों की जान जोखिम में रहती है। क्योंकि रिक्शा, ऑटो, मैक्सी कैब, थ्री व्हीलर, टाटा मैजिक सहित अन्य कई ऐसे वाहनों में बच्चों को असुरक्षित तरीके से ठूसकर वाहनों को दौड़ाया जाता है। कई बार तो छात्रों को थ्री व्हीलरों के पीछे लटकर स्कूल पहुंचते देखा गया है। वहीं सुुरक्षा की दृष्टी से देखा जाए तो स्कूली बसों में भी सुविधाओं की बहुत कमी है। सबसे खास बात तो यह है कि स्कूलों के पास इन वाहनों को चलाने वाले चालक परिचालकों की पुलिस वेरिफिकेशन भी स्कूल संचालकों के पास नहीं है। यदि बच्चों के साथ किसी तरह की कोई आपराधिक घटना हो जाए तो पुलिस द्वारा अपराधियों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। अगर प्रशासन द्वारा इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्कूलों बसों में हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करे प्रशासन
स्कूली वाहनों में सुरक्षा की मांग को लेकर स्कूली वाहन चालक एसोसिएशन ने भी रविवार को बैठक कर स्कूल संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोला था। एसोसिएशन के प्रधान विजय राणा ने बताया कि निजी स्कूल प्रशासन के किसी आदेश का भी पालन नहीं कर रहें। स्कूली बसों में महिला कंडक्टर की व्यवस्था नहीं की जा रही। बसों में सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए, लेकिन ये अक्सर खराब रहते हैं। राणा ने बताया कि स्कूल उसी चालक को लगा सकता है, जिसके पास हरियाणा सरकार से एप्रूूव लाइसेंस और पांच साल का अनुभव हो, लेकिन पैसे बचाने के लिए स्कूल संचालक बाहर के लाइसेंस वाले चालकों को नौकरी पर रखते हैं, जोकि नियमों के खिलाफ है।
25 सितंबर तक चालक परिचालक की पुलिस वेरिफिकेशन के दिए आदेश
गुड़गांव में स्कूल कंडक्टर द्वारा दूसरी कक्षा के बच्चे की हत्या के बाद एडीसी कम आरटीए निशांत यादव ने शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य, प्रबंधकों को पत्र जारी कर स्कूल के पूरे स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करवाने के निर्देश जारी किए हैं। 25 सितंबर तक जिन संस्थानों से वेरीफिकेशन नहीं आए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे स्टाफ की 15 दिन के अंदर-अंदर संबंधित पुलिस थाना से पुलिस वेरीफिकेशन करवाकर वेरीफिकेशन की एक-एक प्रति खंड शिक्षा अधिकारी व जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से एडीसी एवं आरटीए कार्यालय में जमा करवानी है।
70 बसों को किया था चेक, 15 में पाई कमियां
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत हाल ही में आरटीए टीम ने स्कूलों बसों की चेकिंग की थी। 70 बसों का सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत निरीक्षण किया। इसमें से 15 बसें सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियमों की उल्लंघना करती पाई गई। कमियां पाए जाने वाली बसों के मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान किए गए और इसी के साथ आगे के लिए सुरक्षा दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। बसों में महिला अटेंडेंट नहीं थी, रूट बोर्ड नहीं थे और स्कूल का फोन नंबर सहित अन्य काफी खामियां पाई गई थी। इस बारे में आरटीए विभाग के इंस्पेक्टर जोगेंद्र सिंह ढुल का कहना है कि लगातार स्कूली वाहनों की चेकिंग जारी है। नियमों तो तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षण संस्थानों में कमेटी का गठन किया जाएगा: राजन लांबा
अगर किसी भी स्कूल के वाहनों में नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है या किसी वाहन को बच्चों से धक्का लगाया जा रहा है तो यह गलत है। वहीं 25 सितंबर से पहले सभी स्कूल संचालक स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करवाएंगे और शिक्षण संस्थानों में एक कमेटी का गठन भी किया जाएगा। जोकि स्कूल की हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखेगी। स्कूल संचालकों के साथ साथ अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों के आने व जाने पर ध्यान रखें और गाड़ी चालक पर भी नजर रखें।
-डॉ. राजन लांबा, प्रधान, सहोदय स्कूल कॉंप्लेक्स, करनाल
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जगदीप मराठा
करनाल। जिले के प्राइवेट स्कूलों की ओर से फीस तो मोटी वसूली जा रही है, लेकिन सुविधाएं धक्कामार हैं। जिले में स्थित करीब 400 निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्ट के नाम पर बच्चों से अच्छी खासी फीस ली जाती है, लेकिन बसों व अन्य वाहनों सुरक्षा के मापदंड पूरे नहीं करते हैं। इसलिए हर माह स्कूली बसें हादसों में क्षतिग्रस्त होती हैं और बच्चों की जान जोखिम में रहती है।
अमर उजाला की टीम ने जब शहर के स्कूलों का मुआयना किया तो पाया कि बच्चे असुरक्षित रूप से सफर करते हैं। बसों व अन्य वाहनों में बच्चों की सीट के हिसाब से नहीं बैठाया जाता, बल्कि ठूंसा जाता है। वहीं रिक्शा की बात करें ऊंचाई आने पर बच्चों से धक्का भी लगवाया जाता है। न तो शिक्षा विभाग इस बात को गंभीरता से ले रहा है और न ही आरटीए। अभिभावक भी कहीं न कहीं इस मामले में चूक कर रहे हैं।
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अक्सर देखने में आता है कि कई बार तो बच्चों को घर तक पहुंचने के लिए स्कूली वाहनों को धक्का तक लगाना पड़ता है। यह सब देखते हुए भी प्रशासनिक अधिकारी मौन बैठे रहते हैं। काफी लंबे समय से जिला मुख्यालय सहित कस्बों और नगरों में भी यही व्यवस्था चल रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्कूली वाहनों के लिए बनाई गई पॉलिसी का किसी भी वाहन संचालक द्वारा पालन नहीं किया जाता। जिलेभर में निजी शिक्षा संस्थानों का आंकड़ा 400 के करीब है और इनमें लगभग 1200 स्कूली वाहनों में बच्चे सफर करते हैं। ऐसे में लाखों बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जबकि जिले में केवल आधे वाहन ही नियमों का पालन कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने दुर्गा मंदिर के पास स्थित एक स्कूल की जब छुट्टी हुई तो वहां पर पाया कि एक रिक्शा के पीछे बच्चे धक्का लगा रहे हैं। हालांकि, ये रिक्शा स्कूल या फिर अभिभावकों ने लगाई है, लेकिन बच्चों से धक्का लगवाना गलत है। इसके अलावा, एक रिक्शा में दस से ज्यादा बच्चे सफर करते हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
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हर समय जान रहती जोखिम में
असुरक्षित वाहनों के कारण जिले भर के हजारों नैनिहालों की जान जोखिम में रहती है। क्योंकि रिक्शा, ऑटो, मैक्सी कैब, थ्री व्हीलर, टाटा मैजिक सहित अन्य कई ऐसे वाहनों में बच्चों को असुरक्षित तरीके से ठूसकर वाहनों को दौड़ाया जाता है। कई बार तो छात्रों को थ्री व्हीलरों के पीछे लटकर स्कूल पहुंचते देखा गया है। वहीं सुुरक्षा की दृष्टी से देखा जाए तो स्कूली बसों में भी सुविधाओं की बहुत कमी है। सबसे खास बात तो यह है कि स्कूलों के पास इन वाहनों को चलाने वाले चालक परिचालकों की पुलिस वेरिफिकेशन भी स्कूल संचालकों के पास नहीं है। यदि बच्चों के साथ किसी तरह की कोई आपराधिक घटना हो जाए तो पुलिस द्वारा अपराधियों तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। अगर प्रशासन द्वारा इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
स्कूलों बसों में हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करे प्रशासन
स्कूली वाहनों में सुरक्षा की मांग को लेकर स्कूली वाहन चालक एसोसिएशन ने भी रविवार को बैठक कर स्कूल संचालकों के खिलाफ मोर्चा खोला था। एसोसिएशन के प्रधान विजय राणा ने बताया कि निजी स्कूल प्रशासन के किसी आदेश का भी पालन नहीं कर रहें। स्कूली बसों में महिला कंडक्टर की व्यवस्था नहीं की जा रही। बसों में सीसीटीवी कैमरे तो लगा दिए गए, लेकिन ये अक्सर खराब रहते हैं। राणा ने बताया कि स्कूल उसी चालक को लगा सकता है, जिसके पास हरियाणा सरकार से एप्रूूव लाइसेंस और पांच साल का अनुभव हो, लेकिन पैसे बचाने के लिए स्कूल संचालक बाहर के लाइसेंस वाले चालकों को नौकरी पर रखते हैं, जोकि नियमों के खिलाफ है।
25 सितंबर तक चालक परिचालक की पुलिस वेरिफिकेशन के दिए आदेश
गुड़गांव में स्कूल कंडक्टर द्वारा दूसरी कक्षा के बच्चे की हत्या के बाद एडीसी कम आरटीए निशांत यादव ने शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य, प्रबंधकों को पत्र जारी कर स्कूल के पूरे स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करवाने के निर्देश जारी किए हैं। 25 सितंबर तक जिन संस्थानों से वेरीफिकेशन नहीं आए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पूरे स्टाफ की 15 दिन के अंदर-अंदर संबंधित पुलिस थाना से पुलिस वेरीफिकेशन करवाकर वेरीफिकेशन की एक-एक प्रति खंड शिक्षा अधिकारी व जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से एडीसी एवं आरटीए कार्यालय में जमा करवानी है।
70 बसों को किया था चेक, 15 में पाई कमियां
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत हाल ही में आरटीए टीम ने स्कूलों बसों की चेकिंग की थी। 70 बसों का सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत निरीक्षण किया। इसमें से 15 बसें सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के नियमों की उल्लंघना करती पाई गई। कमियां पाए जाने वाली बसों के मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान किए गए और इसी के साथ आगे के लिए सुरक्षा दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। बसों में महिला अटेंडेंट नहीं थी, रूट बोर्ड नहीं थे और स्कूल का फोन नंबर सहित अन्य काफी खामियां पाई गई थी। इस बारे में आरटीए विभाग के इंस्पेक्टर जोगेंद्र सिंह ढुल का कहना है कि लगातार स्कूली वाहनों की चेकिंग जारी है। नियमों तो तोड़ने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षण संस्थानों में कमेटी का गठन किया जाएगा: राजन लांबा
अगर किसी भी स्कूल के वाहनों में नियमों को ताक पर रखकर बच्चों को स्कूल लाया जा रहा है या किसी वाहन को बच्चों से धक्का लगाया जा रहा है तो यह गलत है। वहीं 25 सितंबर से पहले सभी स्कूल संचालक स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन करवाएंगे और शिक्षण संस्थानों में एक कमेटी का गठन भी किया जाएगा। जोकि स्कूल की हर तरह की गतिविधियों पर नजर रखेगी। स्कूल संचालकों के साथ साथ अभिभावकों को भी चाहिए कि वे बच्चों के आने व जाने पर ध्यान रखें और गाड़ी चालक पर भी नजर रखें।
-डॉ. राजन लांबा, प्रधान, सहोदय स्कूल कॉंप्लेक्स, करनाल