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सात साल बाद पैदा हुई बेटी, इलाज में डॉक्टरों की लापरवाही, परिजनों ने किया हंगामा
Updated Sun, 10 Sep 2017 11:43 PM IST
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आंख में डालने वाली दवा मुंह में डाल दी और मुंह में डालने वाली आंख में डाल दी, बच्ची की बिगड़ी तबीयत
फिर सामने आया मेडिकल कालेज का सच : पूरा प्रबंधन छुट्टी पर, मरीजों की जान, भगवान भरोसे
-मामले में मीडिया के संज्ञान लेने के बाद इलाज करने पहुंचे डॉक्टर, कहा बच्ची की तबियत में है सुधार
-फोर्थ क्लास ने बच्ची दे गलत दवा, लग रही खून की उल्टी, परिजनों ने काटा हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी में 650 करोड़ रुपये की लागत से बने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में हर रोज डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ रही है। डॉक्टरों की लापरवाही का खामियाजा इलाज के लिए आने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पहले तो यहां डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज नहीं मिल पाता था, लेकिन डॉक्टरों के आने के बाद भी यहां इलाज हो पाना आसान नहीं है। रविवार को मेडिकल कॉलेज के निकू में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां दाखिल तीन दिन की एक बच्ची की तबियत डॉक्टरों की अनदेखी के कारण बिगड़ गई। एक फोर्थ क्लास कर्मचारी ने बच्ची को आंख में डालने वाली दवाई मुंह में डाल दी और मुंह में डालने वाली दवाई आंख में। इससे बच्ची को खून की उल्टियां आने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों की अनदेखी के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया और डॉक्टरों को भी खरी-खरी सुनाई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर अगर ठीक प्रकार से इलाज करते तो ऐसी नौबत नहीं आती। गांव जडौली निवासी जोगिंद्र ने बताया कि 7 सितंबर को साढ़े बारह बजे उसकी पत्नी शिल्पा ने सात साल बाद ऑपरेशन के माध्यम से एक बेटी को जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्ची स्वस्थ थी। आंख में थोड़ी सी दिक्कत होने के कारण डॉक्टरों ने बच्ची का पीलिया का टेस्ट करवाने की बात कही। उन्होंने बच्ची का टेस्ट करवाया तो बच्ची स्वस्थ थी। बच्ची की आंख में केवल थोड़ा सा इन्फेक्शन पाया और बच्ची तभी से निकू में दाखिल थी। डॉक्टरों ने बच्ची की आंख और मुुंह में डालने के लिए दो दवाइयां दी। आरोप है कि रविवार सुबह निकू में दाखिल बच्ची को दवाई देते हुए अस्पताल की एक चतुर्थ कर्मचारी ने बच्ची को गलत दवाई दे दी। परिजनों का आरोप है कि तब से ही बच्ची को खून की उल्टियां लग रही हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर बच्ची को कुछ हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की होगी।
एक घंटे तक इलाज के लिए नहीं पहुंचे डॉक्टर
निकू में दाखिल बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची की तबियत खराब होने के बाद उन्होंने बार बार डॉक्टरों को बच्ची के इलाज के लिए कहा, लेकिन करीब सवा घंटे तक निकू में बच्ची को देखने के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। डॉक्टरों ने इसकी जानकारी मीडिया को दी। मीडिया द्वारा मामले में संज्ञान लेने और परिजनों द्वारा डायरेक्टर और सीएमओ को शिकायत करने के बाद ही डॉक्टर निकू में पहुंचे। डॉक्टर नेपाल सिंह ने बताया कि बच्ची ही तबियत ठीक है। परिजनों को घबराने वाली कोई बात नहीं है। इसके बाद ही परिजन थोड़े शांत हुए। काफी जद्दोजहद के बाद डॉक्टरों ने रात साढ़े आठ बजे दोबारा बच्ची के टेस्ट के लिए सैंपल भेजे।
सवा घंटा तक परिजनों ने किया हंगामा, नहीं आया कोई प्रबंधन अधिकारी
डॉक्टरों की लापरवाही से बच्ची की तबियत खराब होने के बाद परिजनों ने निकू के बाहर करीब सवा घंटे तक जमकर हंगामा किया, लेकिन इसके बावजूद भी न तो कोई डॉक्टर वहां पहुंचा और न ही कोई प्रबंधन का अधिकारी। परिजनों ने बताया कि मामले को लेकर वह मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी डॉक्टर इलाज पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहे। बाद में मेडिकल कॉलेज के सुरक्षाकर्मियों के वहां भारी संख्या में इकट्ठा होने के बाद परिजनों का गुस्सा ओर ज्यादा बढ़ गया। परिजनों ने डॉक्टरों के कमरे के बाहर खड़े होकर खूब खरी खोटी सुनाई, लेकिन डॉक्टर फिर भी बाहर नहीं निकले। परिजनों का कहना है कि अगर बच्ची को कुछ हो गया तो वह डॉक्टरों की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से करेंगे। इस बार में मेडिकल कालेज के डायरेक्टर डा. सुरेंद्र कशयप और एमएस डा. जगदीश दुरेजा ने फोन नहीं उठाया। बताया गया है कि संडे को सब छुट्टी पर हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या छुट्टी के दिन लोग बीमार नहीं होंगे?
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फिर सामने आया मेडिकल कालेज का सच : पूरा प्रबंधन छुट्टी पर, मरीजों की जान, भगवान भरोसे
-मामले में मीडिया के संज्ञान लेने के बाद इलाज करने पहुंचे डॉक्टर, कहा बच्ची की तबियत में है सुधार
-फोर्थ क्लास ने बच्ची दे गलत दवा, लग रही खून की उल्टी, परिजनों ने काटा हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी में 650 करोड़ रुपये की लागत से बने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में हर रोज डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ रही है। डॉक्टरों की लापरवाही का खामियाजा इलाज के लिए आने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पहले तो यहां डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज नहीं मिल पाता था, लेकिन डॉक्टरों के आने के बाद भी यहां इलाज हो पाना आसान नहीं है। रविवार को मेडिकल कॉलेज के निकू में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां दाखिल तीन दिन की एक बच्ची की तबियत डॉक्टरों की अनदेखी के कारण बिगड़ गई। एक फोर्थ क्लास कर्मचारी ने बच्ची को आंख में डालने वाली दवाई मुंह में डाल दी और मुंह में डालने वाली दवाई आंख में। इससे बच्ची को खून की उल्टियां आने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों की अनदेखी के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया और डॉक्टरों को भी खरी-खरी सुनाई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर अगर ठीक प्रकार से इलाज करते तो ऐसी नौबत नहीं आती। गांव जडौली निवासी जोगिंद्र ने बताया कि 7 सितंबर को साढ़े बारह बजे उसकी पत्नी शिल्पा ने सात साल बाद ऑपरेशन के माध्यम से एक बेटी को जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्ची स्वस्थ थी। आंख में थोड़ी सी दिक्कत होने के कारण डॉक्टरों ने बच्ची का पीलिया का टेस्ट करवाने की बात कही। उन्होंने बच्ची का टेस्ट करवाया तो बच्ची स्वस्थ थी। बच्ची की आंख में केवल थोड़ा सा इन्फेक्शन पाया और बच्ची तभी से निकू में दाखिल थी। डॉक्टरों ने बच्ची की आंख और मुुंह में डालने के लिए दो दवाइयां दी। आरोप है कि रविवार सुबह निकू में दाखिल बच्ची को दवाई देते हुए अस्पताल की एक चतुर्थ कर्मचारी ने बच्ची को गलत दवाई दे दी। परिजनों का आरोप है कि तब से ही बच्ची को खून की उल्टियां लग रही हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर बच्ची को कुछ हुआ तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की होगी।
एक घंटे तक इलाज के लिए नहीं पहुंचे डॉक्टर
निकू में दाखिल बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची की तबियत खराब होने के बाद उन्होंने बार बार डॉक्टरों को बच्ची के इलाज के लिए कहा, लेकिन करीब सवा घंटे तक निकू में बच्ची को देखने के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा। डॉक्टरों ने इसकी जानकारी मीडिया को दी। मीडिया द्वारा मामले में संज्ञान लेने और परिजनों द्वारा डायरेक्टर और सीएमओ को शिकायत करने के बाद ही डॉक्टर निकू में पहुंचे। डॉक्टर नेपाल सिंह ने बताया कि बच्ची ही तबियत ठीक है। परिजनों को घबराने वाली कोई बात नहीं है। इसके बाद ही परिजन थोड़े शांत हुए। काफी जद्दोजहद के बाद डॉक्टरों ने रात साढ़े आठ बजे दोबारा बच्ची के टेस्ट के लिए सैंपल भेजे।
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सवा घंटा तक परिजनों ने किया हंगामा, नहीं आया कोई प्रबंधन अधिकारी
डॉक्टरों की लापरवाही से बच्ची की तबियत खराब होने के बाद परिजनों ने निकू के बाहर करीब सवा घंटे तक जमकर हंगामा किया, लेकिन इसके बावजूद भी न तो कोई डॉक्टर वहां पहुंचा और न ही कोई प्रबंधन का अधिकारी। परिजनों ने बताया कि मामले को लेकर वह मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी डॉक्टर इलाज पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहे। बाद में मेडिकल कॉलेज के सुरक्षाकर्मियों के वहां भारी संख्या में इकट्ठा होने के बाद परिजनों का गुस्सा ओर ज्यादा बढ़ गया। परिजनों ने डॉक्टरों के कमरे के बाहर खड़े होकर खूब खरी खोटी सुनाई, लेकिन डॉक्टर फिर भी बाहर नहीं निकले। परिजनों का कहना है कि अगर बच्ची को कुछ हो गया तो वह डॉक्टरों की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से करेंगे। इस बार में मेडिकल कालेज के डायरेक्टर डा. सुरेंद्र कशयप और एमएस डा. जगदीश दुरेजा ने फोन नहीं उठाया। बताया गया है कि संडे को सब छुट्टी पर हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या छुट्टी के दिन लोग बीमार नहीं होंगे?
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