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Karnal News: एक साल में मिले 5100 टीबी मरीज, आधे हुए ठीक
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- अभी भी 2532 मरीजों का चल रहा इलाज, स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर कर रहीं स्क्रीनिंग
राकेश चौहान
करनाल। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क नजर आ रहा है। वर्ष 2024 में विभाग की टीमों ने टीबी के करीब 5100 मरीजों को तलाश किया है। इनमें से 2568 मरीज ठीक हो गए हैं और अभी 2532 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं वर्ष 2023 की अपेक्षा वर्ष 2024 में 32 मरीज कम मिले हैं।
इस वर्ष जिले को टीबी मुक्त करने का स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए विभाग की ओर से निक्षय 100 दिन का शिविर अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें चार वैन घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है मगर मुख्यतः यह फेफड़ों को प्रभावित करता है।
यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने व थूकने से फैलता है। यदि समय पर जांच व इलाज शुरू न किया जाए तो एक टीबी का मरीज 10-15 व्यक्तियों को टीबी की बीमारी दे सकता है। करनाल जिले में छह क्षय रोग विभाग हैं तथा 15 जगह बलगम जांच केंद्र हैं, जहां पर मरीजों के बलगम की निशुल्क जांच की जाती है। संवाद
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टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी हो।
- शाम के समय बुखार आता हो।
- खांसते समय बलगम में खून आता हो।
- छाती में दर्द होता हो या सांस फूलती हो।
- भूख और वजन कम हो रहा हो।
- रात के समय पसीना आता हो।
- गर्दन या बगल में गांठें हो।
--
वर्ष
टीबी मरीज
2019
3854
2020
4312
2021
4274
2022
4507
2023
5132
--
मरीज को हर महीने मिलेंगे एक हजार रुपये
सरकार ने निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) के माध्यम से पोषण सहायता की राशि को 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। इसका लाभ सभी नए और पुराने मरीजों को मिलेगा, जो मरीज टीबी पॉजिटिव मिलता है। उसे यह राशि दी जाएगी। इसके साथ ही मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर, मरीज की जानकारी देने वाले व मरीज की देखभाल करने व दवा देने वाली आशा वर्कर को भी 500 रुपये प्रति मरीज सरकार की ओर से दिए जाते हैं।
वर्जन
किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच व इलाज करवाए। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी से संबंधित मरीजों का इलाज निशुल्क है। भारत सरकार ने टीबी को नोटिफाइबल डिजीज घोषित किया है। इसके अंतर्गत सभी प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिक व लैब को टीबी के मरीज की जानकारी देनी आवश्यक है। जिले को टीबी मुक्त करने के लिए विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कर रही हैं।
- डॉ. सिम्मी कपूर, उप-सिविल सर्जन करनाल
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राकेश चौहान
करनाल। टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क नजर आ रहा है। वर्ष 2024 में विभाग की टीमों ने टीबी के करीब 5100 मरीजों को तलाश किया है। इनमें से 2568 मरीज ठीक हो गए हैं और अभी 2532 मरीजों का इलाज चल रहा है। वहीं वर्ष 2023 की अपेक्षा वर्ष 2024 में 32 मरीज कम मिले हैं।
इस वर्ष जिले को टीबी मुक्त करने का स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है। इसके लिए विभाग की ओर से निक्षय 100 दिन का शिविर अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें चार वैन घर-घर जाकर मरीजों की स्क्रीनिंग कर रही हैं। उप-सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है मगर मुख्यतः यह फेफड़ों को प्रभावित करता है।
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यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने छींकने व थूकने से फैलता है। यदि समय पर जांच व इलाज शुरू न किया जाए तो एक टीबी का मरीज 10-15 व्यक्तियों को टीबी की बीमारी दे सकता है। करनाल जिले में छह क्षय रोग विभाग हैं तथा 15 जगह बलगम जांच केंद्र हैं, जहां पर मरीजों के बलगम की निशुल्क जांच की जाती है। संवाद
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टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से ज्यादा खांसी हो।
- शाम के समय बुखार आता हो।
- खांसते समय बलगम में खून आता हो।
- छाती में दर्द होता हो या सांस फूलती हो।
- भूख और वजन कम हो रहा हो।
- रात के समय पसीना आता हो।
- गर्दन या बगल में गांठें हो।
वर्ष
टीबी मरीज
2019
3854
2020
4312
2021
4274
2022
4507
2023
5132
मरीज को हर महीने मिलेंगे एक हजार रुपये
सरकार ने निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई) के माध्यम से पोषण सहायता की राशि को 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये प्रति माह कर दिया है। इसका लाभ सभी नए और पुराने मरीजों को मिलेगा, जो मरीज टीबी पॉजिटिव मिलता है। उसे यह राशि दी जाएगी। इसके साथ ही मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर, मरीज की जानकारी देने वाले व मरीज की देखभाल करने व दवा देने वाली आशा वर्कर को भी 500 रुपये प्रति मरीज सरकार की ओर से दिए जाते हैं।
वर्जन
किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो वह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच व इलाज करवाए। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी से संबंधित मरीजों का इलाज निशुल्क है। भारत सरकार ने टीबी को नोटिफाइबल डिजीज घोषित किया है। इसके अंतर्गत सभी प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिक व लैब को टीबी के मरीज की जानकारी देनी आवश्यक है। जिले को टीबी मुक्त करने के लिए विभाग की टीमें घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कर रही हैं।
- डॉ. सिम्मी कपूर, उप-सिविल सर्जन करनाल