{"_id":"595fd4e54f1c1b41298b4577","slug":"181499452645-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आय दोगुणा करने को मधुमक्खी पालन करें किसान : राज्यपाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आय दोगुणा करने को मधुमक्खी पालन करें किसान : राज्यपाल
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आय दोगुना करने को मधुमक्खी पालन करें किसान : राज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सरकार वर्ष-2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी करने के लक्ष्य के लिए प्रयासरत हैं। सरकार के इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए फसलों के विविधीकरण में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय सहायक सिद्ध होगा। यह अभिव्यक्ति हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को सीएसएसआरआई के सभागार में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार,महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और नैशनल बी बोर्ड नई दिल्ली द्वारा मधुमक्खी पालन पर जागरूकता, उत्साहवर्धन और तकनीकी स्थानातंरण के संदर्भ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों को बतौर मुख्यातिथी सम्बोधित करते हुए की। राज्यपाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आम व्यक्तियों को मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शहद के लिए पता है, लेकिन मधु यानि शहद कई चिजों के लिए राम बाण है। इनमें व्यक्ति का चाहे भोजन हो या फिर उसे कोई बीमारी हो, सार्थक रूप से काम आता है। उन्होंने कहा कि 29 राज्यों में मधुमक्खी पालन का केंद्र स्थापित किया जा रहा है जिसके अंतर्गत 10 राज्यों में यह केन्द्र स्थापित हो चुके हैं। अब चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय को आगामी 16 जुलाई को भारत का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कारों में से एक सरदार पटेल अवार्ड मिलेगा। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धी है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशों में जा-जाकर भारत में निवेश करने की कई योजनाएं ला रहे हैं। इजाराईल का पीएम दौरा देखकर पूरा विश्व आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री के इस दौरे से एक नई किरण की शुरूआत होगी। संगोष्ठी का शुभारंभ राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
देखी प्रदर्शनी, किसानों से की बात
राज्यपाल ने सेमिनार से पहले सीएसएसआरआई के प्रांगण में मधुमक्खी पालन विषय पर लगी प्रदर्शनी भी देखी तथा किसानों से बातचीत भी की। सेमिनार में राज्यपाल व आए हुए अतिथियों का स्वागत महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डा. समर सिंह ने किया तथा महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कालेज आफ डीन प्रो0 एसके सहरावत ने धन्यवाद किया। वहीं. राज्यपाल हरियाणा के सामने सोविनयार ऑफ नेशनल सेमिनार ऑन बी-किपिंग, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के पैकेज ऑफ प्रैक्टिस,महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के एडमिशन ब्राउशर, मधुमक्खी पालन विषय पर पुस्तिका का विमोचन किया गया तथा चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के बीच सहायता से सम्बन्धित एमओयू साईन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर सीएसएसआरआई के निदेशक पीसी शर्मा, भारत सरकार के सहायक कमीशनर एसके मल्होत्रा, एनबीबी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक बीएल सारस्वत उपस्थित थे।
विवि के लिए 118 एकड़ जमीन ट्रांसफर
इस मौके पर संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय हिसार और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. केपी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय की जमीन ट्रांसफर हो गई है जो कि 118 एकड़ 11 कनाल और चार मरले है। उन्होंने बताया कि इस विश्व के अंतर्गत झज्जर के रैया में, जींद केग बधाना और अम्बाला के चंदसोली में रिसर्च सैंन्टर खोलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। इस वर्ष महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में विभिन्न कोर्सो में एमएससी और पीएचडी की कक्षाएं शुरू होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य के चार किसानों की ऐप्लिकेशन राष्ट्रीय अवार्ड के लिए भेजी थी, जिनमें से तीन किसानों का राष्ट्रीय अवार्ड के लिए चयन हुआ है। यही नहीं 20 साल के बाद चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय को सरदार पटेल अवार्ड भी मिलने जा रहा है। इसके लिए उन्होंने सभी को बधाई दी।
विज्ञापन
कार्यक्रम में चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के निदेशक एसके सेठी ने पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से रिसर्च उपलब्धियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। मधुमक्खी पालन व्यवसाय के बारे में तथा फसलों के विविधकरण के बारे में विस्तार से बताया। सेमिनार में नई दिल्ली एआईसीआरपी के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर डा. आरके ठाकुर ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी की चार विशेष प्रजातियां भारत में उपलब्ध हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मधुमक्खी को स्वरोजगार तथा कौशल विकास देने में भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन के लिए प्रत्येक जिले में एक केन्द्र खोला जा रहा है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा अखिल भारतीय मधुमक्खी पालन एवं प्रांगण सहायक कीट परियोजना के अंतर्गत 26 केन्द्र पूरे देश में कार्यरत हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सरकार वर्ष-2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी करने के लक्ष्य के लिए प्रयासरत हैं। सरकार के इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए फसलों के विविधीकरण में मधुमक्खी पालन का व्यवसाय सहायक सिद्ध होगा। यह अभिव्यक्ति हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने शुक्रवार को सीएसएसआरआई के सभागार में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार,महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और नैशनल बी बोर्ड नई दिल्ली द्वारा मधुमक्खी पालन पर जागरूकता, उत्साहवर्धन और तकनीकी स्थानातंरण के संदर्भ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों को बतौर मुख्यातिथी सम्बोधित करते हुए की। राज्यपाल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आम व्यक्तियों को मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शहद के लिए पता है, लेकिन मधु यानि शहद कई चिजों के लिए राम बाण है। इनमें व्यक्ति का चाहे भोजन हो या फिर उसे कोई बीमारी हो, सार्थक रूप से काम आता है। उन्होंने कहा कि 29 राज्यों में मधुमक्खी पालन का केंद्र स्थापित किया जा रहा है जिसके अंतर्गत 10 राज्यों में यह केन्द्र स्थापित हो चुके हैं। अब चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय को आगामी 16 जुलाई को भारत का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कारों में से एक सरदार पटेल अवार्ड मिलेगा। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धी है। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशों में जा-जाकर भारत में निवेश करने की कई योजनाएं ला रहे हैं। इजाराईल का पीएम दौरा देखकर पूरा विश्व आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री के इस दौरे से एक नई किरण की शुरूआत होगी। संगोष्ठी का शुभारंभ राज्यपाल ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
देखी प्रदर्शनी, किसानों से की बात
राज्यपाल ने सेमिनार से पहले सीएसएसआरआई के प्रांगण में मधुमक्खी पालन विषय पर लगी प्रदर्शनी भी देखी तथा किसानों से बातचीत भी की। सेमिनार में राज्यपाल व आए हुए अतिथियों का स्वागत महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डा. समर सिंह ने किया तथा महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कालेज आफ डीन प्रो0 एसके सहरावत ने धन्यवाद किया। वहीं. राज्यपाल हरियाणा के सामने सोविनयार ऑफ नेशनल सेमिनार ऑन बी-किपिंग, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के पैकेज ऑफ प्रैक्टिस,महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के एडमिशन ब्राउशर, मधुमक्खी पालन विषय पर पुस्तिका का विमोचन किया गया तथा चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के बीच सहायता से सम्बन्धित एमओयू साईन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल को स्मृति चिन्ह देकर भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर सीएसएसआरआई के निदेशक पीसी शर्मा, भारत सरकार के सहायक कमीशनर एसके मल्होत्रा, एनबीबी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक बीएल सारस्वत उपस्थित थे।
विज्ञापन
विवि के लिए 118 एकड़ जमीन ट्रांसफर
इस मौके पर संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय हिसार और महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. केपी सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय की जमीन ट्रांसफर हो गई है जो कि 118 एकड़ 11 कनाल और चार मरले है। उन्होंने बताया कि इस विश्व के अंतर्गत झज्जर के रैया में, जींद केग बधाना और अम्बाला के चंदसोली में रिसर्च सैंन्टर खोलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। इस वर्ष महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में विभिन्न कोर्सो में एमएससी और पीएचडी की कक्षाएं शुरू होंगी। उन्होंने बताया कि राज्य के चार किसानों की ऐप्लिकेशन राष्ट्रीय अवार्ड के लिए भेजी थी, जिनमें से तीन किसानों का राष्ट्रीय अवार्ड के लिए चयन हुआ है। यही नहीं 20 साल के बाद चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय को सरदार पटेल अवार्ड भी मिलने जा रहा है। इसके लिए उन्होंने सभी को बधाई दी।
विज्ञापन
कार्यक्रम में चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के निदेशक एसके सेठी ने पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से रिसर्च उपलब्धियों को लेकर विभागीय रिपोर्ट प्रस्तुत की। मधुमक्खी पालन व्यवसाय के बारे में तथा फसलों के विविधकरण के बारे में विस्तार से बताया। सेमिनार में नई दिल्ली एआईसीआरपी के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर डा. आरके ठाकुर ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी की चार विशेष प्रजातियां भारत में उपलब्ध हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मधुमक्खी को स्वरोजगार तथा कौशल विकास देने में भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। मधुमक्खी पालन के लिए प्रत्येक जिले में एक केन्द्र खोला जा रहा है। इसके अलावा भारत सरकार द्वारा अखिल भारतीय मधुमक्खी पालन एवं प्रांगण सहायक कीट परियोजना के अंतर्गत 26 केन्द्र पूरे देश में कार्यरत हैं।