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भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर सामने आए राइस मिलर्स, करनाल से लेकर चंडीगढ़ तक के अधिकारियों पर संगीन आरोप
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:44 AM IST
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जोनल एडमिनिस्ट्रेटर के सामने बोले राइस मिलर्स, आखिर किस-किस को दें रिश्वत
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
एफसीआई में चावल पास कराने को लेकर प्रति गाड़ी पांच हजार रुपये की रिश्वत मामले में बाद अब राइस मिलर्स ने मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोला है। राइस मिलों में रखे चावल और धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करने के नाम पर 20 लाख रुपये मांगने के मामले में शनिवार को राइस मिलर्स ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मार्केटिंग बोर्ड के जोनल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. सुशील मलिक के सामने राइस मिलर्स ने अधिकारियों पर खुलकर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े।
राइस मिलर्स ने आरोप लगाया कि मार्केट कमेटी के ऑक्शन रिकार्डर से लेकर सचिव समेत हैड क्वार्टर पर तैनात अधिकारी इस खेल में संलिप्त हैं। हर साल उन्हें कभी किसी नाम पर तो कभी किसी नाम पर परेशान किया जाता है और ब्लैकमेल किया जाता है। ‘सबूतों समेत आरोपों’ से अधिकारियों के भी पसीने छूट गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि अगर इस मामले की निष्पक्षता के साथ जांच हुई तो अधिकारियों का नपना तय है। बता दें कि तीन दिन पहले राइस मिलर्स ने एसडीएम को शिकायत दी थी और कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले की जांच मार्केटिंग बोर्ड के जोनल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. सुशील मलिक को सौंपी गई है। शनिवार को काफी संख्या में राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान विनोद गोयल की अध्यक्षता में बोर्ड आफिस पहुंचे। इस दौरान मिलर्स ने मार्केट कमेटी और बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भ्रष्टाचार के आरोप भी जड़े। इतना ही नहीं मिलर्स ने लिखित में मामले की शिकायत की और लगाए गए आरोपों के सबूत भी सौंपे।
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जानकारी मुताबिक मंडी के मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार की कथित ऑडियो रिकार्डिंग सौंपी गई है, जिसमें हर शैलर से फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर वसूली का जिक्र किया गया है। प्रधान विनोद गोयल ने कहा कि आखिर हम किस-किस को रिश्वत दें, और क्यों दें, क्या वे गलत काम करते हैं। अधिकारी किस बात के पैसे मांगते हैं और न देने की एवज में सीधे आकर दस्तावेज उठा ले जाते हैं। जेडए ने मामले में शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार से बात की और बयान दर्ज किये।
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान विनोद गोयल, राइस मिलर्स राजेंद्र सिंह आदि ने करनाल मार्केट कमेटी में तैनात एक सचिव, मंडी सुपरवाइजर अरविंद्र सिंह, ऑक्शन रिकार्डर सतबीर सिंह, डीएमईयू (जिला मार्केटिंग प्रवर्तक अधिकारी) सौरभ सिंह और चंडीगढ़ से आए एमडीओ (मार्केटिंग बोर्ड अधिकारी) सुनील शर्मा के खिलाफ खिलाफ बयान दिये हैं। हालांकि, इस मामले में मंडी सचिव आशा रानी ने आरोपों को नकारा है।
एफसीआई में भ्रष्टाचार की चल रही जांच
बता दें कि पिछले दिनों राइस मिलर्स ने नेवल स्थित गोदाम के इंचार्ज असिस्टेंट मैनेजर कपिल पालीवाल पर गोदाम में चावल लगाने को लेकर प्रति गाड़ी पांच हजार रुपये मांगने के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं राइस मिलर्स ने पालीवाल के तबादले को लेकर हड़ताल पर चले जाने की चेतावनी दी थी। बाद में डीएम एफसीआई रवि यादव ने पालीवाल को नेवल से हटा दिया था और मामले की जांच के आदेश दिये थे। हालांकि, अभी तक जांच के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है। मिलर्स भी जांच रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं।
शिकायत की जांच करने के लिए राइस मिलर्स को बुलाया गया था। मिलर्स के बयान कलमबद्ध किए गए हैं। मामले की गहनता के साथ जांच की जा रही है, जांच में अगर कोई दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। साथ ही केस भी दर्ज कराया जाएगा। -डॉ. सुशील मलिक, जेडए, करनाल।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
एफसीआई में चावल पास कराने को लेकर प्रति गाड़ी पांच हजार रुपये की रिश्वत मामले में बाद अब राइस मिलर्स ने मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ मोर्चा खोला है। राइस मिलों में रखे चावल और धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करने के नाम पर 20 लाख रुपये मांगने के मामले में शनिवार को राइस मिलर्स ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मार्केटिंग बोर्ड के जोनल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. सुशील मलिक के सामने राइस मिलर्स ने अधिकारियों पर खुलकर भ्रष्टाचार के आरोप जड़े।
राइस मिलर्स ने आरोप लगाया कि मार्केट कमेटी के ऑक्शन रिकार्डर से लेकर सचिव समेत हैड क्वार्टर पर तैनात अधिकारी इस खेल में संलिप्त हैं। हर साल उन्हें कभी किसी नाम पर तो कभी किसी नाम पर परेशान किया जाता है और ब्लैकमेल किया जाता है। ‘सबूतों समेत आरोपों’ से अधिकारियों के भी पसीने छूट गए हैं।
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सूत्रों का कहना है कि अगर इस मामले की निष्पक्षता के साथ जांच हुई तो अधिकारियों का नपना तय है। बता दें कि तीन दिन पहले राइस मिलर्स ने एसडीएम को शिकायत दी थी और कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले की जांच मार्केटिंग बोर्ड के जोनल एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. सुशील मलिक को सौंपी गई है। शनिवार को काफी संख्या में राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान विनोद गोयल की अध्यक्षता में बोर्ड आफिस पहुंचे। इस दौरान मिलर्स ने मार्केट कमेटी और बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भ्रष्टाचार के आरोप भी जड़े। इतना ही नहीं मिलर्स ने लिखित में मामले की शिकायत की और लगाए गए आरोपों के सबूत भी सौंपे।
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जानकारी मुताबिक मंडी के मंडी सुपरवाइजर अरविंद कुमार की कथित ऑडियो रिकार्डिंग सौंपी गई है, जिसमें हर शैलर से फिजिकल वेरिफिकेशन के नाम पर वसूली का जिक्र किया गया है। प्रधान विनोद गोयल ने कहा कि आखिर हम किस-किस को रिश्वत दें, और क्यों दें, क्या वे गलत काम करते हैं। अधिकारी किस बात के पैसे मांगते हैं और न देने की एवज में सीधे आकर दस्तावेज उठा ले जाते हैं। जेडए ने मामले में शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार से बात की और बयान दर्ज किये।
राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान विनोद गोयल, राइस मिलर्स राजेंद्र सिंह आदि ने करनाल मार्केट कमेटी में तैनात एक सचिव, मंडी सुपरवाइजर अरविंद्र सिंह, ऑक्शन रिकार्डर सतबीर सिंह, डीएमईयू (जिला मार्केटिंग प्रवर्तक अधिकारी) सौरभ सिंह और चंडीगढ़ से आए एमडीओ (मार्केटिंग बोर्ड अधिकारी) सुनील शर्मा के खिलाफ खिलाफ बयान दिये हैं। हालांकि, इस मामले में मंडी सचिव आशा रानी ने आरोपों को नकारा है।
एफसीआई में भ्रष्टाचार की चल रही जांच
बता दें कि पिछले दिनों राइस मिलर्स ने नेवल स्थित गोदाम के इंचार्ज असिस्टेंट मैनेजर कपिल पालीवाल पर गोदाम में चावल लगाने को लेकर प्रति गाड़ी पांच हजार रुपये मांगने के आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं राइस मिलर्स ने पालीवाल के तबादले को लेकर हड़ताल पर चले जाने की चेतावनी दी थी। बाद में डीएम एफसीआई रवि यादव ने पालीवाल को नेवल से हटा दिया था और मामले की जांच के आदेश दिये थे। हालांकि, अभी तक जांच के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है। मिलर्स भी जांच रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं।
शिकायत की जांच करने के लिए राइस मिलर्स को बुलाया गया था। मिलर्स के बयान कलमबद्ध किए गए हैं। मामले की गहनता के साथ जांच की जा रही है, जांच में अगर कोई दोषी पाया गया तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। साथ ही केस भी दर्ज कराया जाएगा। -डॉ. सुशील मलिक, जेडए, करनाल।