{"_id":"595fd4df4f1c1b35198b4600","slug":"11499452639-karnal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज में है सर्जरी कराना तो 201","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज में है सर्जरी कराना तो 201
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिकल कॉलेज में सर्जरी करानी है तो 2018 में आना
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए तीन माह पहले अप्रैल में शुरू हुआ कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज अब मरीजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। यहां ओपीडी में इलाज कराने आने वाले लोगों को जहां कई दिनों तक चक्कर लगाना पड़ता है, वहीं ऑपरेशन की तारीखें इतनी लंबी हो गई हैं कि अगर मरीज इन तारीखों का इंतजार करें तो उनकी मौत हो जाए। खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट भी सात महीने लंबी है। इस समय अस्पताल में करीब 270 मरीज ऑपरेशन के लिए लाइन में लगे हैं। इनमें कई ऐसे है जिन्हें जल्द से जल्द सर्जरी की जरूरत है, इसलिए वे मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों की शरण ले रहे हैं। करीब 650 करोड़ रुपये खर्च कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बना मेडिकल कॉलेज आज खुद बीमार नजर आ रहा है। मेडिकल कॉलेज जब से शुरू हुआ है, तब से लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। यही कारण है कि अब करनाल के अलावा पानीपत, कुरुक्षेत्र के मरीज भी यहां इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जिसके कारण यहां मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा। लेकिन मरीजों को यह नहीं पता कि दूर से शानदार और भव्य दिखने वाला यह मेडिकल कॉलेज दरअसल अंदर से पूरी तरह खोखला है। यहां मरीजों को मेडिकल कॉलेज जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर, जिला अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। हाल यह है कि यहां ओपीडी में इलाज कराने के लिए जहां मरीजों को कई दिनों तक कॉलेज का चक्कर लगाना पड़ता है, वहीं सर्जरी का हाल तो और भी बुरा है। मेडिकल कॉलेज में अगर आपको सर्जरी कराना है तो वर्ष 2018 में आना होगा। वेटिंग की इसी लंबी लिस्ट को देखकर जहां कई मरीज मेडिकल कॉलेज के गेट से ही लौट जा रहे हैं, तो कई अभी भी इस उम्मीद में अभी भी इंतजार कर रहे कि शायद उनका नंबर समय से पहले आ जाए।
डॉक्टर बोले कभी भी फट सकती है पित्त की थैली, सर्जरी की डेट दी 15 जनवरी
गोंदर गांव के सरपंच बलविंद्र अपनी पत्नी नीलम का इलाज कराने के लिए 22 जून को मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। करीब 12 दिन तक अस्पताल का चक्कर लगाने और कई तरह के जांच कराने के बाद उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के पित्त की थैली में पूरी तरह पथरी भरी हुई है। अगर इसका जल्द ऑपरेशन नहीं किया गया तो यह कभी भी फट सकती है। जिससे मरीज के जान को भी खतरा हो सकता है। मरीज की सीरियस कंडीशन होने के बाद भी यही डॉक्टर ने सर्जरी के लिए जो डेट दी वह अगले वर्ष 15 जनवरी की है। बलविंद्र ने बताया कि अब समझ नहीं आ रहा है कि मरीज की सीरियस कंडीशन देखकर निजी अस्पताल जाएं कि यहां सर्जरी कराने के लिए सात महीनें का लंबा इंतजार करें।
लंबी वेटिंग के सामने गरीब मरीज असहाय
-मेडिकल कॉलेज का निर्माण उन गरीब मरीजों को ध्यान में रखकर किया गया था, जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं करा सकते। लेकिन यह मेडिकल कॉलेज ऐसे मरीजों के लिए सिर्फ मुखौटा साबित हो रहा है। यहां की लंबी वेटिंग लिस्ट देखकर गरीब मरीज अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं। नीलोखेड़ी से अपनी बहु के पथरी का इलाज कराने आई पुष्पा ने बताया कि मुझे भी ऑपरेशन के लिए 15 जनवरी की डेट दी गई है। हम गरीब हैं, इसलिए निजी अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते। मजबूरन हमें यहां पर ही ऑपरेशन कराने के लिए इंतजार करना होगा। पुष्प ने सवाल उठाया कि मरीज की तबीयत ज्यादा खराब है, अगर उसे कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
विज्ञापन
कॉलेज में ऑपरेशन के लिए सिर्फ दो टेबल, सप्ताह में 10 ऑपरेशन
-अरबों रुपए खर्च कर बनें इस मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो टेबल हैं, जिनपर बारी-बारी से सोमवार और मंगलवार को ऑपरेशन किया जाता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार एक दिन में सिर्फ 4 से 5 ऑपरेशन ही हो सकता है, वहीं एक सप्ताह में लगभग 10 ऑपरेशन ही होता है। टेबल की कमी के कारण ही मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद से ही सर्जरी कराने वाले मरीजों की लिस्ट लंबी होती जा रही है।
निजी अस्पतालों के साथ मिलीभगत के लगते रहे हैं आरोप
वहीं, मेडिकल कालेज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह मिलीभगत का खेल भी हो सकता है। बता दें कि इससे पहले भी कई बार दवाइयों व आपरेशन किट तक को लेकर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। वहीं, ट्रामा सेंटर में भी खानापूर्ति करते मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा, पिछले माह एक डाक्टर गलत मेडिकल कर दो लाख रुपये लेने के आरोप में पकड़ा गया था। जाहिर सी बात है कि अगर किसी मरीज को 2018 का आपरेशन का समय मिलता है तो वे इंतजार न करके सीधे निजी अस्पतालों में जाते हैं।
अगले सप्ताह से बढ़ेगी टेबल-समस्या बड़ी है, इसका समाधान निकाले की कोशिश की जा रही है। अगले सप्ताह हमारी बैठक होने वाली है, जिसमें ऑप्रेशन की दो और टेबल बढ़ाने की पूरी कोशिश होगी। हालांकि अभी भी हम पूरी कोशिश करते हैं कि जल्द से जल्द मरीजों की सर्जरी हो। मरीजों का मोबाइल नंबर हमारे पास होता है, इसलिए जिस दिन टेबल खाली होती है, जरूरतमंद मरीज को बुला लिया जाता है।
-सुंदर गोयल, एचओडी, सर्जरी विभाग।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए तीन माह पहले अप्रैल में शुरू हुआ कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज अब मरीजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। यहां ओपीडी में इलाज कराने आने वाले लोगों को जहां कई दिनों तक चक्कर लगाना पड़ता है, वहीं ऑपरेशन की तारीखें इतनी लंबी हो गई हैं कि अगर मरीज इन तारीखों का इंतजार करें तो उनकी मौत हो जाए। खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के ऑपरेशन की वेटिंग लिस्ट भी सात महीने लंबी है। इस समय अस्पताल में करीब 270 मरीज ऑपरेशन के लिए लाइन में लगे हैं। इनमें कई ऐसे है जिन्हें जल्द से जल्द सर्जरी की जरूरत है, इसलिए वे मजबूरन प्राइवेट अस्पतालों की शरण ले रहे हैं। करीब 650 करोड़ रुपये खर्च कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए बना मेडिकल कॉलेज आज खुद बीमार नजर आ रहा है। मेडिकल कॉलेज जब से शुरू हुआ है, तब से लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। यही कारण है कि अब करनाल के अलावा पानीपत, कुरुक्षेत्र के मरीज भी यहां इलाज कराने पहुंच रहे हैं, जिसके कारण यहां मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा। लेकिन मरीजों को यह नहीं पता कि दूर से शानदार और भव्य दिखने वाला यह मेडिकल कॉलेज दरअसल अंदर से पूरी तरह खोखला है। यहां मरीजों को मेडिकल कॉलेज जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर, जिला अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। हाल यह है कि यहां ओपीडी में इलाज कराने के लिए जहां मरीजों को कई दिनों तक कॉलेज का चक्कर लगाना पड़ता है, वहीं सर्जरी का हाल तो और भी बुरा है। मेडिकल कॉलेज में अगर आपको सर्जरी कराना है तो वर्ष 2018 में आना होगा। वेटिंग की इसी लंबी लिस्ट को देखकर जहां कई मरीज मेडिकल कॉलेज के गेट से ही लौट जा रहे हैं, तो कई अभी भी इस उम्मीद में अभी भी इंतजार कर रहे कि शायद उनका नंबर समय से पहले आ जाए।
डॉक्टर बोले कभी भी फट सकती है पित्त की थैली, सर्जरी की डेट दी 15 जनवरी
गोंदर गांव के सरपंच बलविंद्र अपनी पत्नी नीलम का इलाज कराने के लिए 22 जून को मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। करीब 12 दिन तक अस्पताल का चक्कर लगाने और कई तरह के जांच कराने के बाद उन्हें डॉक्टरों ने बताया कि मरीज के पित्त की थैली में पूरी तरह पथरी भरी हुई है। अगर इसका जल्द ऑपरेशन नहीं किया गया तो यह कभी भी फट सकती है। जिससे मरीज के जान को भी खतरा हो सकता है। मरीज की सीरियस कंडीशन होने के बाद भी यही डॉक्टर ने सर्जरी के लिए जो डेट दी वह अगले वर्ष 15 जनवरी की है। बलविंद्र ने बताया कि अब समझ नहीं आ रहा है कि मरीज की सीरियस कंडीशन देखकर निजी अस्पताल जाएं कि यहां सर्जरी कराने के लिए सात महीनें का लंबा इंतजार करें।
विज्ञापन
लंबी वेटिंग के सामने गरीब मरीज असहाय
-मेडिकल कॉलेज का निर्माण उन गरीब मरीजों को ध्यान में रखकर किया गया था, जो निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च नहीं करा सकते। लेकिन यह मेडिकल कॉलेज ऐसे मरीजों के लिए सिर्फ मुखौटा साबित हो रहा है। यहां की लंबी वेटिंग लिस्ट देखकर गरीब मरीज अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं। नीलोखेड़ी से अपनी बहु के पथरी का इलाज कराने आई पुष्पा ने बताया कि मुझे भी ऑपरेशन के लिए 15 जनवरी की डेट दी गई है। हम गरीब हैं, इसलिए निजी अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते। मजबूरन हमें यहां पर ही ऑपरेशन कराने के लिए इंतजार करना होगा। पुष्प ने सवाल उठाया कि मरीज की तबीयत ज्यादा खराब है, अगर उसे कुछ हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
विज्ञापन
कॉलेज में ऑपरेशन के लिए सिर्फ दो टेबल, सप्ताह में 10 ऑपरेशन
-अरबों रुपए खर्च कर बनें इस मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो टेबल हैं, जिनपर बारी-बारी से सोमवार और मंगलवार को ऑपरेशन किया जाता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार एक दिन में सिर्फ 4 से 5 ऑपरेशन ही हो सकता है, वहीं एक सप्ताह में लगभग 10 ऑपरेशन ही होता है। टेबल की कमी के कारण ही मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद से ही सर्जरी कराने वाले मरीजों की लिस्ट लंबी होती जा रही है।
निजी अस्पतालों के साथ मिलीभगत के लगते रहे हैं आरोप
वहीं, मेडिकल कालेज से जुड़े सूत्र बताते हैं कि यह मिलीभगत का खेल भी हो सकता है। बता दें कि इससे पहले भी कई बार दवाइयों व आपरेशन किट तक को लेकर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। वहीं, ट्रामा सेंटर में भी खानापूर्ति करते मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा, पिछले माह एक डाक्टर गलत मेडिकल कर दो लाख रुपये लेने के आरोप में पकड़ा गया था। जाहिर सी बात है कि अगर किसी मरीज को 2018 का आपरेशन का समय मिलता है तो वे इंतजार न करके सीधे निजी अस्पतालों में जाते हैं।
अगले सप्ताह से बढ़ेगी टेबल-समस्या बड़ी है, इसका समाधान निकाले की कोशिश की जा रही है। अगले सप्ताह हमारी बैठक होने वाली है, जिसमें ऑप्रेशन की दो और टेबल बढ़ाने की पूरी कोशिश होगी। हालांकि अभी भी हम पूरी कोशिश करते हैं कि जल्द से जल्द मरीजों की सर्जरी हो। मरीजों का मोबाइल नंबर हमारे पास होता है, इसलिए जिस दिन टेबल खाली होती है, जरूरतमंद मरीज को बुला लिया जाता है।
-सुंदर गोयल, एचओडी, सर्जरी विभाग।