फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   - जिले के 9 गांव में 100 महिलाएं हर रोज बना रही है 300 कपड़े थे थैल

- जिले के 9 गांव में 100 महिलाएं हर रोज बना रही है 300 कपड़े थे थैल

Fri, 07 Sep 2018 01:03 AM IST
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:03 AM IST
विज्ञापन
- जिले के 9 गांव में 100 महिलाएं हर रोज बना रही है 300 कपड़े थे थैल

विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। पॉलिथीन के खिलाफ जिला में एक अनुकरणीय पहल की गई है। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं से पॉलिथीन का विकल्प कपड़े के थैले बनवाए जा रहे हैं। घरौंडा खंड के गांव बड़सत से इसकी शुरूआत हो गई है, जहां सत्यम महिला ग्राम संगठन के शिव-शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कपड़े के थैले तैयार करने में जुटी हुई हैं। योजना के अनुसार इस समूह द्वारा करीब 30 हजार थैले तैयार करवाए जाएंगे, जो अगले कुछ दिनों में खंड की करीब 10-15 पंचायतों में बांटे जाएंगे। हर घर में बिना कोई शुल्क लिए एक थैला दिया जाएगा। थैले बांटने की शुरूआत आगामी 10 सितंबर को ऊंचासमाना गांव से की जानी प्रस्तावित है।
डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने गुरुवार को बड़सत गांव में जाकर स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए जा रहे कपड़े के थैलो को देखा और महिलाओं के जज्बे की तारीफ की। डीसी के के साथ एडीसी निशांत कुमार यादव, सहायक आयुक्त(प्रशिक्षणाधीन) साहिल गुप्ता, एचएसआरएलएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक जुबिन तथा फंक्शनल मैनेजर रामभक्त भी थे। डीसी और एडीसी ने पहले ग्राहक बन करीब 25 रुपये कीमत के एक-एक थैले को खरीदा। इसके पश्चात उपायुक्त ने बड़सत के निकट बसे डेरा संजय नगर में जाकर वहां के जीवन ज्योति महिला ग्राम संगठन के समूह की महिलाओं द्वारा कपड़े के थैले बनाने के कार्य को देखा। इस संगठन से जुड़े करीब 12 समूह की महिलाओं द्वारा अबतक 1930 थैले बनाए जा चुके हैं।
विज्ञापन


नगर निगम खरीदेगा तीन लाख कपड़े के थैले
डीसी ने बताया कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि पॉलीथीन से बने कैरी बैग का प्रयोग बंद होना चाहिए। इसका बेहतर विकल्प कपड़े के थैले हैं। करनाल जिला में गांव गांव में मौजूद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कपड़े के थैले तैयार करेंगी, जो सभी घरों में निशुल्क बांटे जाएंगे। कपड़े से तैयार होने वाले थैले के व्यय को पंचायत वहन करेगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम की ओर से प्रत्येक हाउस होल्ड को वितरण के लिए 3 लाख थैले खरीदने के लिए कहा जाएगा। इस तरह से महिलाओं द्वारा थैले तैयार करने के लिए उन्हे रोजगार के साथ-साथ स्वावलंबी बनाने में भी मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

......................................
9 गांव में 100 महिलाएं हर रोज बना रही हैं 300 कपड़े थे थैले
एडीसी निशांत कुमार यादव ने इस अवसर पर बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कपड़े के थैले तैयार करवाने का कार्य फिलहाल घरौंडा, करनाल व इंद्री के 9 गांवो में शुरू करवाया गया है, जिसमें करीब 100 महिलाएं कार्य कर रही हैं। औसतन एक महिला एक दिन में करीब 30 बैग तैयार कर लेती है। बैग या थैले पर स्वच्छ भारत मिशन और एचएसआरएलएम के लोगों भी प्रिंट करवाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि थैलों के साथ-साथ ग्रामीण स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से पारदर्शी साबुन बनाने के कार्य भी करवाए जाएंगे और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed