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Kaithal News: शतरंज भूलभुलैया खेल प्रतियोगिता में सातवीं का यश प्रथम
Fri, 24 Oct 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:17 AM IST
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खिलाड़ियों ने किया स्कूल का नाम रोशन।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरोही स्कूल ग्योंग, कैथल की हिंदी लैब में आयोजित गतिविधियों के दौरान वीरवार को ‘हमें हमारे परिवार से मिलाओ’, ‘शतरंज भूलभुलैया’ और ‘शब्द पिटारा’ खेलों का सफल प्रयोग किया गया। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों ने तनावमुक्त और आनंददायी वातावरण में अपनी शब्दावली का विस्तार किया। ‘शतरंज भूलभुलैया खेल’ में सातवीं के यश बनवाला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं ‘शब्द पिटारा खेल’ में भावना ने प्रथम, तन्शिका ने द्वितीय और वंशिका ने तृतीय स्थान हासिल किया।
इस दौरान कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों ने तनाव-मुक्त और प्राकृतिक वातावरण में अपनी-अपनी शब्दावली का विकास किया। उन्होंने नए-नए शब्दों के बारे में जाना। शब्द पिटारा खेल के माध्यम से संबंधित शब्दों को उनके परिवार से मिलाया और शतरंज भूलभुलैया खेल के माध्यम से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय शब्दों के बारे में ज्ञान को विकसित किया।
गौरलब है कि विद्यालय में कार्यरत हिंदी प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार चावला ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत “खेल-खेल में भाषा ज्ञान” की अवधारणा को साकार करते हुए हिंदी भाषायी दक्षताओं के विकास के लिए नवाचारी खेल गतिविधियों का ‘खेल पिटारा’ तैयार किया है। इसमें बिंगो, साँप-सीढ़ी, शतरंज भूलभुलैया, कार्ड गेम, हमें हमारे परिवार से मिलाओ, वर्ग पहेली, शब्द पिटारा, पासा खेल, टिक-टैक-टो, बूझो तो जानें, शब्द सीढ़ी और शब्द अंत्याक्षरी जैसे अनेक रचनात्मक खेल शामिल हैं।
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डॉ. चावला ने बताया कि “खेल-खेल में भाषा ज्ञान” का अर्थ है खेलों के माध्यम से भाषा सिखाना। इससे बच्चों में शब्दावली, संवाद कौशल और व्याकरण की
समझ मज़ेदार और स्वाभाविक ढंग से
विकसित होती है। यह खेल-आधारित
और अनुभवात्मक शिक्षा का रूप है, जो विद्यार्थियों की रचनात्मकता को भी
बढ़ाता है।
डॉ. चावला ने कहा कि खेल-खेल में भाषा सीखने से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता, शब्दज्ञान और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही अपने ‘खेल पिटारे’ को सभी शिक्षकों के साथ साझा करेंगे, ताकि इसे कक्षा-कक्षों में अपनाकर विद्यार्थियों के भाषायी व समग्र विकास को और सशक्त बनाया जा सके। इससे बच्चों में रचनात्मकता बढ़ती है।
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कैथल। आरोही स्कूल ग्योंग, कैथल की हिंदी लैब में आयोजित गतिविधियों के दौरान वीरवार को ‘हमें हमारे परिवार से मिलाओ’, ‘शतरंज भूलभुलैया’ और ‘शब्द पिटारा’ खेलों का सफल प्रयोग किया गया। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों ने तनावमुक्त और आनंददायी वातावरण में अपनी शब्दावली का विस्तार किया। ‘शतरंज भूलभुलैया खेल’ में सातवीं के यश बनवाला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं ‘शब्द पिटारा खेल’ में भावना ने प्रथम, तन्शिका ने द्वितीय और वंशिका ने तृतीय स्थान हासिल किया।
इस दौरान कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों ने तनाव-मुक्त और प्राकृतिक वातावरण में अपनी-अपनी शब्दावली का विकास किया। उन्होंने नए-नए शब्दों के बारे में जाना। शब्द पिटारा खेल के माध्यम से संबंधित शब्दों को उनके परिवार से मिलाया और शतरंज भूलभुलैया खेल के माध्यम से संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय शब्दों के बारे में ज्ञान को विकसित किया।
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गौरलब है कि विद्यालय में कार्यरत हिंदी प्राध्यापक डॉ. विजय कुमार चावला ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत “खेल-खेल में भाषा ज्ञान” की अवधारणा को साकार करते हुए हिंदी भाषायी दक्षताओं के विकास के लिए नवाचारी खेल गतिविधियों का ‘खेल पिटारा’ तैयार किया है। इसमें बिंगो, साँप-सीढ़ी, शतरंज भूलभुलैया, कार्ड गेम, हमें हमारे परिवार से मिलाओ, वर्ग पहेली, शब्द पिटारा, पासा खेल, टिक-टैक-टो, बूझो तो जानें, शब्द सीढ़ी और शब्द अंत्याक्षरी जैसे अनेक रचनात्मक खेल शामिल हैं।
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डॉ. चावला ने बताया कि “खेल-खेल में भाषा ज्ञान” का अर्थ है खेलों के माध्यम से भाषा सिखाना। इससे बच्चों में शब्दावली, संवाद कौशल और व्याकरण की
समझ मज़ेदार और स्वाभाविक ढंग से
विकसित होती है। यह खेल-आधारित
और अनुभवात्मक शिक्षा का रूप है, जो विद्यार्थियों की रचनात्मकता को भी
बढ़ाता है।
डॉ. चावला ने कहा कि खेल-खेल में भाषा सीखने से विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता, शब्दज्ञान और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही अपने ‘खेल पिटारे’ को सभी शिक्षकों के साथ साझा करेंगे, ताकि इसे कक्षा-कक्षों में अपनाकर विद्यार्थियों के भाषायी व समग्र विकास को और सशक्त बनाया जा सके। इससे बच्चों में रचनात्मकता बढ़ती है।