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पर्यटन दिवस पर विशेष

Sat, 26 Sep 2015 11:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल Updated Sat, 26 Sep 2015 11:25 PM IST
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कैथल जिले में ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के तीर्थ स्थलों को पर्यटन केंद्रों के रूप रुप में विकसित करने की योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। कई तीर्थ स्थलों का विकास कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका। महाभारत के 48 कोस की परिधि में कैथल का सर्वाधिक इलाका आता है। यहां 51 से अधिक ऐतिहासिक महत्व के तीर्थस्थल स्थित हैं।
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कैथल शहर में स्थित वृद्धकेदार तीर्थ, ऐतिहासिक नवग्रह कुंड, प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर, प्राचीन अंबकेश्वर मंदिर, ऐतिहासिक बावड़ी, विश्व की पहली महिला मुस्लिम शासक रजिया बेगम का मकबरा, सैय्यद हुसैन का मकबरा, भाई उदय सिंह का किला, गांव मूंदड़ी में ऐतिहासिक लव-कुश तीर्थ, कलायत का ऐतिहासिक कपिलमुनि सरोवर, पूंडरी का पूंडरीक तीर्थ सहित पंजाब सीमा पर स्थित 48 कोस की परिधि के एक कौने पर महाभारत युद्ध के समय रक्षा करने वाले अरंतुक यक्ष का ऐतिहासिक तीर्थ सहित कई ऐसे बड़े ऐतिहासिक स्थल हैं। जिन्हें विकसित करने की योजनाएं कई बार बनीं और उतनी ही बार ठंडे बस्ते में चली गईं।
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अधर में अटका जीर्णोद्धार
निवर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ऐतिहासिक वृद्धिकेदार सरोवर के जीर्णोद्धार पर 5 करोड़ 51 लाख, सूर्यकुंड के जीर्णोद्धार पर 2.80 करोड़, 20 लाख से बुद्धकुंड, 2 करोड़ रुपये से ऐतिहासिक भाई उदय सिंह के किले, 20 लाख से वीर कुंड की चारदीवारी सहित कलायत के कपिलमुनि सरोवर, मूंदड़ी के ऐतिहासिक लव कुश तीर्थ, गांव बाबा लदाना में स्वामी रामकृष्ण परम हंस के गुुरु तोतापुरी जी महाराज की समाधि स्थल डेरा बाबा राजपुरी के अलावा तीर्थां का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया था। इनमें से अधिकतर का जीर्णोद्धार का कार्य अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है। इन सभी ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के पौराणिक स्थलों को विकसित कर कुरुक्षेत्र की तर्ज पर पर्यटन केंद्र के तौर पर जिले को विकसित करने की योजना थी। लेकिन यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है।
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पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित होने की अनेकों संभावनाएं
जिले से वरिष्ठ साहित्य सेवक हरेश वशिष्ठ के अनुसार उनके पिता दामोदर वशिष्ठ ने कैथल के इतिहास को लेकर पुस्तक लिखी थी। जिसमें कैथल के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के स्थलों के बारे में उल्लेख था। कैथल पूरा जिला महाभारत की 48 कोस की परिधि में आता है। यहां अरंतुक यक्ष से लेकर कुरुक्षेत्र तक अधिकतर गांव एवं कस्बे में महाभारत एवं रामायण काल से जुड़े प्रमाण मिल जाते हैं। इस जिले के ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र के रुप में विकसित होने की पूर्ण संभावनाएं हैं। इस जिले को कुरुक्षेत्र जिले से जोड़कर पर्यटन से जोड़ा जा सकता है।

इतिहासकार कमलेश शर्मा का कहना है कि कैथल शहर ऐतिहासिक नगर है। यहां पर्यटन की दृष्टि से अभी तक काम नहीं हो पाया है। कैथल को पर्यटन की दृष्टि से विश्व मानचित्र पर लाए जाने की आवश्यकता है। ताकि दूनिया को यहां छिपे इतिहास के बारे में जानकारी मिल सके।
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