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Kaithal News: महिलाओं ने संतान की उम्र के लिए रखा व्रत
Fri, 25 Oct 2024 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 25 Oct 2024 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/सीवन। जिलेभर में वीरवार को अहोई अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। महिलाओं में काफी उत्साह देखा गया। इस मौके पर सुबह के समय महिलाओं ने जहां पूजा- अर्चना की। इसके बाद शाम को कथा सुनी।
गौरतलब है कि अहोई अष्टमी पर महिलाएं व्रत को रात के समय तारों को देखकर खोलती हैं। श्री हनुमान वाटिका स्थित मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसमें अहोई माता की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी के दिन निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से संतान की लंबी आयु होती है। शर्मा ने बताया कि अहोई माता की पूजा के लिए कहीं कहीं चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए डाले जाते हैं।
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शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर व्रत का संकल्प लेती हैं। वे दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं। पूजा के समय दीवार पर अहोई माता का चित्र या उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है।
उन्होंने बताया दीया जलाया जाता है, और अहोई माता को दूध, फल, मिठाई आदि का प्रसाद अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद महिलाएं अहोई माता की कथा सुनती हैं। शैली मुंजाल ने कहा कि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए रखती हैं।
बाजार में रही रौनक खरीदारी भी की
अहोई अष्टमी के व्रत के साथ वीरवार को पर्व के तहत बाजार में रौनक भी रही। इस दौरान महिलाओं ने शाम के समय की जाने वाली पूजा-अर्चना के लिए पूजन सामग्री भी बाजार में पहुंचकर खरीदी। महिलाओं का कहना था कि अब दिवाली पर्व को महज एक सप्ताह की शेष है। ऐसे में अब बाजारों में पर्व को लेकर रौनक और अधिक बढ़ेगी।
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कैथल/सीवन। जिलेभर में वीरवार को अहोई अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। महिलाओं में काफी उत्साह देखा गया। इस मौके पर सुबह के समय महिलाओं ने जहां पूजा- अर्चना की। इसके बाद शाम को कथा सुनी।
गौरतलब है कि अहोई अष्टमी पर महिलाएं व्रत को रात के समय तारों को देखकर खोलती हैं। श्री हनुमान वाटिका स्थित मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसमें अहोई माता की पूजा की जाती है।
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मान्यता है कि कार्तिक मास की अष्टमी के दिन निर्जला व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से संतान की लंबी आयु होती है। शर्मा ने बताया कि अहोई माता की पूजा के लिए कहीं कहीं चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए डाले जाते हैं।
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शर्मा ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठकर व्रत का संकल्प लेती हैं। वे दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं। पूजा के समय दीवार पर अहोई माता का चित्र या उनकी प्रतिमा स्थापित की जाती है।
उन्होंने बताया दीया जलाया जाता है, और अहोई माता को दूध, फल, मिठाई आदि का प्रसाद अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद महिलाएं अहोई माता की कथा सुनती हैं। शैली मुंजाल ने कहा कि अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु, सुख और समृद्धि के लिए रखती हैं।
बाजार में रही रौनक खरीदारी भी की
अहोई अष्टमी के व्रत के साथ वीरवार को पर्व के तहत बाजार में रौनक भी रही। इस दौरान महिलाओं ने शाम के समय की जाने वाली पूजा-अर्चना के लिए पूजन सामग्री भी बाजार में पहुंचकर खरीदी। महिलाओं का कहना था कि अब दिवाली पर्व को महज एक सप्ताह की शेष है। ऐसे में अब बाजारों में पर्व को लेकर रौनक और अधिक बढ़ेगी।