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गेहूं बिजाई कार्य शुरू, अगेती 10 तक करने की सलाह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 01:42 AM IST
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Wheat sowing work started, advice to be done till early 10
कैथल। धान कटाई के बाद अब गेहूं बिजाई का कार्य शुरू हो गया है। पहले चरण में 10 नवंबर, दूसरा चरण 11 नवंबर से 25 नवंबर और तीसरे चरण में 26 नवंबर से 25 दिसंबर तक गेहूं की बिजाई के लिए उपयोगी है। गेहूं की बिजाई के लिए सबसे पहले खेत को अच्छी तरह से तैयार किया जाना जरूरी है। सही तापमान में बीजों का अंकुरण सही रहता है। गेहूं की बिजाई के लिए किसान हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। इन कृषि यंत्रों की मदद से बीज को सही मात्रा में उचित गहराई पर छोड़ा जाता है, जिससे अंकुरण सही रहता है।
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वर्तमान मौसम और सही तरीके से बिजाई करने पर गेहूं का उत्पादन बेहतर रहता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की सुविधा के लिए गेहूं बिजाई के लिए तीन चरणों में बांटा है। इन तीनों चरणों के लिए अलग-अलग उचित उपचार के बाद बिजाई करने की सलाह दी है। गेहूं की बिजाई के समय खेत की मिट्टी में नमी होना जरूरी है। इसके साथ ही तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहना चाहिए। जिले में बिजाई के लिए 1.70 लाख हेक्टेयर में गेहूं बिजाई का लक्ष्य है।
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इन बीजों का करें बिजाई
कृषि विशेषज्ञों की ओर से एचडी-3086, एचडी 2967, डब्ल्यूएच 542, यूपी 2338, एचडी 2687, डब्लयूएच 1105 और देसी गेहूं सी-306 की बिजाई की जा सकती है। 11 से 25 नवंबर तक डब्ल्यूएच 542, डब्ल्यूएच 711, डब्ल्यूएच 283, डब्ल्यूएच 416 किस्म की बिजाई सही रहती है। 25 नवंबर से 25 दिसंबर तक पछेती किस्म एचडी 2851, यूपी 2338, आरएजे 3765, पीबीडब्ल्यू 373, आरएजे 3077 की बिजाई की जा सकती है। पहले दो चरणों में 40 किलोग्राम प्रति एकड़ और तीसरे चरण में 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज डालना जरूरी है।
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उचित विधि से बीज उपचार जरूरी
कृषि विभाग के उप मंडल अधिकारी सतीश नारा ने कहा की बिजाई से पहले गेहूं का बीज का उपचार किया जाना जरूरी है। बीज जनित रोगों से बचाव के लिए बीजों को दो ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बावस्टीन और वीटावैक्स से उपचारित करें। दीमक से बचाने के लिए क्लोरोपायरीफॉस 1.5 मिली, प्रति किलोग्राम से बीच को उपचारित करें।

कृषि उपनिदेशक कर्मचंद का कहना है कि गेहूं की पहली सिंचाई पर 60 से 65 किलो यूरिया प्रति एकड़ डालना चाहिए। रेतीली भूमि में यूरिया को दो बार पहली और दूसरी सिंचाई पर डालना अच्छा रहता है। उर्वरक मिट्टी जांच के आधार पर ही डालनी चाहिए। पछेती बिजाई की गई गेहूं की पहली सिंचाई तीन सप्ताह के बजाय चार सप्ताह बाद करनी चाहिए। बाद की सिंचाई मध्य फरवरी तक 25 से 30 दिन बाद तथा उसके बाद 20 दिन के अंतर पर सिंचाई करें। भूमि में नमी बनाए रखने तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई, गुड़ाई व खरपतवार नाशक दवाओं का प्रयोग कर सकते हैं। कनकी, मंडसी व जंगली जई खरपतवार की रोकथाम के लिए क्लोडिनाफॉप 15 फीसद 160 ग्राम प्रति एकड़ बिजाई के 30-35 दिन बाद 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें।
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