फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Three mont jail under PNDT act

बेटा होने की दवा देने वाले को तीन माह की सजा

Thu, 14 Jan 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल Updated Thu, 14 Jan 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
बेटा होने की दवा देने के आरोपी को अदालत ने तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है। इस तरह के मामले में प्रदेश का यह संभवत: पहला मामला है। जिसमें बेटा होने की दवा देने के मामले में किसी को सजा हुई है। जून माह में कैथल स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यह छापेमार कार्रवाई की थी। जिसमें अदालत ने आरोपी को 1 हजार रुपये जुर्माने की भी सजा सुनाई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने अब तक प्रदेश में सर्वाधिक 11 मामले दर्ज करवाए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 27 जून को डा. बीबी कक्कड़ के नेतृत्व में छापेमार कार्रवाई की थी। जिसमें गांव बीरबांगड़ा निवासी बिजेंद्र सिंह के प्रतिष्ठान पर एक महिला को बेटा होने की दवा देने की सूचना के बाद छापा मारा गया था। हालांकि बिजेंद्र सिंह मौके से फरार हो गया था।
विज्ञापन


लेकिन बाद में इस मामले में पुलिस ने बिजेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था। जिसमें पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया था। मामले में छह माह में ही सुनवाई करते हुए अदालत ने आरोपी बिजेंद्र शर्मा को पीएनडीटी एक्ट के तहत दोषी करार दिया। जिसमें तीन माह के कारावास एवं 1 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। छापेमार दल में  बीसीए सुनील दहिया, राजेश कुमार, डीपीएम नरेंद्र राणा भी शामिल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुनिया में कोई दवा नहीं बदल सकती लिंग
सीएमओ डा. वंदना भाटिया ने बताया कि दूनिया में ऐसी कोई दवा नहीं है। जिससे लिंग निर्धारण होने के बाद बदला जा सके। कुछ लोग इस तरह के भ्रम फैला कर लोगों को गुमराह करते हैं तथा अपना उल्लू सीधा करते हैं। उन्होंने कहा कि बेटा होने की देने पर सजा का संभवत: यह पहला मामला है।

अज्ञानता के कारण अपना ही नुकसान करते हैं अभिभावक
सीएमओ डा. वंदना भाटिया का कहना है कि अभिभावक बेटा होने की दवा लेकर अनजाने में अपना ही नुकसान करते हैं। क्योंकि दवा के नाम पर कुछ लोग पुरुष हार्मोंस देते हैं। जिसमें सीईओड नामक दवा होती है। इससे यदि होने बच्चे को काफी परेशानी होती है। उसके अंग भंग हो सकते हैं। मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा बाल मृत्यु दर का भी यह एक बड़ा कारण है। इसलिए लोग किसी के बहकावे में न आएं।


अब तक दर्ज हुए हैं 11 मामले

सीएमओ ने बताया कि अब तक बेटा होने की दवा देने एवं अल्ट्रासाउंड के माध्यम से लिंग की पहचान बताने के मामले में 11 एफआईआर दर्ज करवाई गई हैं। जो अब तक प्रदेश में सर्वाधिक हैं। विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed