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Kaithal News: मेले में पहुंचे हजारों श्रद्धालु, मांगी सुख-समृदि्ध
Tue, 15 Oct 2024 03:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 15 Oct 2024 03:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बाबा लदाना गांव में डेरा बाबा राजपुरी मठ पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का सोमवार को समापन हो गया। मेले के आखिरी दिन महिलाओं और बच्चों ने विशेष बच्चों ने पूजा-अर्चना कर समृदि्ध मांगी। डेरा प्रबंधन ने दावा किया कि तीन दिन के मेले में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर पूजा की।
मठ पर सुबह से ही बाबा राजपुरी के धूने पर माथा टेकने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने। इसी दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन वृद्धि की कामना की। इस तीन दिवसीय मेलक्षे में लगभग सौ क्विंटल दूध श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाया गया। अंतिम दिन भी महिलाओं व बच्चों ने मेले में जमकर खरीदारी की।
डेरे के महंत दूजपुरी ने बताया कि इस बार मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इसमें जिला प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा है। मेले के दौरान जो दूध श्रद्धालुओं ने चढ़ाया था, उसे जरूरतमंदों में बांट दिया गया था।
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श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में खीर बनाई गई थी। मेले के अंतिम दिन प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी संत पहुंचे थे। तीन दिन में डेरे में दूध के साथ करीब डेढ़ क्विंटल अनाज भी पहुंचा है। इस मौके पर महिलाओं और बच्चों ने खरीदारी भी की।
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कैथल। बाबा लदाना गांव में डेरा बाबा राजपुरी मठ पर आयोजित तीन दिवसीय मेले का सोमवार को समापन हो गया। मेले के आखिरी दिन महिलाओं और बच्चों ने विशेष बच्चों ने पूजा-अर्चना कर समृदि्ध मांगी। डेरा प्रबंधन ने दावा किया कि तीन दिन के मेले में पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंचकर पूजा की।
मठ पर सुबह से ही बाबा राजपुरी के धूने पर माथा टेकने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने। इसी दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर प्रसाद चढ़ाकर धन-धान्य और पशुधन वृद्धि की कामना की। इस तीन दिवसीय मेलक्षे में लगभग सौ क्विंटल दूध श्रद्धालुओं की तरफ से चढ़ाया गया। अंतिम दिन भी महिलाओं व बच्चों ने मेले में जमकर खरीदारी की।
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डेरे के महंत दूजपुरी ने बताया कि इस बार मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इसमें जिला प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा है। मेले के दौरान जो दूध श्रद्धालुओं ने चढ़ाया था, उसे जरूरतमंदों में बांट दिया गया था।
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श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में खीर बनाई गई थी। मेले के अंतिम दिन प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी संत पहुंचे थे। तीन दिन में डेरे में दूध के साथ करीब डेढ़ क्विंटल अनाज भी पहुंचा है। इस मौके पर महिलाओं और बच्चों ने खरीदारी भी की।