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प्रभु के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए : संत छवि रामदास
Fri, 13 Sep 2024 02:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 13 Sep 2024 02:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। प्रमुख कथावाचक संत छविराम दास ने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर छवि राम दास ने कहा कि प्रभु के प्रति हमारे जीवन में पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा एक ऐसी भावना है जो हमें प्रभु की ओर से मिलने वाले आशीर्वाद और सुख-दुख में संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ केवल आस्था से नहीं, बल्कि पूरी निष्ठा और समर्पण से है। जब हम प्रभु के प्रति पूरी श्रद्धा रखते हैं, तो हमारे भीतर आत्मविश्वास और सहनशीलता का विकास होता है।
संत छविराम दास ने धार्मिक विचार व्यक्त करते हुए कहे। संत ने कहा कि श्रद्धा हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की शिक्षा देती है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन भगवान में श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने आपको स्थिर और संयमित बनाए रखता है। प्रभु के प्रति श्रद्धा रखने का अर्थ यह भी है कि हम उनकी मर्जी को समझने और उसे स्वीकार करने की क्षमता विकसित करते हैं। संत छवि रामदास ने कहा कि श्रद्धा वह मार्ग है जो हमें आत्मिक उन्नति और शांति की ओर ले जाता है। इसके बिना जीवन में स्थिरता और संतोष का अभाव रहता है। श्रद्धा से ही हमें सच्चा आत्मज्ञान प्राप्त होता है और हम अपने जीवन के असली उद्देश्य को समझ पाते हैं। संत ने कहा कि प्रभु पर श्रद्धा रखने से हम अपनी इच्छाओं, क्रोध और अज्ञानता पर नियंत्रण पा सकते हैं।
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इस अवसर पर भीषू चौधरी, भीम मेहता, सुभाष रहेजा, अशोक कथूरिया, मोहित गोयल, सुभाष गर्ग मौजूद रहे।
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सीवन। प्रमुख कथावाचक संत छविराम दास ने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर छवि राम दास ने कहा कि प्रभु के प्रति हमारे जीवन में पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा एक ऐसी भावना है जो हमें प्रभु की ओर से मिलने वाले आशीर्वाद और सुख-दुख में संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा का अर्थ केवल आस्था से नहीं, बल्कि पूरी निष्ठा और समर्पण से है। जब हम प्रभु के प्रति पूरी श्रद्धा रखते हैं, तो हमारे भीतर आत्मविश्वास और सहनशीलता का विकास होता है।
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संत छविराम दास ने धार्मिक विचार व्यक्त करते हुए कहे। संत ने कहा कि श्रद्धा हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने की शिक्षा देती है। जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन भगवान में श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति हर परिस्थिति में अपने आपको स्थिर और संयमित बनाए रखता है। प्रभु के प्रति श्रद्धा रखने का अर्थ यह भी है कि हम उनकी मर्जी को समझने और उसे स्वीकार करने की क्षमता विकसित करते हैं। संत छवि रामदास ने कहा कि श्रद्धा वह मार्ग है जो हमें आत्मिक उन्नति और शांति की ओर ले जाता है। इसके बिना जीवन में स्थिरता और संतोष का अभाव रहता है। श्रद्धा से ही हमें सच्चा आत्मज्ञान प्राप्त होता है और हम अपने जीवन के असली उद्देश्य को समझ पाते हैं। संत ने कहा कि प्रभु पर श्रद्धा रखने से हम अपनी इच्छाओं, क्रोध और अज्ञानता पर नियंत्रण पा सकते हैं।
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इस अवसर पर भीषू चौधरी, भीम मेहता, सुभाष रहेजा, अशोक कथूरिया, मोहित गोयल, सुभाष गर्ग मौजूद रहे।