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महज एक ही मतदाता है कलायत के खंडालवा गांव में

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Oct 2022 01:33 AM IST
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There is only one voter in Khandalwa village of Kalayat
43-कलायत। बेचिराग गांव खडालवा का ऐतिहासिक शिव मंदिर - फोटो : Kaithal
कलायत। खंड मुख्यालय से सात किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव खंडालवा की पहचान राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार बेचिराग गांव के रूप में है। इस गांव के नाम से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, डाकघर व पटवारी भी अलग से है, लेकिन इसके नाम से पंचायत नहीं है। इसे मटौर गांव की पंचायत से जोड़ा गया है। यहां पर एक प्राचीन शिव मंदिर है जिसमें कुल चार संत रहते हैं। ग्राम पंचायत के पिछले चुनाव में यहां तीन वोट थे। महंत गिरिजा गिरी व घनश्याम गिरी का देहावसान हो जाने से दो वोट समाप्त हो गए। इस समय गांव खंडालवा की ओर से पंचायत चुनावों के लिए लाल गिरी महाराज केवल एक ही मतदाता है। संत लाल गिरी ने बताया कि खंडालवा मटौर पंचायत में आता है और उनका वोट भी मटौर गांव में डलेगा।
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गौरतलब है कि खंडालवा स्थित शिवधाम पर प्राचीन शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। यहां कई किलोमीटर की दूरी तय कर महाशिवरात्रि के दिन लोग पूजा के लिए पहुंचते हैं। मंदिर एक टीले के ऊपर बना हुआ है और खुदाई के दौरान प्राचीन सिक्के, टूटे बर्तन, मूर्तियां आदि मिल चुकी हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां किसी समय में कोई विकसित संस्कृति रही होगी, जो बाद में विलुप्त हो गई।
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पुराणों के अनुसार, इस मंदिर का संबंध भगवान राम के पूर्वज राजा खट्वांग से है। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम से 10 पीढ़ी पूर्व हुए उनके अग्रज राजा खट्वांग ने राजकाज त्याग कर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान ने इस स्थान पर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद यहां भगवान शिव का शिवलिंग उत्पन्न हुआ। बाद में इस मंदिर का महाराजा पटियाला ने जीर्णोद्धार कराया था। वर्ष 1987 में महंत पुरुषोत्तम गिरी व बाबा रामगिरी के प्रयासों से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। पुरुषोतम गिरी के शरीर छोड़ देने के बाद गिरिजा गिरी ने महंती संभाली उनके बाद घनश्याम गिरी महंत बने। दोनों के शरीर छोड़ देने के बाद इस समय महंत रघुनाथ गिरी हैं पर उनका वोट नहीं है।
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