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विदेशों में खुशबू बिखेरने वाली बासमती की कीमत में नहीं दिख रही चमक
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There is no brightness in the price of Basmati, which spreads fragrance abroad
- फोटो : Kaithal
फ विदेशों में भारतीय चावल की पहचान परंपरागत बासमती की कीमतों के 4000 से 5000 रुपये तक प्रति क्विंटल रहने की उम्मीदों को झटका लगा है। यह अधिकतम 3900 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। कई मंडियों में किसान खरीदार का इंतजार भी कर रहे हैं। जबकि जिस तरह से बाकि किस्मों की कीमतें मिल रही थीं, उससे देखते हुए इसके 4000 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकने की उम्मीदें थीं।
किसान मनोज कुमार रोहेड़ियां ने कहा कि पिछले साल बासमती 4500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। इस बार जिस तरह से 1121 व अन्य किस्मों की कीमतें मिली हैं, उसे देखते हुए परंपरागत बासमती की कीमतें 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहने की उम्मीदें थीं। लेकिन यह इस बार 1121 के बराबर बिक रही है। 1121 अधिकतम 3800 रुपये बिक चुकी है। जबकि परंपरागत बासमती महज 3900 रुपये प्रति क्विंटल बिकी है। या फिर इसके ग्राहक ही नहीं है। जो बासमती जैसी अंतरराष्ट्रीय फसल के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग ने कहा कि इस मंडी में धान की आवक कम है। यहां अधिकतम 3500 से 3600 रुपये तक ही अधिकतम कीमतें मिल रही हैं। ग्राहक व आवक दोनों ही कम हैं। इसी कारण कीमतें भी कम हैं।
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बासमती के एक-दो ग्राहकों के कारण ही कीमतें कम हैं। यह एक्सपोर्ट होता है। एक-दो ग्राहक इसीलिए खरीद रहे हैं कि आगे किसान बासमती का उत्पादन ही बंद न कर दें। विदेशों में अभी कोई बड़ी मांग नहीं है। लेकिन निर्यात की दृष्टि से एक-दो ग्राहक ही खरीद रहे हैं। पहले कीमतें ज्यादा रहने की उम्मीद थी। लेकिन अब कीमतें अधिकतम 3900 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही हैं। कंबाइन के लिए 3600 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल ही कीमतें मिल रही हैं। इस धान की स्थानीय डिमांड न के बराबर है। जो है, वह विदेशों में है। विदेशों में निर्यात के लिए भी गिने-चुने खरीदार हैं। -नरेंद्र मिगलानी, निर्यातक
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किसान मनोज कुमार रोहेड़ियां ने कहा कि पिछले साल बासमती 4500 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी। इस बार जिस तरह से 1121 व अन्य किस्मों की कीमतें मिली हैं, उसे देखते हुए परंपरागत बासमती की कीमतें 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहने की उम्मीदें थीं। लेकिन यह इस बार 1121 के बराबर बिक रही है। 1121 अधिकतम 3800 रुपये बिक चुकी है। जबकि परंपरागत बासमती महज 3900 रुपये प्रति क्विंटल बिकी है। या फिर इसके ग्राहक ही नहीं है। जो बासमती जैसी अंतरराष्ट्रीय फसल के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
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नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम लाल गर्ग ने कहा कि इस मंडी में धान की आवक कम है। यहां अधिकतम 3500 से 3600 रुपये तक ही अधिकतम कीमतें मिल रही हैं। ग्राहक व आवक दोनों ही कम हैं। इसी कारण कीमतें भी कम हैं।
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बासमती के एक-दो ग्राहकों के कारण ही कीमतें कम हैं। यह एक्सपोर्ट होता है। एक-दो ग्राहक इसीलिए खरीद रहे हैं कि आगे किसान बासमती का उत्पादन ही बंद न कर दें। विदेशों में अभी कोई बड़ी मांग नहीं है। लेकिन निर्यात की दृष्टि से एक-दो ग्राहक ही खरीद रहे हैं। पहले कीमतें ज्यादा रहने की उम्मीद थी। लेकिन अब कीमतें अधिकतम 3900 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही हैं। कंबाइन के लिए 3600 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल ही कीमतें मिल रही हैं। इस धान की स्थानीय डिमांड न के बराबर है। जो है, वह विदेशों में है। विदेशों में निर्यात के लिए भी गिने-चुने खरीदार हैं। -नरेंद्र मिगलानी, निर्यातक