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Kaithal News: कबूतरखाना बना 277 ग्राम पंचायतों को बोझ उठाने वाली जिला परिषद का भवन
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कबूतर की बींटों से अटा जिला परिषद भवन परिसर। संवाद
कैथल। जिले की सभी 277 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी उठाने वाली जिला परिषद का भवन कबूतरखाना बना हुआ है। पूरा परिसर कबूतर की बीटों से अटा पड़ा है। भवन की दीवारों से पेंट के बाद अब धीरे-धीरे सीमेंट भी उतर चुकी है। कार्यालय में गंदगी ही गंदगी है। भवन के शौचालयों की सफाई नहीं कराई गई है। हालात ये हैं कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का संदेश देना वाला बैनर भी गंदगी से बुरी तरह अटा पड़ा है।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सीईओ डिप्टी सीईओ समेत सभी अधिकारी भी यहीं बैठते हैं। यही पदाधिकारी व अधिकारी पार्षदों के माध्यम से पूरे जिले की ग्राम पंचायतों को ग्रांट बांटने का काम भी करते हैं। हर वर्ष करीब 20 करोड़ रुपये के काम पंचायतों में करवाते हैं।
भवन में कई विभागों के कार्यालय
जिला परिषद भवन में सीईओ, डिप्टी सीईओ के साथ-साथ एक्सईएन पंचायती राज, सहायक कृषि अभियंता व राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण व शहरी के कार्यालय मौजूद हैं। इनमें काफी संख्या इसके अलावा जिला परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के कार्यालय भी यहीं पर हैं और पार्षदों की बजट मीटिंग भी वर्ष में कई बार इसी भवन में होती है।
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बेकार पड़ी है 4.2 एकड़ भूमि
जिला परिषद परिसर 4 एकड़ 2 कनाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें से करीब 4 एकड़ एरिया तो खाली ही पड़ा है जिसमें घास और गंदगी उगी हुई है। हालांकि इसमें पहले अवैध कब्जे भी थे जिनको हटवाया गया था लेकिन उसके बावजूद जिला परिषद इस एरिया का इस्तेमाल नहीं कर सका।
41 लाख का एस्टीमेट तैयार, जल्द लगाएंगे टेंडर : सीईओ
जिला परिषद के भवन की हालत से वे वाकिफ हैं। भवन के बीच में जो खाली एरिया है, उसका जाल टूटा होने से कबूतर अंदर आते हैं। जाल लगवाने, पूरे परिसर का रंग रोगन करवाने के साथ ही शौचालयों की रिपेयर के लिए 41 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। जल्द ही इसका टेंडर भी कर दिया जाएगा। पीछे खाली पड़ी जमीन को भी पार्क में रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और वाहनों की पार्किंग के लिए शेड का निर्माण भी किया जाएगा।
- सुरेश राविश, कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, कैथल।
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जिले की सभी ग्राम पंचायतों के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सीईओ डिप्टी सीईओ समेत सभी अधिकारी भी यहीं बैठते हैं। यही पदाधिकारी व अधिकारी पार्षदों के माध्यम से पूरे जिले की ग्राम पंचायतों को ग्रांट बांटने का काम भी करते हैं। हर वर्ष करीब 20 करोड़ रुपये के काम पंचायतों में करवाते हैं।
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भवन में कई विभागों के कार्यालय
जिला परिषद भवन में सीईओ, डिप्टी सीईओ के साथ-साथ एक्सईएन पंचायती राज, सहायक कृषि अभियंता व राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण व शहरी के कार्यालय मौजूद हैं। इनमें काफी संख्या इसके अलावा जिला परिषद के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के कार्यालय भी यहीं पर हैं और पार्षदों की बजट मीटिंग भी वर्ष में कई बार इसी भवन में होती है।
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बेकार पड़ी है 4.2 एकड़ भूमि
जिला परिषद परिसर 4 एकड़ 2 कनाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें से करीब 4 एकड़ एरिया तो खाली ही पड़ा है जिसमें घास और गंदगी उगी हुई है। हालांकि इसमें पहले अवैध कब्जे भी थे जिनको हटवाया गया था लेकिन उसके बावजूद जिला परिषद इस एरिया का इस्तेमाल नहीं कर सका।
41 लाख का एस्टीमेट तैयार, जल्द लगाएंगे टेंडर : सीईओ
जिला परिषद के भवन की हालत से वे वाकिफ हैं। भवन के बीच में जो खाली एरिया है, उसका जाल टूटा होने से कबूतर अंदर आते हैं। जाल लगवाने, पूरे परिसर का रंग रोगन करवाने के साथ ही शौचालयों की रिपेयर के लिए 41 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। जल्द ही इसका टेंडर भी कर दिया जाएगा। पीछे खाली पड़ी जमीन को भी पार्क में रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और वाहनों की पार्किंग के लिए शेड का निर्माण भी किया जाएगा।
- सुरेश राविश, कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, कैथल।

कबूतर की बींटों से अटा जिला परिषद भवन परिसर। संवाद

कबूतर की बींटों से अटा जिला परिषद भवन परिसर। संवाद