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Kaithal News: छात्राओं ने किया शौर्य-बलिदान का स्मरण
Sat, 27 Dec 2025 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 27 Dec 2025 01:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलायत (2180) के प्रांगण में वीर बाल दिवस एवं शहीद उधम सिंह जयंती के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान पेंटिंग, निबंध लेखन, भाषण, स्लोगन, स्किट, क्विज और कविता पाठ जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से वीर शहीदों को नमन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेन्द्र कुमार ने की। कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए विश्व प्रताप सिंह ने कहा कि 26 दिसंबर के दिन मुगल शासक सरहिंद के नवाब वजीर खान ने दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र वीर जोरावर सिंह और वीर फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चिनवा दिया था। उनका यह त्याग, बलिदान और अदम्य साहस भारतीय इतिहास में अनुपम उदाहरण है। इसी महान बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों को दीवार में चिनाने की घटना भारतीय इतिहास की सबसे हृदय विदारक घटनाओं में से एक है। अपने पोतों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
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भारत सरकार ने वर्ष 2022 में यह घोषणा की कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिवस की मुख्य थीम साहस, एकजुटता और मानवता की रक्षा के लिए समर्पण पर केंद्रित है। कार्यक्रम में प्रदीप ढांडा, बृजपाल राणा, नरेश कुमार, सुमन देवी, रमन देवी सहित अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे।
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कलायत। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलायत (2180) के प्रांगण में वीर बाल दिवस एवं शहीद उधम सिंह जयंती के उपलक्ष्य में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान पेंटिंग, निबंध लेखन, भाषण, स्लोगन, स्किट, क्विज और कविता पाठ जैसी प्रतियोगिताओं के माध्यम से वीर शहीदों को नमन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेन्द्र कुमार ने की। कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए विश्व प्रताप सिंह ने कहा कि 26 दिसंबर के दिन मुगल शासक सरहिंद के नवाब वजीर खान ने दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र वीर जोरावर सिंह और वीर फतेह सिंह को दीवार में जिंदा चिनवा दिया था। उनका यह त्याग, बलिदान और अदम्य साहस भारतीय इतिहास में अनुपम उदाहरण है। इसी महान बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है।
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उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों को दीवार में चिनाने की घटना भारतीय इतिहास की सबसे हृदय विदारक घटनाओं में से एक है। अपने पोतों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
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भारत सरकार ने वर्ष 2022 में यह घोषणा की कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिवस की मुख्य थीम साहस, एकजुटता और मानवता की रक्षा के लिए समर्पण पर केंद्रित है। कार्यक्रम में प्रदीप ढांडा, बृजपाल राणा, नरेश कुमार, सुमन देवी, रमन देवी सहित अन्य अध्यापकगण उपस्थित रहे।