{"_id":"68910dc21d3e3e800604bb0b","slug":"the-student-won-the-battle-for-her-mothers-name-in-court-kaithal-news-c-18-1-knl1004-708328-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: छात्रा ने कोर्ट से जीती मां के नाम की जंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: छात्रा ने कोर्ट से जीती मां के नाम की जंग
Tue, 05 Aug 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:15 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के गांव धनौरी की एक युवती ने कोर्ट के माध्यम से अपनी मां के नाम को शैक्षणिक दस्तावेजों में सही करवाने की लड़ाई जीत ली है। युवती मंजू की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व केंद्रीय विद्यालय संगठन के सचिवों को मां का नाम गुरमीत की बजाय गुरमीत देवी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
मंजू ने अदालत को बताया कि वर्ष 2022 में उसने माध्यमिक (10वीं) और मई 2024 में उच्च माध्यमिक (12वीं) परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन दोनों प्रमाणपत्रों में उसकी मां का नाम केवल गुरमीत लिखा गया, जबकि उनका पूर्ण नाम गुरमीत देवी है। मंजू ने दावा किया कि यह त्रुटि स्कूल और बोर्ड की लिपिकीय गलती के कारण हुई, जबकि उसके परिवार द्वारा सही जानकारी समय रहते दी गई थी। युवती ने बताया कि जब दस्तावेजों में गलती का पता चला, तो उसने संबंधित बोर्ड अधिकारियों से संपर्क कर सुधार की मांग की, लेकिन दोनों बोर्ड ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए सुधार से इनकार कर दिया। इसके बाद मंजू ने जनवरी 2025 में अपने पिता के माध्यम से सिविल कोर्ट का रुख किया।
अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर न्यायाधीश डॉ. अमन इंद्र सिंह ने माना कि यह गलती लिपिकीय है, जिसे वादी की ओर से समय पर इंगित किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि नाम की यह त्रुटि छात्रा के भविष्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है और इसे ठीक किया जाना आवश्यक है।
विज्ञापन
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान स्कूल द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर विवरण तैयार किया जाता है, और उस पर विद्यार्थी का हस्ताक्षर भी लिया जाता है। ऐसे में गलती का उत्तरदायित्व स्कूल और बोर्ड दोनों पर आता है।
प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोर्ट में पेश न होने पर 21 मार्च को एकपक्षीय सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया और दोनों बोर्ड सचिवों को नाम सुधार की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
कैथल। जिले के गांव धनौरी की एक युवती ने कोर्ट के माध्यम से अपनी मां के नाम को शैक्षणिक दस्तावेजों में सही करवाने की लड़ाई जीत ली है। युवती मंजू की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व केंद्रीय विद्यालय संगठन के सचिवों को मां का नाम गुरमीत की बजाय गुरमीत देवी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
मंजू ने अदालत को बताया कि वर्ष 2022 में उसने माध्यमिक (10वीं) और मई 2024 में उच्च माध्यमिक (12वीं) परीक्षा उत्तीर्ण की थी, लेकिन दोनों प्रमाणपत्रों में उसकी मां का नाम केवल गुरमीत लिखा गया, जबकि उनका पूर्ण नाम गुरमीत देवी है। मंजू ने दावा किया कि यह त्रुटि स्कूल और बोर्ड की लिपिकीय गलती के कारण हुई, जबकि उसके परिवार द्वारा सही जानकारी समय रहते दी गई थी। युवती ने बताया कि जब दस्तावेजों में गलती का पता चला, तो उसने संबंधित बोर्ड अधिकारियों से संपर्क कर सुधार की मांग की, लेकिन दोनों बोर्ड ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए सुधार से इनकार कर दिया। इसके बाद मंजू ने जनवरी 2025 में अपने पिता के माध्यम से सिविल कोर्ट का रुख किया।
विज्ञापन
अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर न्यायाधीश डॉ. अमन इंद्र सिंह ने माना कि यह गलती लिपिकीय है, जिसे वादी की ओर से समय पर इंगित किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि नाम की यह त्रुटि छात्रा के भविष्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है और इसे ठीक किया जाना आवश्यक है।
विज्ञापन
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान स्कूल द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर विवरण तैयार किया जाता है, और उस पर विद्यार्थी का हस्ताक्षर भी लिया जाता है। ऐसे में गलती का उत्तरदायित्व स्कूल और बोर्ड दोनों पर आता है।
प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोर्ट में पेश न होने पर 21 मार्च को एकपक्षीय सुनवाई करते हुए अदालत ने यह फैसला सुनाया और दोनों बोर्ड सचिवों को नाम सुधार की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए।