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Kaithal News: गवाही से बचने वाले एसएचओ को अदालत ने हवालात में डाला
Fri, 12 Sep 2025 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:06 AM IST
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12 कैथल। जिला न्यायिक परिसर में बने लॉकअप में रखे गए इंस्पेक्टर राजेश कुमार। सोशल मीडिया
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला न्यायालय में वीरवार को एक अनोखा मामला सामने आया। अदालत ने हत्या के केस में बार-बार गैरहाजिर रहने पर जांच अधिकारी रहे पूर्व थाना प्रभारी राजेश कुमार (वर्तमान में थाना प्रभारी, बड़ागुढा, सिरसा) को एक घंटे की सजा सुनाई। सजा के दौरान उन्हें कोर्ट परिसर में बने बंदियों के लॉकअप में रखा गया।
अदालत का यह आदेश सुनते ही मौजूद पुलिस कर्मी हैरान रह गए। कोर्ट से लिखित आदेश आने तक एसएचओ को लॉकअप में ही रखा गया। वहीं, जब तक कोर्ट से लिखित आदेश नहीं आया, तब तक उनको सजा के दौरान बंदियों के लिए बनाए गए कैथल कोर्ट के लॉकअप में ही रखा गया।
यह मामला 2021 में सीवन थाना क्षेत्र के ककहेड़ी गांव में हुई हत्या से जुड़ा है। मनीष नामक युवक की हत्या में शिकायतकर्ता चाचा राजवीर सिंह ने अपने भतीजे की हत्या का केस दर्ज करवाया था। उस समय सीवन थाने में राजेश कुमार थाना प्रभारी थे और वे इस मामले की जांच कर रहे थे। बाद में उनका तबादला सिरसा जिले में हो गया था। हालांकि, गवाही के लिए उन्हें कई बार कैथल कोर्ट में बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए, जिसके चलते अदालत को सख्त कदम उठाना पड़ा।
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इंस्पेक्टर पिछली तीन-चार पेशियों से कोर्ट में गवाही देने के लिए नहीं आ रहे थे। इस संबंध में शुरुआती पेशियों में उनको जमानती वारंट जारी किए गए। उसके बाद भी जब एसएचओ कोर्ट में नहीं पहुंचे तो फिर उनके खिलाफ 29 अगस्त को गैर जमानती वारंट जारी कर दिए गए। जिसमें उन्हें 11 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया था। बार-बार आदेश जारी करने के बाद भी जब एसएचओ कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो कोर्ट ने इनकी सैलरी अटैच करने के आदेश जारी कर दिए, साथ ही
कैथल के एसपी को निर्देश जारी किए गए कि एसएचओ को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए, जिसके बाद आज वो कोर्ट में पहुंचे, लेकिन कोर्ट में पहुंचते ही उन्हें लॉकअप में बंद करने के आदेश दे दिए गए।
इंस्पेक्टर राजेश कुमार वीरवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे कोर्ट में पहुंचे। इस दौरान न्यायाधीश ने उन्हें हिरासत में लेने के आदेश दे दिए। आदेश में कहा कि गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद और सैलरी अटैच होने के बाद इंस्पेक्टर कोर्ट में पहुंचे हैं। अभी कोर्ट किसी और केस में व्यस्त है इसलिए इंस्पेक्टर राजेश को कस्टडी में रखा जाए और 11:30 बजे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाए। तब तक कोर्ट परिसर में बंदियों के लिए बने कमरे में रखा।
प्रिजनर एस्कॉर्ट इंचार्ज सुरेश कुमार ने बताया कि शुरुआत में मौखिक आदेश के आधार पर एचएचओ को लॉकअप में भेजा गया। करीब एक घंटे बाद जब लिखित आदेश मिला, तब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। गवाही के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
हत्या के मामले में अभी तक लग चुकीं 48 तारीखें
हत्या के इस पूरे मामले में अभी तक 48 तारीखें लग चुकी हैं। गौरव के परिजनों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसपर 10 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और इस केस को 10 जून 2025 तक निपटाने के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि स्थानीय न्यायालय में एडिशनल सेशन जज विवेक यादव के छुट्टी पर जाने की वजह से यह केस चार जून को मोहित अग्रवाल की न्यायालय में ट्रांसफर किया गया था।
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कैथल। जिला न्यायालय में वीरवार को एक अनोखा मामला सामने आया। अदालत ने हत्या के केस में बार-बार गैरहाजिर रहने पर जांच अधिकारी रहे पूर्व थाना प्रभारी राजेश कुमार (वर्तमान में थाना प्रभारी, बड़ागुढा, सिरसा) को एक घंटे की सजा सुनाई। सजा के दौरान उन्हें कोर्ट परिसर में बने बंदियों के लॉकअप में रखा गया।
अदालत का यह आदेश सुनते ही मौजूद पुलिस कर्मी हैरान रह गए। कोर्ट से लिखित आदेश आने तक एसएचओ को लॉकअप में ही रखा गया। वहीं, जब तक कोर्ट से लिखित आदेश नहीं आया, तब तक उनको सजा के दौरान बंदियों के लिए बनाए गए कैथल कोर्ट के लॉकअप में ही रखा गया।
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यह मामला 2021 में सीवन थाना क्षेत्र के ककहेड़ी गांव में हुई हत्या से जुड़ा है। मनीष नामक युवक की हत्या में शिकायतकर्ता चाचा राजवीर सिंह ने अपने भतीजे की हत्या का केस दर्ज करवाया था। उस समय सीवन थाने में राजेश कुमार थाना प्रभारी थे और वे इस मामले की जांच कर रहे थे। बाद में उनका तबादला सिरसा जिले में हो गया था। हालांकि, गवाही के लिए उन्हें कई बार कैथल कोर्ट में बुलाया गया, लेकिन वे पेश नहीं हुए, जिसके चलते अदालत को सख्त कदम उठाना पड़ा।
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इंस्पेक्टर पिछली तीन-चार पेशियों से कोर्ट में गवाही देने के लिए नहीं आ रहे थे। इस संबंध में शुरुआती पेशियों में उनको जमानती वारंट जारी किए गए। उसके बाद भी जब एसएचओ कोर्ट में नहीं पहुंचे तो फिर उनके खिलाफ 29 अगस्त को गैर जमानती वारंट जारी कर दिए गए। जिसमें उन्हें 11 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया था। बार-बार आदेश जारी करने के बाद भी जब एसएचओ कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो कोर्ट ने इनकी सैलरी अटैच करने के आदेश जारी कर दिए, साथ ही
कैथल के एसपी को निर्देश जारी किए गए कि एसएचओ को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए, जिसके बाद आज वो कोर्ट में पहुंचे, लेकिन कोर्ट में पहुंचते ही उन्हें लॉकअप में बंद करने के आदेश दे दिए गए।
इंस्पेक्टर राजेश कुमार वीरवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे कोर्ट में पहुंचे। इस दौरान न्यायाधीश ने उन्हें हिरासत में लेने के आदेश दे दिए। आदेश में कहा कि गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद और सैलरी अटैच होने के बाद इंस्पेक्टर कोर्ट में पहुंचे हैं। अभी कोर्ट किसी और केस में व्यस्त है इसलिए इंस्पेक्टर राजेश को कस्टडी में रखा जाए और 11:30 बजे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाए। तब तक कोर्ट परिसर में बंदियों के लिए बने कमरे में रखा।
प्रिजनर एस्कॉर्ट इंचार्ज सुरेश कुमार ने बताया कि शुरुआत में मौखिक आदेश के आधार पर एचएचओ को लॉकअप में भेजा गया। करीब एक घंटे बाद जब लिखित आदेश मिला, तब उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। गवाही के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
हत्या के मामले में अभी तक लग चुकीं 48 तारीखें
हत्या के इस पूरे मामले में अभी तक 48 तारीखें लग चुकी हैं। गौरव के परिजनों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसपर 10 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और इस केस को 10 जून 2025 तक निपटाने के आदेश दिए थे। गौरतलब है कि स्थानीय न्यायालय में एडिशनल सेशन जज विवेक यादव के छुट्टी पर जाने की वजह से यह केस चार जून को मोहित अग्रवाल की न्यायालय में ट्रांसफर किया गया था।