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Kaithal News: कोर्ट ने दादी को माना असली अभिभावक
Wed, 06 Aug 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 06 Aug 2025 12:49 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा उनकी दादी को सौंपने का आदेश दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें बच्चों की मां ने तलाक के बाद पिता की मौत हो जाने पर बच्चों की अभिभावक होने का दावा किया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में बच्चों के माता-पिता का तलाक हो गया था, जिसके बाद अदालत ने बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी पिता को सौंपी थी। डेढ़ वर्ष बाद पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद बच्चों की मां ने खुद को उनका अभिभावक घोषित करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
हालांकि, पहले से जारी अदालती आदेशों और बच्चों की परवरिश में दादी की सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मां का दावा खारिज कर दिया और दादी को ही बच्चों की वैध अभिभावक घोषित किया।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, भावनात्मक स्थिरता और पारिवारिक माहौल को देखते हुए दादी की देखरेख सबसे उपयुक्त होगी। साथ ही, बच्चों की इच्छा और उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी फैसले में अहम माना गया।
दादी ने अदालत में यह याचिका दाखिल की थी कि चूंकि बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी पहले पिता को दी गई थी और अब उसकी मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में वही बच्चों की सुरक्षा और परवरिश के लिए उपयुक्त हैं।
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कैथल। जिले की एक अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा उनकी दादी को सौंपने का आदेश दिया है। यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें बच्चों की मां ने तलाक के बाद पिता की मौत हो जाने पर बच्चों की अभिभावक होने का दावा किया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में बच्चों के माता-पिता का तलाक हो गया था, जिसके बाद अदालत ने बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी पिता को सौंपी थी। डेढ़ वर्ष बाद पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद बच्चों की मां ने खुद को उनका अभिभावक घोषित करने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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हालांकि, पहले से जारी अदालती आदेशों और बच्चों की परवरिश में दादी की सक्रिय भूमिका को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मां का दावा खारिज कर दिया और दादी को ही बच्चों की वैध अभिभावक घोषित किया।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, भावनात्मक स्थिरता और पारिवारिक माहौल को देखते हुए दादी की देखरेख सबसे उपयुक्त होगी। साथ ही, बच्चों की इच्छा और उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी फैसले में अहम माना गया।
दादी ने अदालत में यह याचिका दाखिल की थी कि चूंकि बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी पहले पिता को दी गई थी और अब उसकी मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में वही बच्चों की सुरक्षा और परवरिश के लिए उपयुक्त हैं।