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Kaithal News: सड़क दुर्घटना मामले में आयोग ने बीमा कंपनी को ठहराया दोषी
Mon, 01 Jun 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:21 PM IST
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कैथल। सड़क दुर्घटना में पति की मौत के बाद बीमा दावा ठुकराने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को दोषी ठहराया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 1.50 लाख रुपये बीमा राशि, 5 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर कुल राशि पर आदेश की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
शिकायतकर्ता राजबाला ने बताया था कि उनके पति जय कुमार ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत अपने बैंक खाते से बीमा कराया हुआ था। योजना के अंतर्गत उनके खाते से 12 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। 18 सितंबर 2020 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद उसने उसके पति का नामांकित व्यक्ति होने के नाते बीमा दावा प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने 1 फरवरी 2021 को दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचने पर उनके पति का पर्स गायब मिला था जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस रखा हुआ था। काफी प्रयासों के बावजूद लाइसेंस नहीं मिल सका।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता से कई बार ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए लेकिन उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं संबंधित बैंक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसकी भूमिका केवल प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेजने तक सीमित थी और दावा निपटान प्रक्रिया में उसका कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना और मृत्यु के तथ्य पर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। केवल ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध न होने के आधार पर पूरे दावे को अस्वीकार करना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में बीमा कंपनी को दावा गैर-मानक आधार पर निपटाना चाहिए था, न कि पूरी तरह खारिज करना चाहिए था। यह फैसला आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप और सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरिशा मेहता की पीठ ने सुनाया है।
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शिकायतकर्ता राजबाला ने बताया था कि उनके पति जय कुमार ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत अपने बैंक खाते से बीमा कराया हुआ था। योजना के अंतर्गत उनके खाते से 12 रुपये का प्रीमियम काटा गया था। 18 सितंबर 2020 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद उसने उसके पति का नामांकित व्यक्ति होने के नाते बीमा दावा प्रस्तुत किया।
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बीमा कंपनी ने 1 फरवरी 2021 को दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय मृतक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध नहीं था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचने पर उनके पति का पर्स गायब मिला था जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस रखा हुआ था। काफी प्रयासों के बावजूद लाइसेंस नहीं मिल सका।
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सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता से कई बार ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए लेकिन उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं संबंधित बैंक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसकी भूमिका केवल प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेजने तक सीमित थी और दावा निपटान प्रक्रिया में उसका कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना और मृत्यु के तथ्य पर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। केवल ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध न होने के आधार पर पूरे दावे को अस्वीकार करना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने माना कि ऐसी परिस्थितियों में बीमा कंपनी को दावा गैर-मानक आधार पर निपटाना चाहिए था, न कि पूरी तरह खारिज करना चाहिए था। यह फैसला आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप और सदस्य सुनील मोहन त्रिखा और हरिशा मेहता की पीठ ने सुनाया है।