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Kaithal News: आढ़ती बोले, मंडियों से उठवाया जाए गेहूं
Tue, 06 May 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 06 May 2025 01:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पाई। सरकार व जिला प्रशासन की चलती लापरवाही के चलते आढ़तियों को कई लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इस कारण आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी ओर से सरकारी एजेंसियों को बेची हुई किसान की गेहूं की फसल को जैसी स्थिति में है, उसे तुरंत मंडियों से उठाया जाए और आढ़तियों को उचित मुआवजा दिया जाए।
पाई मंडी के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजीने बताया कि पाई मंडी में किसानों की गेहूं की फसल डालने के लिए जगह की कमी है, इस कारण से आढ़तियों को अपने किसानों की फसल मंडी से बाहर खेतों में डलवानी पड़ती है। अबकी बार भी आढ़तियों ने अपने किसानों की फसल खेतों में डालवाई हुई है। अब बारिश से मंडी व खेतों में पड़ी गेहूं से भरी बोरियां पूरी तरह से भीग गई है। उन्होंने बताया कि गेहूं की एक ऐसी फसल है, जो थोड़ी सी भी भीग जाने पर सड़ना शुरू हो जाती है।
अब हुई इस बारिश से किसानों की गेहूं से भरी बोरियां भीग जाने से इसमें पड़ा गेहूं खराब हो गया है। इस कारण से इसका उठान न के बराबर है और किसानों को उनके तुले हुए गेहूं का भुगतान भी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आढ़तियों को उनकी आढ़त तो क्या, अपने पल्ले से अधिक पैसे देकर पल्ला छूटने वाला नही है। उन्होंने यह भी कहा कि खरीद करने के बाद खरीद एजेंसियां समय पर इसका उठान नही करती, जिस कारण से भी गेहूं अधिक खराब हुआ है।
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उन्होंने सरकार से मांग की है कि जैसी स्थिति में गेहूं मडियों में पड़ा है, वैसी थिति में ही उठान किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उठान की ऐसी ही स्थिति रहेगी तो आढ़ती किसानों की गेहूं की फसल अपने माध्यम से सरकार को बेचना छोड़ देंगे।
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पाई। सरकार व जिला प्रशासन की चलती लापरवाही के चलते आढ़तियों को कई लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इस कारण आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी ओर से सरकारी एजेंसियों को बेची हुई किसान की गेहूं की फसल को जैसी स्थिति में है, उसे तुरंत मंडियों से उठाया जाए और आढ़तियों को उचित मुआवजा दिया जाए।
पाई मंडी के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजीने बताया कि पाई मंडी में किसानों की गेहूं की फसल डालने के लिए जगह की कमी है, इस कारण से आढ़तियों को अपने किसानों की फसल मंडी से बाहर खेतों में डलवानी पड़ती है। अबकी बार भी आढ़तियों ने अपने किसानों की फसल खेतों में डालवाई हुई है। अब बारिश से मंडी व खेतों में पड़ी गेहूं से भरी बोरियां पूरी तरह से भीग गई है। उन्होंने बताया कि गेहूं की एक ऐसी फसल है, जो थोड़ी सी भी भीग जाने पर सड़ना शुरू हो जाती है।
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अब हुई इस बारिश से किसानों की गेहूं से भरी बोरियां भीग जाने से इसमें पड़ा गेहूं खराब हो गया है। इस कारण से इसका उठान न के बराबर है और किसानों को उनके तुले हुए गेहूं का भुगतान भी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि आढ़तियों को उनकी आढ़त तो क्या, अपने पल्ले से अधिक पैसे देकर पल्ला छूटने वाला नही है। उन्होंने यह भी कहा कि खरीद करने के बाद खरीद एजेंसियां समय पर इसका उठान नही करती, जिस कारण से भी गेहूं अधिक खराब हुआ है।
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उन्होंने सरकार से मांग की है कि जैसी स्थिति में गेहूं मडियों में पड़ा है, वैसी थिति में ही उठान किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उठान की ऐसी ही स्थिति रहेगी तो आढ़ती किसानों की गेहूं की फसल अपने माध्यम से सरकार को बेचना छोड़ देंगे।