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Kaithal News: पाई मंडी के आढ़तियों को ढाई माह बाद भी नहीं मिली आढ़त
Fri, 16 Jan 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पाई। सीजन का करीब ढाई माह बीत जाने के बाद भी पाई अनाज मंडी के आढ़तियों को धान पर लगने वाली आढ़त का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे आढ़तियों में रोष व्याप्त है। अनाज मंडी के आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि लंबित आढ़त का भुगतान देरी का ब्याज जोड़कर शीघ्र किया जाए। भुगतान न होने के कारण आढ़तियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।
मंडी के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजी ने बताया कि धान का सीजन समाप्त हुए लगभग ढाई माह हो चुके हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों ने अभी तक आढ़तियों को आढ़त का भुगतान नहीं किया। उन्होंने कहा कि अक्तूबर माह में खरीद एजेंसियों द्वारा किसानों की धान आढ़तियों के माध्यम से खरीद की गई थी, जिस पर सरकार ने 55 रुपये प्रति क्विंटल
आढ़त देने की घोषणा की थी। सरकार की ओर से देय ढाई प्रतिशत आढ़त के साथ-साथ ढाई माह की देरी का ब्याज भी दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब सरकार अपने किसी बकाये की वसूली करती है तो ब्याज सहित करती है, ऐसे में आढ़तियों को देरी से भुगतान पर ब्याज देने से ऐतराज नहीं होना चाहिए। आढ़तियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय करेंगे।
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पाई। सीजन का करीब ढाई माह बीत जाने के बाद भी पाई अनाज मंडी के आढ़तियों को धान पर लगने वाली आढ़त का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे आढ़तियों में रोष व्याप्त है। अनाज मंडी के आढ़तियों ने सरकार से मांग की है कि लंबित आढ़त का भुगतान देरी का ब्याज जोड़कर शीघ्र किया जाए। भुगतान न होने के कारण आढ़तियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।
मंडी के पूर्व प्रधान रणधीर सिंह फौजी ने बताया कि धान का सीजन समाप्त हुए लगभग ढाई माह हो चुके हैं, लेकिन खरीद एजेंसियों ने अभी तक आढ़तियों को आढ़त का भुगतान नहीं किया। उन्होंने कहा कि अक्तूबर माह में खरीद एजेंसियों द्वारा किसानों की धान आढ़तियों के माध्यम से खरीद की गई थी, जिस पर सरकार ने 55 रुपये प्रति क्विंटल
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आढ़त देने की घोषणा की थी। सरकार की ओर से देय ढाई प्रतिशत आढ़त के साथ-साथ ढाई माह की देरी का ब्याज भी दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब सरकार अपने किसी बकाये की वसूली करती है तो ब्याज सहित करती है, ऐसे में आढ़तियों को देरी से भुगतान पर ब्याज देने से ऐतराज नहीं होना चाहिए। आढ़तियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय करेंगे।
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