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अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही निजीं प्रकाशकों की किताबें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 02:27 AM IST
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The arbitrariness of the schools is taking a toll on the pockets of the parents
शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित किए गए नियमों को ताक पर रखकर जिले के कई निजी स्कूलों में विद्यार्थियों पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। एनसीईआरटी की जिन पुस्तकों के दाम 200 से लेकर 300 रुपये के बीच हैं, उनके लिए अभिभावकों को 800 से लेकर 900 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यही नहीं, कई स्कूलों में तो पुस्तकें भी हर वर्ष बदली जा रही हैं, जिन्हें एक वर्ष पढ़ने के बाद विद्यार्थी अपने कनिष्ठों को भी नहीं दे सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों को हर बार बच्चों के लिए महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसका सीधा प्रभाव अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है।
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विभाग की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार हरियाणा बोर्ड से मान्यता प्राप्त कोई भी सरकारी या निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं लगवा सकता। अगर सीबीएसई पैटर्न की बात करें तो वह भी आठवीं कक्षा के बाद विद्यार्थियों पर लागू होता है। इसके विपरीत पुस्तक विक्रेताओं के पास बच्चों के नए शैक्षणिक सत्र में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने वाले अभिभावकों की कतारें लग रही हैं। रोजाना दर्जनों की संख्या में अभिभावक एक-एक विक्रेता से हजारों रुपये कीमत चुकाकर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीद रहे हैं। कुछ स्कूलों ने तो अभिभावकों को निजी प्रकाशकों के नाम लिखकर पर्चियां थमा दी हैं कि वे बाजार से बच्चों के लिए केवल यही पुस्तकें खरीदें। अन्य कोई भी पुस्तक स्कूल में मान्य नहीं होगी।
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पुस्तक विक्रेता नवीन कुमार का कहना है कि इस समय एनसीईआरटी और निजी प्रकाशकों की पुस्तकें दोनों ही बिक रही हैं। अभिभावकों की मांग के अनुसार पुस्तकें उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जहां पुस्तकें बदली नहीं गई हैं, वहां बच्चों के लिए अभिभावक पुरानी पुस्तकें भी सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे बुक बैंकों से ले रहे हैं।
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पुस्तक विक्रेता बलदेव ने कहा कि नए सत्र में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की भी काफी मांग है। बीते वर्षों में स्कूलों में भी स्टॉल लगवाए जाते रहे, लेकिन इस बार खुली मार्केट में पुस्तकों की बिक्री हो रही है। एनसीईआरटी या फिर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें अभिभावकों की मांग के अनुसार उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान मोनू बतरा ने कहा कि एसोसिएशन से जुड़े कई अभिभावकों की इस प्रकार की शिकायतें सामने आई हैं। एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें मंगवाई जा रही हैं। कुछ स्कूलों में तो इतनी महंगी पुस्तकें लगवाई जा रही हैं, जिनके दाम छोटी से छोटी कक्षा के लिए दो-दो हजार रुपये से ज्यादा हैं।

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि सभी स्कूलों में एनसीईआरटी या एससीईआरटी की पुस्तकें ही मान्य हैं। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगवाने के संबंध में फिलहाल उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। अगर किसी स्कूल के खिलाफ शिकायत आई तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। स्कूल मनमाने तरीके से पुस्तकें नहीं लगवा सकते हैं।
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