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दो माह में हवा हो गया दस हजार क्विंटल गेहूं
कैथल
Updated Fri, 04 Jul 2014 12:26 AM IST
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कैथल। खरीद एजेंसियों द्वारा अप्रैल मेें खरीदे गए करीब छह लाख क्विंटल गेहूं में से दस हजार क्विंटल गेहूं कम हो गया है। माना जा रहा है कि मार्च और अप्रैल के अंत में बरसात के कारण गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई और मई एवं जून माह में इसके सूखने के कारण घटोतरी हुई है। अब इस घटोतरी की रिकवरी खरीद करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों सहित आढ़तियों से होगी, जिससे इन सभी की नींद उड़ हुई है। गौरतलब है कि घटे हुए गेहूं की कीमत एक करोड़ चालीस लाख रुपये आंकी गई है।
खरीद एजेंसियों के 65 कर्मी चार्जशिटिड हैं
जिले में अप्रैल में गेहूं के सीजन में खरीद एजेंसियों द्वारा लगभग पांच लाख 95 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। इसे गोदामों में भंडारित किया गया था। कंबाइन से कटे गेहूं के अलावा अप्रैल में बरसात के कारण भी गेहूं में नमी की मात्रा ज्यादा बताई गई थी। इसके बावजूद खरीद के बाद इसे गोदामों में भंडारित किया गया। अब जब इसे भारतीय खाद्य निगम को सौंपा जा रहा है, तो इसका वजन घट रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरे जिले में लगभग 10 हजार क्विंटल गेहूं कम है। इसके लिए खरीद एजेंसियों सहित आढ़तियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रिकवरी के चक्कर में खरीद एजेंसियों के करीब 65 अधिकारी एवं कर्मचारियों के नाम चार्जशीट में हैं। रिकवरी पूरी होने तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
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इसलिए घटता है गेहूं का वजह
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समय तकनीक का जमाना आ गया है। लेकिन सरकार अभी भी पुरानी नीतियां थोप रही है। सरकार ने सीजन के समय 12 प्रतिशत तक की नमी तक का गेहूं खरीदने के निर्देश दिए हैं। नमी की इतनी मात्रा उस समय बचती थी, जब किसान हाथ से गेहूं की कटाई करके लेकर आता था। क्योंकि कटाई में लंबा समय लगता था तथा नमी सूख जाती थी। लेकिन अब कंबाइन से कटाई होती है, जिस कारण 15 से 18 प्रतिशत तक नमी तक का गेहूं मंडी में पहुंच जाता है।
मंडियों के ठसाठस भर जाने के कारण दबाव में गेहूं की खरीद होती है। ऐसे में नमीयुक्त गेहूं खरीदा जाता है। इस बार तो अप्रैल माह में बरसात भी हुई थी, जिस कारण गेहूं ज्यादा नमी थी। क्योंकि इसे फिर भंडारित किया गया और जून में बरसात न होने के कारण तापमान काफी ऊंचा रहा। इसी वजह से गेहूं के वजन में कमी आ गई है।
कैथल मंडी में 3100 क्विंटल की घटोतरी
विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा आढ़तियों की ओर करीब 3100 क्विंटल की घटोतरी निकली है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश मित्तल ने कहा कि उन्होंने सरकार से मांग की है कि कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे आढ़तियों और कर्मचारियों व अधिकारियों को कोई परेशानी न आए। क्योंकि घटोतरी में आढ़तियोें का कोई कुसूर नहीं है।
आढ़तियों ने पूरा वजन का गेहूं जमा करवाया था। हैफेड के डीएम वीपी मलिक का कहना है कि हैफेड की जिले भर में 2000 क्विंटल के लगभग घटोतरी आई है। जिसकी वसूली की जा रही है। कई मंडियों से इसकी वसूली की जा चुकी है।
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खरीद एजेंसियों के 65 कर्मी चार्जशिटिड हैं
जिले में अप्रैल में गेहूं के सीजन में खरीद एजेंसियों द्वारा लगभग पांच लाख 95 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। इसे गोदामों में भंडारित किया गया था। कंबाइन से कटे गेहूं के अलावा अप्रैल में बरसात के कारण भी गेहूं में नमी की मात्रा ज्यादा बताई गई थी। इसके बावजूद खरीद के बाद इसे गोदामों में भंडारित किया गया। अब जब इसे भारतीय खाद्य निगम को सौंपा जा रहा है, तो इसका वजन घट रहा है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार, पूरे जिले में लगभग 10 हजार क्विंटल गेहूं कम है। इसके लिए खरीद एजेंसियों सहित आढ़तियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रिकवरी के चक्कर में खरीद एजेंसियों के करीब 65 अधिकारी एवं कर्मचारियों के नाम चार्जशीट में हैं। रिकवरी पूरी होने तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
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इसलिए घटता है गेहूं का वजह
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस समय तकनीक का जमाना आ गया है। लेकिन सरकार अभी भी पुरानी नीतियां थोप रही है। सरकार ने सीजन के समय 12 प्रतिशत तक की नमी तक का गेहूं खरीदने के निर्देश दिए हैं। नमी की इतनी मात्रा उस समय बचती थी, जब किसान हाथ से गेहूं की कटाई करके लेकर आता था। क्योंकि कटाई में लंबा समय लगता था तथा नमी सूख जाती थी। लेकिन अब कंबाइन से कटाई होती है, जिस कारण 15 से 18 प्रतिशत तक नमी तक का गेहूं मंडी में पहुंच जाता है।
मंडियों के ठसाठस भर जाने के कारण दबाव में गेहूं की खरीद होती है। ऐसे में नमीयुक्त गेहूं खरीदा जाता है। इस बार तो अप्रैल माह में बरसात भी हुई थी, जिस कारण गेहूं ज्यादा नमी थी। क्योंकि इसे फिर भंडारित किया गया और जून में बरसात न होने के कारण तापमान काफी ऊंचा रहा। इसी वजह से गेहूं के वजन में कमी आ गई है।
कैथल मंडी में 3100 क्विंटल की घटोतरी
विभिन्न खरीद एजेंसियों द्वारा आढ़तियों की ओर करीब 3100 क्विंटल की घटोतरी निकली है। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश मित्तल ने कहा कि उन्होंने सरकार से मांग की है कि कोई ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे आढ़तियों और कर्मचारियों व अधिकारियों को कोई परेशानी न आए। क्योंकि घटोतरी में आढ़तियोें का कोई कुसूर नहीं है।
आढ़तियों ने पूरा वजन का गेहूं जमा करवाया था। हैफेड के डीएम वीपी मलिक का कहना है कि हैफेड की जिले भर में 2000 क्विंटल के लगभग घटोतरी आई है। जिसकी वसूली की जा रही है। कई मंडियों से इसकी वसूली की जा चुकी है।