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Kaithal News: संस्कृत विवि से करें एमए दर्शनशास्त्र की पढ़ाई
Wed, 20 Aug 2025 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 20 Aug 2025 01:25 AM IST
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34 कैथल। जानकारी देते विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह व कुलसचिव डॉ. संजय गोयल। विवि
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्रदेश के एकमात्र संस्कृत विवि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में अब संस्कृत माध्यम से एमए दर्शनशास्त्र विषय की पढ़ाई शुरू की जाएगी। यह निर्णय विश्वविद्यालय की शिक्षा परिषद एवं कार्यपरिषद की संयुक्त बैठक में लिया गया। प्रारंभिक चरण में 20 सीटें निर्धारित की गई हैं।
विशेष बात यह है कि यह पढ़ाई पूरी तरह संस्कृत माध्यम से होगी। इसमें मॉर्डन एवं वेस्टर्न फिलॉसफी भी पढ़ाई जाएगी। निश्चित ही यह निर्णय संस्कृत एवं आधुनिक दोनों परंपराओं के एक साथ लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इसकीे प्रवेश प्रक्रिया का शेड्यूल एक सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा।
ह निर्णय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विविधता को समृद्ध करेगा तथा भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को एक नया अवसर प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह ने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में अब ड्युअल डिग्री प्रोग्राम लागू किए जाएंगे। विद्यार्थी अब संस्कृत के साथ-साथ किसी अन्य आधुनिक या व्यावसायिक विषय में भी एक साथ दो डिग्रियों में नामांकन ले सकेंगे। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे उन्हें शिक्षा के साथ-साथ रोज़गारोन्मुखी दक्षता भी प्राप्त हो सके।
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बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में कैंपस स्कूल की स्थापना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। यह स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अवधारणाओं पर आधारित होगा, जिसमें नवाचार, नैतिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाएगा।
इस योजना के लिए कुलगुरु द्वारा एक समिति गठित की जाएगी, जो विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उसे हरियाणा सरकार को अनुमोदन हेतु भेजेगी। यह स्कूल विश्वविद्यालय कर्मचारियों के बच्चों एवं आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनेगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के मूंदड़ी गांव स्थित स्थायी परिसर तक सीधी सड़क निर्माण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस सड़क के निर्माण से विश्वविद्यालय की पहुंच, सुगमता एवं विकास कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही इसके के सौंदर्यीकरण के लिए भी योजना बनाई जाएगी ताकि विद्यार्थियों एवं आगंतुकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
आज की बैठक में लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। दर्शनशास्त्र की शिक्षा, ड्यूल डिग्री योजना और कौशल विकास कोर्स न केवल शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाएंगे, बल्कि विद्यार्थियों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार सशक्त बनाएंगे।
-प्रो. राजबीर सिंह, कुलगुरु
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कैथल। प्रदेश के एकमात्र संस्कृत विवि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में अब संस्कृत माध्यम से एमए दर्शनशास्त्र विषय की पढ़ाई शुरू की जाएगी। यह निर्णय विश्वविद्यालय की शिक्षा परिषद एवं कार्यपरिषद की संयुक्त बैठक में लिया गया। प्रारंभिक चरण में 20 सीटें निर्धारित की गई हैं।
विशेष बात यह है कि यह पढ़ाई पूरी तरह संस्कृत माध्यम से होगी। इसमें मॉर्डन एवं वेस्टर्न फिलॉसफी भी पढ़ाई जाएगी। निश्चित ही यह निर्णय संस्कृत एवं आधुनिक दोनों परंपराओं के एक साथ लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इसकीे प्रवेश प्रक्रिया का शेड्यूल एक सप्ताह के भीतर विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा।
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ह निर्णय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विविधता को समृद्ध करेगा तथा भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को एक नया अवसर प्रदान करेगा। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजबीर सिंह ने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में अब ड्युअल डिग्री प्रोग्राम लागू किए जाएंगे। विद्यार्थी अब संस्कृत के साथ-साथ किसी अन्य आधुनिक या व्यावसायिक विषय में भी एक साथ दो डिग्रियों में नामांकन ले सकेंगे। इसके तहत विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू किए जाएंगे, जिससे उन्हें शिक्षा के साथ-साथ रोज़गारोन्मुखी दक्षता भी प्राप्त हो सके।
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बैठक में विश्वविद्यालय परिसर में कैंपस स्कूल की स्थापना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। यह स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अवधारणाओं पर आधारित होगा, जिसमें नवाचार, नैतिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों को विशेष महत्व दिया जाएगा।
इस योजना के लिए कुलगुरु द्वारा एक समिति गठित की जाएगी, जो विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर उसे हरियाणा सरकार को अनुमोदन हेतु भेजेगी। यह स्कूल विश्वविद्यालय कर्मचारियों के बच्चों एवं आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनेगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के मूंदड़ी गांव स्थित स्थायी परिसर तक सीधी सड़क निर्माण के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस सड़क के निर्माण से विश्वविद्यालय की पहुंच, सुगमता एवं विकास कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही इसके के सौंदर्यीकरण के लिए भी योजना बनाई जाएगी ताकि विद्यार्थियों एवं आगंतुकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
आज की बैठक में लिए गए निर्णय विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। दर्शनशास्त्र की शिक्षा, ड्यूल डिग्री योजना और कौशल विकास कोर्स न केवल शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाएंगे, बल्कि विद्यार्थियों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार सशक्त बनाएंगे।
-प्रो. राजबीर सिंह, कुलगुरु