फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Students on 8th-10th cant write evev their name

नाम लिखना भी नहीं आता आठवीं-दसवीं के बच्चों को

Mon, 08 Feb 2016 11:17 PM IST
राजू जगत/कैथल
राजू जगत/कैथल Updated Mon, 08 Feb 2016 11:17 PM IST
विज्ञापन
Students on 8th-10th cant write evev their name
 
विज्ञापन

सरकारी स्कूलों में लगातार गिरते शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए आयोजित बैठक में स्कूल मुखिया जहां एक दूसरे पर जिम्मेवारी थोपते नजर आए। वहीं, कई अध्यापकों ने महापुरुषों के नाम पर की जाने वाली छुट्टियों एवं शीतकालीन छुट्टियों के साथ-साथ हर रोज लागू हो रही नई-नई नीतियों को शिक्षा के बंटाधार के लिए जिम्मेवार ठहराया है। एडीसी जितेंद्र कुमार ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए स्कूल मुखियाओं की बैठक बुलाई थी।

जिसमें सरकारी मिडिल, उच्च एवं सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के मुखियाओं ने भाग लिया। सीनियर सेकेंडरी स्कूल मुखियाओं ने कहा कि ऐसे बच्चे दसवीं पास करके आते हैं, जो पढ़ना तक नहीं जानते। यहां तक कि आठवीं-दसवीं के बच्चों को अपना नाम तक नहीं लिखना आता।
विज्ञापन


एक दूसरे पर थोपी खराब शिक्षा स्तर की जिम्मेवारी
बैठक में सीनियर सेकेंडरी स्कूल मुखियाओं ने कहा कि ऐसे बच्चे दसवीं पास करके आते हैं, जो पढ़ना तक नहीं जानते। जिसके लिए उच्च विद्यालय में पढ़ाने वाले अध्यापक जिम्मेवार हैं। इस बात पर उच्च विद्यालय के अध्यापकों ने कहा कि मिडिल स्कूल के अध्यापकों को बच्चों को ठीक से पढ़ाना चाहिए। ताकि उच्च विद्यालय में आकर उन्हें एबीसी एवं अक्षर लिखने ना सीखाने पड़ें। वे सिलेबस करवाएं या बच्चों को पढ़ना लिखना सीखाएं। इसके बाद मिडिल स्कूल मुखियाओं ने इस के लिए प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों पर ठीकरा फोड़ दिया। इन मुखियाओं का कहना था कि प्राथमिक स्तर पर पढ़ना एवं लिखना सीखाना चाहिए। बैठक में जेबीटी अध्यापक आए ही नहीं थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


बंद हों महापुरुषों के नाम पर होने वाली छुट्टियां
कार्यशाला ने दो स्कूल मुखियाओं ने कहा कि शीतकालीन छुट्टियां व महापुरुषों के नाम पर होने वाली छुट्टियों को बंद किया जाना चाहिए। जनवरी माह में मात्र तीन से पांच दिन स्कूल लगा है। ऐसे में सिलेबस पूरा कैसे कर सकते है। महापुरुषों के जन्मदिन को स्कूल में प्रार्थना के समय अलग से एक घंटे के लिए मनाना चाहिए।

स्कूल मुखिया ही समझ नहीं पाए शिक्षा नीति
एडीसी ने स्कूल मुखियाओं ने प्रश्न किया कि उनको विद्यार्थियों के टेस्ट लेने से किसने मना किया था। जिसका किसी स्कूल मुखिया के पास जवाब नहीं था। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विद्यार्थियों को दंड देकर सीखाया जाता है, उसी प्रकार स्कूल में अध्यापक भी दंड मुक्त होने से ऐसा कर रहा है। कहीं न कहीं अध्यापक भी जिम्मेवार है। टेस्ट न लेने के आदेशों पर सभी ने चुप्पी साधी रखी। एडीसी ने कहा कि एक समय था जब शिक्षक हमारी संस्कृति का धरोहर था। लेकिन अब स्थिति शिक्षकों के बिलकुल सामने है।

पेरेंट्स मीटिंग पर भी उठाए सवाल

अध्यापकों ने बैठक में पेरेंटस मीटिंग पर भी सवाल उठाए। इन अध्यापकों का कहना था कि पेरेंट्स मीटिंग में सिवाये समय खराबी के कोई परिणाम नहीं निकलता। इसे ओर अधिक सार्थक बनाएं या फिर इसे खत्म किया जाए। 


स्कूल मुखिया लेकर आएं पांच-पांच समस्याएं
एडीसी ने अगले माह फिर से बैठक लेने की बात कही तथा कहा कि सभी स्कूल मुखियाओं को पांच-पांच समस्याएं व समाधान के सुझाव लेकर आने को कहा।

गरीबी को केवल शिक्षा से हराया जा सकता है एडीसी
कार्यशाला में एडीसी ने बताया कि शिक्षा हर प्रकार की गरीबी को समाप्त करने का एक ब्रह्मास्त्र है। पंक्ति में खड़े सबसे अंतिम बच्चे को शिक्षित करने का अपना उद्देश्य निर्धारित करें। शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। बैठक में डीईओ निर्मल तनेजा, शमशेर सिरोही, प्रिंसिपल सुरेश गुलशन, सतीश कक्कड़, जनक नरूला, प्रोमिला देवी, राजकुमार शास्त्री सहित जिले भर से स्कूल मुखिया मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed