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खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई है कैथल ने पहचान
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:28 PM IST
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कैथ्ाल
- फोटो : कैथ्ाल
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कैथल। हरियाणा प्रदेश के गठन के बाद से जिले ने शिक्षा व खेल के क्षेत्र में कई बड़े आयाम स्थापित किए हैं। 1966 से पहले शहर के केवल तीन स्कूल व एक कॉलेज था। जिले के केवल बड़े गांवों में ही स्कूल थे। आठ से 10 गांवों को मिलाकर एक स्कूल होता था। जिले के छह ही ब्लॉकों में छोटे व बड़े करीब 40 स्कूल थे। लेकिन प्रदेश के गठन के बाद से प्रत्येक गांव में स्कूल खुलने शुरू हो गए। वर्तमान में कैथल जिले में 599 सरकारी व 600 से अधिक गैर सरकारी स्कूल हैं। 1966 से पहले जहां जिले में एक कॉलेज आरकेएसडी होता था। वहीं अब जिले में करीब 50 कॉलेजों में विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
कैथल शहर व गांवों से शिक्षा ग्रहण करने के बाद राजनीति में कलायत के विधायक जयप्रकाश केंद्रीय पेट्रोल मंत्री, चरण दास शोरेवाला प्रदेश में वित्तमंत्री, सुरेन्द्र मदान केबिनेट मंत्री मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल तक कैथल जिले के खिलाड़ियों ने पाया है। ढांड के गांव से बलवंत सिंह उर्फ बल्लू ने वालीवाल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें अर्जुन वार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा बलवान सिंह को वर्ष 2005 में द्रोणाचार्य अवार्ड से प्राप्त किया है। इसके अलावा वर्तमान में पाई सहित कई गांवों के खिलाड़ी कबड्डी लीग में जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
कैथल की बेटी ने आईएएस परीक्षा में देश में 33वां रैंक हासिल किया
कैथल की बेटी दीपशिखा ने 2015 में देश में आईएएस परीक्षा में 33वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया था। दीपशिक्षा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी है। माता व पिता दोनों प्राध्यापक पद पर कार्यरत है। वहीं भारत शर्मा, चंद्रशेखर वशिष्ठ न्यायिक सेवाओं में कैथल का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रदेश के गठन के बाद कई बड़े खिलाडिय़ों ने किया नाम रोशन- प्रदेश के गठन के बाद खेलों में कई बड़े खिलाड़ी जिले से निकले है। जिनमें वालीबॉल खिलाड़ी ढांड के गांव के बलवंत उर्फ बिल्लू है। जिनको सरकार ने अर्जुन अवार्ड दिया था। इसके अलावा बलवान को दोणाचार्य अवार्ड देकर सम्मानित किया था। वहीं वर्ष 2010 में शहर की बेटी ममता सौदा ने मांउट एवरेस्ट फतेह कर जिले का नाम रोशन किया था। वर्तमान में हरियाणा पुलिस ने डीएसपी पद पर कार्यरत है। कैथल के कस्बा राजौंद से बॉक्सर मनोज ने ओलंपिक खेलों में भाग लेकर कैथल देश में नाम रोशन किया है। खिलाड़ी बॉक्सर विक्रम ढुल ने इंटर नेशनल बाकं्िसग प्रतियोगिता में 2002 में कांस्य पदक हासिल किया। वालीबाल में यूथ एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया। इसके साथ कबड्डी में बारू राम ने देश में जिले के पहचान दी है। ठाकुर बिशन सिंह ट्यौंठा खेलों में देश में कैथल को पहचान दी।
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कॉलेजों में दाखिले के लिए लालटेन लेकर रात को प्रोफेसर करते थे काउंसलिंग
पंजाब के क्षेत्र पर होता था उस समय ज्यादा खर्च
कैथल। पूर्व प्राध्यापक ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि उनका जन्म 1945 में हुआ था। हरियाणा व पंजाब एक ही प्रदेश थे। कैथल क्षेत्र में केवल तीन स्कूल थे। इनमें एक राजकीय स्कूल, एक हिन्दू स्कूल व जाट स्कूल था। कैथल जिले के आस-पास के गांवों में छोटे व बड़े मिलाकर करीब 40 स्कूल होते थे। ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि जब उन्होंने 1962 में दसवीं पास की तो उस समय जिले में एक मात्र कॉलेज आरकेएसडी था।
कॉलेज के प्रोफेसर दामोदर वरिष्ठ, बैजनाथ गुप्ता, एससी सिंगल, एमएल ग्रोवर 1962 में जो विद्यार्थी शहर के कक्षा दसवीं में अच्छे अंक लेकर आते थे। वह रात को लालटेन लेकर उनके घरों में जाकर उनको कॉलेज में दाखिले के लिए प्रेरित करते थे। उनको उनकी समस्याएं पुछते थे। अगर विद्यार्थी को किसी प्रकार की समस्यां होती थी तो उसकी वह फाइनेंसल मदद भी करते थे। ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विद् रहे है। कॉलेजों में उस समय करीब 400 से 500 बच्चे थे।
पंजाब क्षेत्र पर होता था अधिक पैसा खर्च
ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि हरियाणा पंजाब का ही हिस्सा था। लेकिन उस समय पंजाब क्षेत्र पर ही अधिक पैसा खर्च होता था। जिसके मुकाबले पंजाब के क्षेत्र में पहले अच्छी एजूकेशन आई। उन्होंने बताया कि कोई बीएड कॉलेज नहीं था। उन्होंने खुद पंजाबी यूनिवर्सिटी के कॉलेज से बीएड की थी।
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कैथल शहर व गांवों से शिक्षा ग्रहण करने के बाद राजनीति में कलायत के विधायक जयप्रकाश केंद्रीय पेट्रोल मंत्री, चरण दास शोरेवाला प्रदेश में वित्तमंत्री, सुरेन्द्र मदान केबिनेट मंत्री मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल तक कैथल जिले के खिलाड़ियों ने पाया है। ढांड के गांव से बलवंत सिंह उर्फ बल्लू ने वालीवाल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें अर्जुन वार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा बलवान सिंह को वर्ष 2005 में द्रोणाचार्य अवार्ड से प्राप्त किया है। इसके अलावा वर्तमान में पाई सहित कई गांवों के खिलाड़ी कबड्डी लीग में जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
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कैथल की बेटी ने आईएएस परीक्षा में देश में 33वां रैंक हासिल किया
कैथल की बेटी दीपशिखा ने 2015 में देश में आईएएस परीक्षा में 33वां रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया था। दीपशिक्षा अपने माता-पिता की इकलौती बेटी है। माता व पिता दोनों प्राध्यापक पद पर कार्यरत है। वहीं भारत शर्मा, चंद्रशेखर वशिष्ठ न्यायिक सेवाओं में कैथल का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रदेश के गठन के बाद कई बड़े खिलाडिय़ों ने किया नाम रोशन- प्रदेश के गठन के बाद खेलों में कई बड़े खिलाड़ी जिले से निकले है। जिनमें वालीबॉल खिलाड़ी ढांड के गांव के बलवंत उर्फ बिल्लू है। जिनको सरकार ने अर्जुन अवार्ड दिया था। इसके अलावा बलवान को दोणाचार्य अवार्ड देकर सम्मानित किया था। वहीं वर्ष 2010 में शहर की बेटी ममता सौदा ने मांउट एवरेस्ट फतेह कर जिले का नाम रोशन किया था। वर्तमान में हरियाणा पुलिस ने डीएसपी पद पर कार्यरत है। कैथल के कस्बा राजौंद से बॉक्सर मनोज ने ओलंपिक खेलों में भाग लेकर कैथल देश में नाम रोशन किया है। खिलाड़ी बॉक्सर विक्रम ढुल ने इंटर नेशनल बाकं्िसग प्रतियोगिता में 2002 में कांस्य पदक हासिल किया। वालीबाल में यूथ एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया। इसके साथ कबड्डी में बारू राम ने देश में जिले के पहचान दी है। ठाकुर बिशन सिंह ट्यौंठा खेलों में देश में कैथल को पहचान दी।
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कॉलेजों में दाखिले के लिए लालटेन लेकर रात को प्रोफेसर करते थे काउंसलिंग
पंजाब के क्षेत्र पर होता था उस समय ज्यादा खर्च
कैथल। पूर्व प्राध्यापक ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि उनका जन्म 1945 में हुआ था। हरियाणा व पंजाब एक ही प्रदेश थे। कैथल क्षेत्र में केवल तीन स्कूल थे। इनमें एक राजकीय स्कूल, एक हिन्दू स्कूल व जाट स्कूल था। कैथल जिले के आस-पास के गांवों में छोटे व बड़े मिलाकर करीब 40 स्कूल होते थे। ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि जब उन्होंने 1962 में दसवीं पास की तो उस समय जिले में एक मात्र कॉलेज आरकेएसडी था।
कॉलेज के प्रोफेसर दामोदर वरिष्ठ, बैजनाथ गुप्ता, एससी सिंगल, एमएल ग्रोवर 1962 में जो विद्यार्थी शहर के कक्षा दसवीं में अच्छे अंक लेकर आते थे। वह रात को लालटेन लेकर उनके घरों में जाकर उनको कॉलेज में दाखिले के लिए प्रेरित करते थे। उनको उनकी समस्याएं पुछते थे। अगर विद्यार्थी को किसी प्रकार की समस्यां होती थी तो उसकी वह फाइनेंसल मदद भी करते थे। ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि शिक्षा के प्रति समर्पित शिक्षा विद् रहे है। कॉलेजों में उस समय करीब 400 से 500 बच्चे थे।
पंजाब क्षेत्र पर होता था अधिक पैसा खर्च
ज्ञानचंद भल्ला ने बताया कि हरियाणा पंजाब का ही हिस्सा था। लेकिन उस समय पंजाब क्षेत्र पर ही अधिक पैसा खर्च होता था। जिसके मुकाबले पंजाब के क्षेत्र में पहले अच्छी एजूकेशन आई। उन्होंने बताया कि कोई बीएड कॉलेज नहीं था। उन्होंने खुद पंजाबी यूनिवर्सिटी के कॉलेज से बीएड की थी।