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Kaithal News: ...तो कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए लगाए हैं क्या?
Wed, 11 Dec 2024 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 11 Dec 2024 02:39 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिलेभर के निजी स्कूलों की बसों में रोजाना सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखती। यह खुलासा मंगलवार को जींद रोड स्थित अतिरिक्त अनाज मंडी में हुई स्कूलों की जांच के दौरान हुआ है। शिक्षा विभाग एवं आरटीए विभाग की संयुक्त विशेष टीम को जांच के दौरान बसों में न तो सुरक्षा के उपकरण पूरे मिले और न ही नियम।
यहां तक कि बसों में सीसीटीवी कैमरे भी मात्र दिखावे के लिए लगाए गए हैं, क्योंकि इनमें बैकअप के लिए कोई जरूरी उपकरण नहीं है। जांच टीम ने पूरे दिन में 105 बसों की फिटनेस जांच की, जिनमें से मात्र 50 बसें ही नियमों का पालन करती मिली। हालांकि इन बसों में भी छोटी-मोटी कमियां मिली, लेकिन टीम ने उन्हें तुरंत दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए। 105 में से 55 बसों में कई प्रकार की कमियां मिली, जिनमें 25 में सीसीटीवी का बैकअप नहीं मिला।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही महेंद्रगढ़ में हुए स्कूल बस हादसे में तेजी से जिलेभर की निजी स्कूल बसों की जांच की गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग और आरटीए विभाग की ओर से एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने सोमवार से लगातार जिले के अलग-अलग खंडों में टीमों की ओर से जांच की जाएगी। बुधवार को भी कैथल की अतिरिक्त अनाज मंडी भी फिर से जांच की जाएगी।
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टीम ने फटकार लगाते हुए कहा कि कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए लगाए हैं क्या? 30 से अधिक बसों में लाइटें व इंडिकेटर, यहां तक कि रिफ्लेक्टर तक नहीं मिले। इस पर अधिकारियों ने बस संचालकों को नोटिस देने की बात कही और सभी जरूरतों को जल्द पूरा करने के लिए कहा।
इस संबंध में आरटीए विभाग के मोटर वाहन निरीक्षक अनिल सैनी ने बताया कि शिक्षा विभाग और आरटीए ने संयुक्त कमेटी बनाकर बसों की फिटनेस जांची जा रही है। यह जांच बुधवार को भी होगी। अगर स्कूल संचालकों ने जल्द बसों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर नहीं किया तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर जरूरी
प्रत्येक स्कूल बसों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 प्रदर्शित किया गया हो, सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल होने चाहिए।
ये हैं सुरक्षित स्कूल वाहन पाॅलिसी के नियम
वैध ड्राइविंग लाइसेंस पांच वर्ष अभ्यास, वैध कंडक्टर/ अटेंडेंट लाइसेंस, ड्राइवर और कंडक्टर की वर्दी पर नेम प्लेट लाइसेंस नंबर के साथ, वैध
रजिस्ट्रेशन नंबर, वैध रूट परमिट या अनुमति, नोरम के अनुसार बस कलर, वैध इन्सोरेंस सर्टिर्फिकेट, वैध प्रदूषण सर्टिफिकेट, नोरम के अनुसार स्पीड और वर्किंग, नोरम के अनुसार जीपीएस सिस्टम सही और वर्किंग, फायर एक्सक्यूसनर फिट, वर्किंग कडीशन में होर्न, टायर कंडीशन सही हो, ब्रेक और इमरजेेंसी ब्रेक वर्किंग हाे, इंडीकेटर वर्किंग कंडीशन, हेड लाइट और बैक लाइट सही हो, रिफलेक्टर वर्किंग होने चाहिए, पॉलिसी के अनुसार
रिफलेक्टर टेप लगी हो, वाइपर सही हो, फर्स्ट एड बॉक्स और मेडिशियन सही हो, डिसप्ले पर रूट बोर्ड और समय सारणी हो, मानक के अनुसार नंबर प्लेट लगी हो, टिंटेड ग्लास के पर्दे लगे हैं या नहीं, स्कूल
बस के आगे और पीछे स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी का उल्लेख किया गया हो, बस के अंदर और बाहर कोई डिस्प्ले नहीं है तो नीति दुर्घटना सूचना नियंत्रण कक्ष और वाहन मालिक से संपर्क करें।
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कैथल। जिलेभर के निजी स्कूलों की बसों में रोजाना सफर करने वाले बच्चों की सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखती। यह खुलासा मंगलवार को जींद रोड स्थित अतिरिक्त अनाज मंडी में हुई स्कूलों की जांच के दौरान हुआ है। शिक्षा विभाग एवं आरटीए विभाग की संयुक्त विशेष टीम को जांच के दौरान बसों में न तो सुरक्षा के उपकरण पूरे मिले और न ही नियम।
यहां तक कि बसों में सीसीटीवी कैमरे भी मात्र दिखावे के लिए लगाए गए हैं, क्योंकि इनमें बैकअप के लिए कोई जरूरी उपकरण नहीं है। जांच टीम ने पूरे दिन में 105 बसों की फिटनेस जांच की, जिनमें से मात्र 50 बसें ही नियमों का पालन करती मिली। हालांकि इन बसों में भी छोटी-मोटी कमियां मिली, लेकिन टीम ने उन्हें तुरंत दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए। 105 में से 55 बसों में कई प्रकार की कमियां मिली, जिनमें 25 में सीसीटीवी का बैकअप नहीं मिला।
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गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही महेंद्रगढ़ में हुए स्कूल बस हादसे में तेजी से जिलेभर की निजी स्कूल बसों की जांच की गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग और आरटीए विभाग की ओर से एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने सोमवार से लगातार जिले के अलग-अलग खंडों में टीमों की ओर से जांच की जाएगी। बुधवार को भी कैथल की अतिरिक्त अनाज मंडी भी फिर से जांच की जाएगी।
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टीम ने फटकार लगाते हुए कहा कि कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए लगाए हैं क्या? 30 से अधिक बसों में लाइटें व इंडिकेटर, यहां तक कि रिफ्लेक्टर तक नहीं मिले। इस पर अधिकारियों ने बस संचालकों को नोटिस देने की बात कही और सभी जरूरतों को जल्द पूरा करने के लिए कहा।
इस संबंध में आरटीए विभाग के मोटर वाहन निरीक्षक अनिल सैनी ने बताया कि शिक्षा विभाग और आरटीए ने संयुक्त कमेटी बनाकर बसों की फिटनेस जांची जा रही है। यह जांच बुधवार को भी होगी। अगर स्कूल संचालकों ने जल्द बसों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर नहीं किया तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर जरूरी
प्रत्येक स्कूल बसों में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 प्रदर्शित किया गया हो, सभी स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल होने चाहिए।
ये हैं सुरक्षित स्कूल वाहन पाॅलिसी के नियम
वैध ड्राइविंग लाइसेंस पांच वर्ष अभ्यास, वैध कंडक्टर/ अटेंडेंट लाइसेंस, ड्राइवर और कंडक्टर की वर्दी पर नेम प्लेट लाइसेंस नंबर के साथ, वैध
रजिस्ट्रेशन नंबर, वैध रूट परमिट या अनुमति, नोरम के अनुसार बस कलर, वैध इन्सोरेंस सर्टिर्फिकेट, वैध प्रदूषण सर्टिफिकेट, नोरम के अनुसार स्पीड और वर्किंग, नोरम के अनुसार जीपीएस सिस्टम सही और वर्किंग, फायर एक्सक्यूसनर फिट, वर्किंग कडीशन में होर्न, टायर कंडीशन सही हो, ब्रेक और इमरजेेंसी ब्रेक वर्किंग हाे, इंडीकेटर वर्किंग कंडीशन, हेड लाइट और बैक लाइट सही हो, रिफलेक्टर वर्किंग होने चाहिए, पॉलिसी के अनुसार
रिफलेक्टर टेप लगी हो, वाइपर सही हो, फर्स्ट एड बॉक्स और मेडिशियन सही हो, डिसप्ले पर रूट बोर्ड और समय सारणी हो, मानक के अनुसार नंबर प्लेट लगी हो, टिंटेड ग्लास के पर्दे लगे हैं या नहीं, स्कूल
बस के आगे और पीछे स्कूल बस या ऑन स्कूल ड्यूटी का उल्लेख किया गया हो, बस के अंदर और बाहर कोई डिस्प्ले नहीं है तो नीति दुर्घटना सूचना नियंत्रण कक्ष और वाहन मालिक से संपर्क करें।