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सात झटकों ने दिया बड़ा फटका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:53 AM IST
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Six big shocks spoiled the economy of the grain market
कैथल। नकद भुगतान के कारण हरियाणा ही नहीं राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश तक के व्यापारियों की पहली पसंद बनी नई अनाज मंडी कैथल पिछले चार वर्षों में छह बड़े झटकों से उबर नहीं पा रही है। मंडी में से सात बड़े देनदार अपनी देनदारी छोड़कर या तो फरार हो गए हैं या देनदारी से मुकर रहे हैं। एक आढ़ती ने तो देनदारी के बोझ तले दबकर आत्महत्या तक कर ली थी। इन झटकों के कारण एक जुबान पर लाखों के सौदे करने वाले आढ़तियों का आपसी विश्वास भी डगमगा रहा है। आलम यह है कि इस समय अनाज मंडी में 150 से अधिक फर्मों की आर्थिक हालत खस्ता है। अब आढ़ती लेनदेन में कानूनी पहलुओं को देखने लगे हैं ताकि रकम वापसी के रास्ते खुले रहें।
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अनाज मंडी से मिली जानकारी के अनुसार पिछले कई दशकों में अनेक व्यापारी देनदारी छोड़कर जा चुके हैं लेकिन चार वर्षों में विष्णु इटेब्लस नामक निर्यातक फर्म से यह शुरुआत हुई थी। फर्म की ओर करीब 40 करोड़ से अधिक की देनदारी बताई जा रही थी। आढ़तियों ने फर्म के खिलाफ फर्म मालिकों के घर पर धरने तक दिए। आढ़तियों को क्या मिला, आज तक पता नहीं। अधिकतर आढ़ती यही कह रहे हैं कि उनकी राशि आज तक नहीं आई।
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इसके बाद लेखराज एंड संस नामक निर्यातक फर्म की ओर भी लगभग 40 करोड़ रुपये लेनदारी के आरोप लगाकर आढ़तियों ने निर्यातक के घर के बाहर कई दिनों तक धरना दिया। हालांकि निर्यातक ने आढ़तियों के साथ काफी कुछ भुगतान करने की पेशकश कर समझौता कर लिया है। अभी इस फर्म के साथ आढ़तियों के समझौते की बात चल रही है। फर्म मालिकों का कहना है कि देनदारी 40 करोड़ नहीं, इससे कम है।
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ताजा मामला राइस मिलर्स एसोसिएशन के एक पूर्व प्रधान को लेकर है। जो गत 19 जनवरी से परिवार सहित लापता हैं। उनकी ओर करीब सात से आठ करोड़ रुपये की बकाया राशि बताई जा रही है जिसका तीन-चार सालों से भुगतान नहीं हो रहा है। उनकी राइस मिल के बाहर आढ़ती और गांव खुराना के किसानों ने धरना शुरू कर दिया है। इस फर्म मालिक के घर पर भी आढ़तियों को ताला लगा मिला।

इससे पूर्व एक आढ़ती फर्म के मालिक ने देनदारी के कारण आत्महत्या कर ली थी। उनकी ओर करीब 10 से 12 करोड़ रुपये बकाया थे लेकिन इस फर्म के मालिकों के बेटों ने अपने पिता की देनदारी के भुगतान का मंडी के साथ समझौता निपटान करवा दिया था लेकिन सारी राशि का भुगतान नहीं हो पाया था। करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान छोड़कर कपूर एवं पवन कुमार नामक फर्म के मालिक शहर से लापता हैं। उनका आढ़तियों को आज तक अता-पता नहीं है। नरंजन सुभाष नामक फर्म मालिक भी चार से पांच करोड़ रुपये का भुगतान छोड़कर फरार हैं। इसके अलावा एक बचना जिंदल नामक फर्म संचालक भी लगभग एक करोड़ का बकाया छोड़कर फरार हैं।
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