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Kaithal News: सीवन को दर्जा शहर का, हालात गांव जैसे
Wed, 16 Jul 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 16 Jul 2025 01:20 AM IST
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अमित तनेजा
सीवन। साल 2021 में सीवन को नगर पालिका का दर्जा तो मिल गया, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद शहरी स्वरूप सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है। न सड़कों की हालत सुधरी, न ही पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में कोई बड़ा सुधार हुआ। नगर पालिका का गठन, कार्यालय की स्थापना और स्टाफ की तैनाती तो हुई, लेकिन विकास अब तक पटरी पर नहीं चढ़ पाया है। अधिकारी भी सीवन में रहने के बजाय कैथल में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
उम्मीदें जगी थीं पर कुछ न हुआ ः नगर पालिका बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब गलियां पक्की होंगी, स्ट्रीट लाइटें लगेंगी, नालियां सुधरेंगी और सीवन एक व्यवस्थित शहर की शक्ल लेगा। लेकिन आज भी यहां का हाल किसी ग्रामीण क्षेत्र से कम नहीं है।
गड्ढों से भरी गलियां ः कभी आदर्श गांव योजना के तहत बनी गलियां अब जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह गड्ढे, उखड़े ब्लॉक और अधूरा सीवरेज कार्य सीवन के विकास की कहानी बयां करता है।
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शहर सिर्फ नाम का ः सीवन नगर में न स्ट्रीट लाइटें हैं, न सीसीटीवी कैमरे, और न ही कोई प्रमुख सार्वजनिक सुविधा। एकमात्र पार्क में सुविधाओं की कमी है, कॉलेज न होने के कारण छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। बाईपास न होने के कारण भारी वाहन भी नगर के बीच से होकर गुजरते हैं, जिससे आए दिन जाम और हादसे होते हैं।
नगर पालिका सचिव दीपक कुमार ने कहा कि मैं फिलहाल कैथल में रह रहा हूं क्योंकि जिला कार्यालय वहीं स्थित है और वहां की बैठकों में नियमित जाना होता है। बावजूद इसके मैं अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं और रोज़ाना कार्यालय में उपस्थित रहता हूं। यदि सीवन में उपयुक्त निवास की व्यवस्था होती है, तो मैं यहां रहना पसंद करूंगा।
उन्होंने बताया कि नगर पालिका कार्यालय भवन के निर्माण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, और भवन तैयार होने पर वह यहीं रहेंगे।
लाल डोरा नीति में उलझे शहरवासी
शहर बनने से पहले गांव की ‘स्वामित्व योजना’ में लोगों को नाममात्र शुल्क पर मालिकाना हक मिल रहा था, लेकिन अब नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद वही हक पाने के लिए टैक्स देना पड़ रहा है। लोग कहते हैं कि आम लोग अपने ही घरों में किरायेदार जैसे महसूस कर रहे हैं।
चार साल हो गए, लेकिन अब भी वही टूटी सड़के और अधूरी गलियां। नगर पालिका का सिर्फ नाम मिला है, सुविधाएं अब भी सपना हैं।
-सुरेंद्र नागपाल, निवासी सीवन
सीवरेज के नाम पर खोदाई तो हुई, पर उसे दोबारा ठीक करने कोई नहीं आया। हर गली में धूल और कीचड़ का राज है। बहुत परेशानी होती है। -सुरेश कुमार, निवासी सीवन
नगर के पास कार्यालय हैं, लेकिन अफसर यहां रहना ही नहीं चाहते। कारण साफ है— यहां रहने लायक बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। - सादा राम, निवासी सीवन
प्रमुख समस्याएं
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एसडीओ, जो पावर हाउस से जुड़े हैं, सीवन में तैनात होते हुए भी यहीं निवास नहीं करते।
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खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, नायब तहसीलदार और नगर पालिका सचिव सभी कैथल में रहना पसंद करते हैं।
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यह स्थिति दर्शाती है कि अफसरों को खुद इस शहर में रहने में असुविधा महसूस होती है।
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सीवन। साल 2021 में सीवन को नगर पालिका का दर्जा तो मिल गया, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद शहरी स्वरूप सिर्फ़ कागज़ों तक ही सीमित है। न सड़कों की हालत सुधरी, न ही पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में कोई बड़ा सुधार हुआ। नगर पालिका का गठन, कार्यालय की स्थापना और स्टाफ की तैनाती तो हुई, लेकिन विकास अब तक पटरी पर नहीं चढ़ पाया है। अधिकारी भी सीवन में रहने के बजाय कैथल में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
उम्मीदें जगी थीं पर कुछ न हुआ ः नगर पालिका बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब गलियां पक्की होंगी, स्ट्रीट लाइटें लगेंगी, नालियां सुधरेंगी और सीवन एक व्यवस्थित शहर की शक्ल लेगा। लेकिन आज भी यहां का हाल किसी ग्रामीण क्षेत्र से कम नहीं है।
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गड्ढों से भरी गलियां ः कभी आदर्श गांव योजना के तहत बनी गलियां अब जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह गड्ढे, उखड़े ब्लॉक और अधूरा सीवरेज कार्य सीवन के विकास की कहानी बयां करता है।
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शहर सिर्फ नाम का ः सीवन नगर में न स्ट्रीट लाइटें हैं, न सीसीटीवी कैमरे, और न ही कोई प्रमुख सार्वजनिक सुविधा। एकमात्र पार्क में सुविधाओं की कमी है, कॉलेज न होने के कारण छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। बाईपास न होने के कारण भारी वाहन भी नगर के बीच से होकर गुजरते हैं, जिससे आए दिन जाम और हादसे होते हैं।
नगर पालिका सचिव दीपक कुमार ने कहा कि मैं फिलहाल कैथल में रह रहा हूं क्योंकि जिला कार्यालय वहीं स्थित है और वहां की बैठकों में नियमित जाना होता है। बावजूद इसके मैं अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभा रहा हूं और रोज़ाना कार्यालय में उपस्थित रहता हूं। यदि सीवन में उपयुक्त निवास की व्यवस्था होती है, तो मैं यहां रहना पसंद करूंगा।
उन्होंने बताया कि नगर पालिका कार्यालय भवन के निर्माण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, और भवन तैयार होने पर वह यहीं रहेंगे।
लाल डोरा नीति में उलझे शहरवासी
शहर बनने से पहले गांव की ‘स्वामित्व योजना’ में लोगों को नाममात्र शुल्क पर मालिकाना हक मिल रहा था, लेकिन अब नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद वही हक पाने के लिए टैक्स देना पड़ रहा है। लोग कहते हैं कि आम लोग अपने ही घरों में किरायेदार जैसे महसूस कर रहे हैं।
चार साल हो गए, लेकिन अब भी वही टूटी सड़के और अधूरी गलियां। नगर पालिका का सिर्फ नाम मिला है, सुविधाएं अब भी सपना हैं।
-सुरेंद्र नागपाल, निवासी सीवन
सीवरेज के नाम पर खोदाई तो हुई, पर उसे दोबारा ठीक करने कोई नहीं आया। हर गली में धूल और कीचड़ का राज है। बहुत परेशानी होती है। -सुरेश कुमार, निवासी सीवन
नगर के पास कार्यालय हैं, लेकिन अफसर यहां रहना ही नहीं चाहते। कारण साफ है— यहां रहने लायक बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं। - सादा राम, निवासी सीवन
प्रमुख समस्याएं
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एसडीओ, जो पावर हाउस से जुड़े हैं, सीवन में तैनात होते हुए भी यहीं निवास नहीं करते।
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खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, नायब तहसीलदार और नगर पालिका सचिव सभी कैथल में रहना पसंद करते हैं।
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यह स्थिति दर्शाती है कि अफसरों को खुद इस शहर में रहने में असुविधा महसूस होती है।