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Kaithal News: सीता हरण का हुआ मंचन
Sun, 22 Oct 2023 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 22 Oct 2023 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला/चीका। प्राचीन श्री भवानी मंदिर में आदर्श नाटक क्लब की ओर से चल रही रामलीला में कलाकारों ने जटायु और रावण युद्ध, मारीच वध का मंचन किया। साथ सीता का हरण कर रावण ले गया।
खर व दूषण के वध के बाद अपमान से आहत बहन शूर्पणखा रावण के दरबार में पहुंची। उसने रावण को खर व दूषण के वध की सूचना दी। कहा कि मेरी यह दशा वन में आए दो संन्यासियों ने की है। मैंने उनको आप का परिचय भी दिया था। उन्होंने कहा कि वे रावण को नहीं जानते।
रावण मामा मारीच के पास पहुंचता है। मारीच सोने के हिरण का रूप लेकर माता जानकी की कुटिया के पास पहुंचता है। सीता के कहने पर श्री राम उसको मारने के लिए पीछे चले जाते हैं। श्री राम मारीच को मारते हैं तभी मारीच चिल्लाता है। माता सीता लक्ष्मण को मदद के लिए भेजती हैं। लक्ष्मण रेखा खींचकर वह चले जाते है। इसी बीच रावण ब्राह्मण के रूप में भिक्षा मांगता है सीता का हरण कर ले जाता है।
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जब दोनों भाई लौटकर कुटिया पर आते है तो उनको सीता नहीं मिलती है। तब वे सीता की खोज करने निकल जाते है। उन्हें जटायु घायल अवस्था में मिलता है तो वह सीता हरण की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही रामलीला का मंचन समाप्ति के बाद एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान राम की लीलाओं को पूरा देश देख रहा है। उनके जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
पूंडरी में किया राम वनवास का मंचन
पूंडरी। श्री रामा कृष्णा ड्रामेटिक का क्लब पूंडरी की ओर से मेन बाज़ार में आयोजित राम लीला में राम वनवास का मंचन किया। मुख्य अतिथि के तौर पर रंधीर सिंह धीरा ने भाग लिया। इस अवसर पर रामलीला मंचन में भगवान राम के राजतिलक की घोषणा होती है और मंथरा की ओर से यह समाचार केकैयी को बताया जाता है।क्रोध में केकैयी राजा दशरथ से तीन वचनों में राम को वनवास, भरत को राज तिलक मांगती है। बेटे के जंगलों में जाने के चलते राजा दशरथ की मौत हो जाती है और राम के साथ सीता व लक्ष्मण ही चले जाते हैं प्रधान विनोद कुमार व संरक्षक ईश्वर सिंह खर्रा ने कहा कि इस प्रसंग से हमें माता पिता की आज्ञा का पालन की शिक्षा मिलती है राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम होते हुए राज़ पहाड़ को त्यागकर पिता के आदेश को मानते हुए तुरंत वन जानने की ठान ली और उनके साथ पत्नी धर्म निभाते हुए माता सीता व भाई लक्ष्मण भी गए। संवाद
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गुहला/चीका। प्राचीन श्री भवानी मंदिर में आदर्श नाटक क्लब की ओर से चल रही रामलीला में कलाकारों ने जटायु और रावण युद्ध, मारीच वध का मंचन किया। साथ सीता का हरण कर रावण ले गया।
खर व दूषण के वध के बाद अपमान से आहत बहन शूर्पणखा रावण के दरबार में पहुंची। उसने रावण को खर व दूषण के वध की सूचना दी। कहा कि मेरी यह दशा वन में आए दो संन्यासियों ने की है। मैंने उनको आप का परिचय भी दिया था। उन्होंने कहा कि वे रावण को नहीं जानते।
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रावण मामा मारीच के पास पहुंचता है। मारीच सोने के हिरण का रूप लेकर माता जानकी की कुटिया के पास पहुंचता है। सीता के कहने पर श्री राम उसको मारने के लिए पीछे चले जाते हैं। श्री राम मारीच को मारते हैं तभी मारीच चिल्लाता है। माता सीता लक्ष्मण को मदद के लिए भेजती हैं। लक्ष्मण रेखा खींचकर वह चले जाते है। इसी बीच रावण ब्राह्मण के रूप में भिक्षा मांगता है सीता का हरण कर ले जाता है।
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जब दोनों भाई लौटकर कुटिया पर आते है तो उनको सीता नहीं मिलती है। तब वे सीता की खोज करने निकल जाते है। उन्हें जटायु घायल अवस्था में मिलता है तो वह सीता हरण की जानकारी मिलती है। इसके साथ ही रामलीला का मंचन समाप्ति के बाद एसडी सभा के प्रधान राजीव शर्मा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान राम की लीलाओं को पूरा देश देख रहा है। उनके जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
पूंडरी में किया राम वनवास का मंचन
पूंडरी। श्री रामा कृष्णा ड्रामेटिक का क्लब पूंडरी की ओर से मेन बाज़ार में आयोजित राम लीला में राम वनवास का मंचन किया। मुख्य अतिथि के तौर पर रंधीर सिंह धीरा ने भाग लिया। इस अवसर पर रामलीला मंचन में भगवान राम के राजतिलक की घोषणा होती है और मंथरा की ओर से यह समाचार केकैयी को बताया जाता है।क्रोध में केकैयी राजा दशरथ से तीन वचनों में राम को वनवास, भरत को राज तिलक मांगती है। बेटे के जंगलों में जाने के चलते राजा दशरथ की मौत हो जाती है और राम के साथ सीता व लक्ष्मण ही चले जाते हैं प्रधान विनोद कुमार व संरक्षक ईश्वर सिंह खर्रा ने कहा कि इस प्रसंग से हमें माता पिता की आज्ञा का पालन की शिक्षा मिलती है राम ने मर्यादा पुरुषोत्तम होते हुए राज़ पहाड़ को त्यागकर पिता के आदेश को मानते हुए तुरंत वन जानने की ठान ली और उनके साथ पत्नी धर्म निभाते हुए माता सीता व भाई लक्ष्मण भी गए। संवाद