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निशानेबाज हरविंद्र को ढाई करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी का एलान
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Shooter Harvindra announced Rs 2.5 crore and government job
- फोटो : Kaithal
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पैरा ओलंपिक में देश का नाम रोशन करते हुए कांस्य पदक जीतने वाले हरविंद्र सिंह को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ढाई करोड़ रुपये सहित अन्य सभी सुविधाएं देने का एलान किया है। साथ ही ट्विट करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल ने हरविंद्र सिंह को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने ट्विट में कहा कि पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर खिलाड़ी हरविंद्र सिंह को हरियाणा खेल नीति के तहत 2.5 करोड़ रुपये इनाम राशि और सरकारी नौकरी सहित अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। हरविंद्र सिंह ने कांस्य पदक जीतकर हरियाणा के साथ-साथ सभी देशवासियों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी है। इसके लिए उन्हें ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं।
उधर, मां का साया सिर से उठने के बाद भी हरविंद्र सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार पदक जीत रहे हैं। बता दें कि 2011 में हरविंद्र सिंह ने टीवी में पैरा ओलंपिक चल रहे थे, वह देखकर ही उन्होंने खेलने की शुरुआत की थी। इसके बाद धीरे-धीरे जैसे उनका निशाना फिट बैठता गया वह अच्छी रैंकिंग हासिल करते गए। 2018 में इंडोनेशिया में एशियन पैरा गेम्स की तैयारी कर रहे हरविंदर को उस समय झटका लगा। जब एशियन पैरा गेम्स के केवल 20 दिन पहले उनकी माता का हार्ट अटैक होने से देहांत हो गया था। लेकिन इसके बावजूद भी हरविंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और इस प्रतियोगिता में खेले और देश के लिए गोल्ड जीता था।
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जिले के गांव अजीत नगर के हरविंद्र सिंह ने टोक्यो पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर जिले व देश का नाम रोशन किया है। बता दें कि हरविंद्र सिंह 2011 पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में बीएससी कर रहे थे। उस समय 2011 में टीवी पर लाइव चल रहे पैरा ओलंपिक खेल देखकर उनमें भी खेलने का जज्बा पैदा हुआ था। इसके बाद उन्होंने खेलने के लिए कोच जीवनजोत सिंह व गौरव से मुलाकात की। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने अभ्यास करना शुरू कर दिया। शुरुआत में तो उनका निशानी काफी दूर जाता था। धीरे धीरे उनका जैसे अभ्यास होता गया उनका निशाना भी अच्छा होने लगा। इसके बाद कई यूनिवर्सिटी स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसके बाद नेशनल में भी खेले वहां से इन्होंने पदक जीतने की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद 2018 में उनकी माता जी का देहांत हो गया। लेकिन उसके परिवार व उसके दोस्तों ने उसका हौसला नहीं गिरने दिया। उस समय हुई एशियन पैरा गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया था।
हरविद्र सिंह देश के पहले तीरंदाज हैं, जिन्होंने 2018 में इंडोनेशिया में हुई एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए रिकर्व इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वे छह बार देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एशियन पैरा चैंपियनशिप 2019 में कांस्य पदक हासिल किया था। जून 2019 में नीदरलैंड में आयोजित विश्व पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में पैरा ओलंपिक 2020 के लिए कोटा हासिल किया था। कोरोना के कारण पैरा ओलंपिक 2020 की बजाय 2021 में करवाए जाएंगे। इसके अलावा बीजिंग में 2017 में हुई विश्व पैरा आचर्री में सातवां स्थान, थाईलेंड में 2019 में हुई तीसरी एशियन पैरा आचर्री के टीम इवेंट में कांस्य पदक, रोहतक में 2016 में हुई पहली पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, तेलंगाना में 2017 में दूसरी पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक, रोहतक में 2019 में तीसरी पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता रजत पदक हासिल किया था।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने ट्विट में कहा कि पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने पर खिलाड़ी हरविंद्र सिंह को हरियाणा खेल नीति के तहत 2.5 करोड़ रुपये इनाम राशि और सरकारी नौकरी सहित अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। हरविंद्र सिंह ने कांस्य पदक जीतकर हरियाणा के साथ-साथ सभी देशवासियों के दिल पर अमिट छाप छोड़ी है। इसके लिए उन्हें ढेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएं।
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उधर, मां का साया सिर से उठने के बाद भी हरविंद्र सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार पदक जीत रहे हैं। बता दें कि 2011 में हरविंद्र सिंह ने टीवी में पैरा ओलंपिक चल रहे थे, वह देखकर ही उन्होंने खेलने की शुरुआत की थी। इसके बाद धीरे-धीरे जैसे उनका निशाना फिट बैठता गया वह अच्छी रैंकिंग हासिल करते गए। 2018 में इंडोनेशिया में एशियन पैरा गेम्स की तैयारी कर रहे हरविंदर को उस समय झटका लगा। जब एशियन पैरा गेम्स के केवल 20 दिन पहले उनकी माता का हार्ट अटैक होने से देहांत हो गया था। लेकिन इसके बावजूद भी हरविंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और इस प्रतियोगिता में खेले और देश के लिए गोल्ड जीता था।
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जिले के गांव अजीत नगर के हरविंद्र सिंह ने टोक्यो पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर जिले व देश का नाम रोशन किया है। बता दें कि हरविंद्र सिंह 2011 पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में बीएससी कर रहे थे। उस समय 2011 में टीवी पर लाइव चल रहे पैरा ओलंपिक खेल देखकर उनमें भी खेलने का जज्बा पैदा हुआ था। इसके बाद उन्होंने खेलने के लिए कोच जीवनजोत सिंह व गौरव से मुलाकात की। उनके मार्गदर्शन में उन्होंने अभ्यास करना शुरू कर दिया। शुरुआत में तो उनका निशानी काफी दूर जाता था। धीरे धीरे उनका जैसे अभ्यास होता गया उनका निशाना भी अच्छा होने लगा। इसके बाद कई यूनिवर्सिटी स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसके बाद नेशनल में भी खेले वहां से इन्होंने पदक जीतने की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद 2018 में उनकी माता जी का देहांत हो गया। लेकिन उसके परिवार व उसके दोस्तों ने उसका हौसला नहीं गिरने दिया। उस समय हुई एशियन पैरा गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया था।
हरविद्र सिंह देश के पहले तीरंदाज हैं, जिन्होंने 2018 में इंडोनेशिया में हुई एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए रिकर्व इवेंट में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वे छह बार देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एशियन पैरा चैंपियनशिप 2019 में कांस्य पदक हासिल किया था। जून 2019 में नीदरलैंड में आयोजित विश्व पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में पैरा ओलंपिक 2020 के लिए कोटा हासिल किया था। कोरोना के कारण पैरा ओलंपिक 2020 की बजाय 2021 में करवाए जाएंगे। इसके अलावा बीजिंग में 2017 में हुई विश्व पैरा आचर्री में सातवां स्थान, थाईलेंड में 2019 में हुई तीसरी एशियन पैरा आचर्री के टीम इवेंट में कांस्य पदक, रोहतक में 2016 में हुई पहली पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, तेलंगाना में 2017 में दूसरी पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक, रोहतक में 2019 में तीसरी पैरा आचर्री नेशनल प्रतियोगिता रजत पदक हासिल किया था।